366. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
25 · अल-फुरकान
وَالَّذ۪ينَ لَا يَدْعُونَ مَعَ اللّٰهِ اِلٰهًا اٰخَرَ وَلَا يَقْتُلُونَ النَّفْسَ الَّت۪ي حَرَّمَ اللّٰهُ اِلَّا بِالْحَقِّ وَلَا يَزْنُونَۚ وَمَنْ يَفْعَلْ ذٰلِكَ يَلْقَ اَثَامًاۙ68
जो अल्लाह के साथ किसी दूसरे इष्ट-पूज्य को नहीं पुकारते और न नाहक़ किसी जीव को जिस (के क़त्ल) को अल्लाह ने हराम किया है, क़त्ल करते है। और न वे व्यभिचार करते है - जो कोई यह काम करे तो वह गुनाह के वबाल से दोचार होगा
يُضَاعَفْ لَهُ الْعَذَابُ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ وَيَخْلُدْ ف۪يه۪ مُهَانًاۗ69
क़ियामत के दिन उसकी यातना बढ़ती चली जाएगी॥ और वह उसी में अपमानित होकर स्थायी रूप से पड़ा रहेगा
اِلَّا مَنْ تَابَ وَاٰمَنَ وَعَمِلَ عَمَلًا صَالِحًا فَاُو۬لٰٓئِكَ يُبَدِّلُ اللّٰهُ سَيِّـَٔاتِهِمْ حَسَنَاتٍۜ وَكَانَ اللّٰهُ غَفُورًا رَح۪يمًا70
सिवाय उसके जो पलट आया और ईमान लाया और अच्छा कर्म किया, तो ऐसे लोगों की बुराइयों को अल्लाह भलाइयों से बदल देगा। और अल्लाह है भी अत्यन्त क्षमाशील, दयावान
وَمَنْ تَابَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَاِنَّهُ يَتُوبُ اِلَى اللّٰهِ مَتَابًا71
और जिसने तौबा की और अच्छा कर्म किया, तो निश्चय ही वह अल्लाह की ओर पलटता है, जैसा कि पलटने का हक़ है
وَالَّذ۪ينَ لَا يَشْهَدُونَ الزُّورَۙ وَاِذَا مَرُّوا بِاللَّغْوِ مَرُّوا كِرَامًا72
जो किसी झूठ और असत्य में सम्मिलित नहीं होते और जब किसी व्यर्थ के कामों के पास से गुज़रते है, तो श्रेष्ठतापूर्वक गुज़र जाते है,
وَالَّذ۪ينَ اِذَا ذُكِّرُوا بِاٰيَاتِ رَبِّهِمْ لَمْ يَخِرُّوا عَلَيْهَا صُمًّا وَعُمْيَانًا73
जो ऐसे हैं कि जब उनके रब की आयतों के द्वारा उन्हें याददिहानी कराई जाती है तो उन (आयतों) पर वे अंधे और बहरे होकर नहीं गिरते।
وَالَّذ۪ينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ اَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ اَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّق۪ينَ اِمَامًا74
और जो कहते है, "ऐ हमारे रब! हमें हमारी अपनी पत्नियों और हमारी संतान से आँखों की ठंडक प्रदान कर और हमें डर रखनेवालों का नायक बना दे।"
اُو۬لٰٓئِكَ يُجْزَوْنَ الْغُرْفَةَ بِمَا صَبَرُوا وَيُلَقَّوْنَ ف۪يهَا تَحِيَّةً وَسَلَامًاۙ75
यही वे लोग है जिन्हें, इसके बदले में कि वे जमे रहे, उच्च भवन प्राप्त होगा, तथा ज़िन्दाबाद और सलाम से उनका वहाँ स्वागत होगा
خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۜ حَسُنَتْ مُسْتَقَرًّا وَمُقَامًا76
वहाँ वे सदैव रहेंगे। बहुत ही अच्छी है वह ठहरने की जगह और स्थान;
قُلْ مَا يَعْبَؤُ۬ا بِكُمْ رَبّ۪ي لَوْلَا دُعَٓاؤُ۬كُمْۚ فَقَدْ كَذَّبْتُمْ فَسَوْفَ يَكُونُ لِزَامًا77
कह दो, "मेरे रब को तुम्हारी कोई परवाह नहीं अगर तुम (उसको) न पुकारो। अब जबकि तुम झुठला चुके हो, तो शीघ्र ही वह चीज़ चिमट जानेवाली होगी।"