367. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
26 · अश-शुअरा
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
طٰسٓمٓۜ1
ता॰ सीन॰ मीम॰
تِلْكَ اٰيَاتُ الْكِتَابِ الْمُب۪ينِ2
ये स्पष्ट किताब की आयतें है
لَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَفْسَكَ اَلَّا يَكُونُوا مُؤْمِن۪ينَ3
शायद इसपर कि वे ईमान नहीं लाते, तुम अपने प्राण ही खो बैठोगे
اِنْ نَشَاْ نُنَزِّلْ عَلَيْهِمْ مِنَ السَّمَٓاءِ اٰيَةً فَظَلَّتْ اَعْنَاقُهُمْ لَهَا خَاضِع۪ينَ4
यदि हम चाहें तो उनपर आकाश से एक निशानी उतार दें। फिर उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी रह जाएँ
وَمَا يَاْت۪يهِمْ مِنْ ذِكْرٍ مِنَ الرَّحْمٰنِ مُحْدَثٍ اِلَّا كَانُوا عَنْهُ مُعْرِض۪ينَ5
उनके पास रहमान की ओर से जो नवीन अनुस्मृति भी आती है, वे उससे मुँह फेर ही लेते है
فَقَدْ كَذَّبُوا فَسَيَاْت۪يهِمْ اَنْبٰٓؤُ۬ا مَا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ6
अब जबकि वे झुठला चुके है, तो शीघ्र ही उन्हें उसकी हक़ीकत मालूम हो जाएगी, जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते रहे है
اَوَلَمْ يَرَوْا اِلَى الْاَرْضِ كَمْ اَنْبَتْنَا ف۪يهَا مِنْ كُلِّ زَوْجٍ كَر۪يمٍ7
क्या उन्होंने धरती को नहीं देखा कि हमने उसमें कितने ही प्रकार की उमदा चीज़ें पैदा की है?
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ8
निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है, इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟9
और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
وَاِذْ نَادٰى رَبُّكَ مُوسٰٓى اَنِ ائْتِ الْقَوْمَ الظَّالِم۪ينَۙ10
और जबकि तुम्हारे रह ने मूसा को पुकारा कि "ज़ालिम लोगों के पास जा -
قَوْمَ فِرْعَوْنَۜ اَلَا يَتَّقُونَ11
फ़िरऔन की क़ौम के पास - क्या वे डर नहीं रखते?"
قَالَ رَبِّ اِنّ۪ٓي اَخَافُ اَنْ يُكَذِّبُونِۜ12
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मुझे डर है कि वे मुझे झुठला देंगे,
وَيَض۪يقُ صَدْر۪ي وَلَا يَنْطَلِقُ لِسَان۪ي فَاَرْسِلْ اِلٰى هٰرُونَ13
और मेरा सीना घुटता है और मेरी ज़बान नहीं चलती। इसलिए हारून की ओर भी संदेश भेज दे
وَلَهُمْ عَلَيَّ ذَنْبٌ فَاَخَافُ اَنْ يَقْتُلُونِۚ14
और मुझपर उनके यहाँ के एक गुनाह का बोझ भी है। इसलिए मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।"
قَالَ كَلَّاۚ فَاذْهَبَا بِاٰيَاتِنَٓا اِنَّا مَعَكُمْ مُسْتَمِعُونَ15
कहा, "कदापि नहीं, तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ। हम तुम्हारे साथ है, सुनने को मौजूद है
فَاْتِيَا فِرْعَوْنَ فَقُولَٓا اِنَّا رَسُولُ رَبِّ الْعَالَم۪ينَۙ16
अतः तुम दोनो फ़िरऔन को पास जाओ और कहो कि हम सारे संसार के रब के भेजे हुए है
اَنْ اَرْسِلْ مَعَنَا بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَۜ17
कि तू इसराईल की सन्तान को हमारे साथ जाने दे।"
قَالَ اَلَمْ نُرَبِّكَ ف۪ينَا وَل۪يدًا وَلَبِثْتَ ف۪ينَا مِنْ عُمُرِكَ سِن۪ينَ18
(फ़िरऔन ने) कहा, "क्या हमने तुझे जबकि तू बच्चा था, अपने यहाँ पाला नहीं था? और तू अपनी अवस्था के कई वर्षों तक हमारे साथ रहा,
وَفَعَلْتَ فَعْلَتَكَ الَّت۪ي فَعَلْتَ وَاَنْتَ مِنَ الْكَافِر۪ينَ19
और तूने अपना वह काम किया, जो किया। तू बड़ा ही कृतघ्न है।"