368. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
26 · अश-शुअरा
قَالَ فَعَلْتُهَٓا اِذًا وَاَنَا۬ مِنَ الضَّٓالّ۪ينَۜ20
कहा, ऐसा तो मुझसे उस समय हुआ जबकि मैं चूक गया था
فَفَرَرْتُ مِنْكُمْ لَمَّا خِفْتُكُمْ فَوَهَبَ ل۪ي رَبّ۪ي حُكْمًا وَجَعَلَن۪ي مِنَ الْمُرْسَل۪ينَ21
फिर जब मुझे तुम्हारा भय हुआ तो मैं तुम्हारे यहाँ से भाग गया। फिर मेरे रब ने मुझे निर्णय-शक्ति प्रदान की और मुझे रसूलों में सम्मिलित किया
وَتِلْكَ نِعْمَةٌ تَمُنُّهَا عَلَيَّ اَنْ عَبَّدْتَ بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَۜ22
यही वह उदार अनुग्रह है जिसका रहमान तू मुझपर जताता है कि तूने इसराईल की सन्तान को ग़ुलाम बना रखा है।"
قَالَ فِرْعَوْنُ وَمَا رَبُّ الْعَالَم۪ينَ23
फ़िरऔन ने कहा, "और यह सारे संसार का रब क्या होता है?"
قَالَ رَبُّ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَاۜ اِنْ كُنْتُمْ مُوقِن۪ينَ24
उसने कहा, "आकाशों और धरती का रब और जो कुछ इन दोनों का मध्य है उसका भी, यदि तुम्हें यकीन हो।"
قَالَ لِمَنْ حَوْلَهُٓ اَلَا تَسْتَمِعُونَ25
उसने अपने आस-पासवालों से कहा, "क्या तुम सुनते नहीं हो?"
قَالَ رَبُّكُمْ وَرَبُّ اٰبَٓائِكُمُ الْاَوَّل۪ينَ26
कहा, "तुम्हारा रब और तुम्हारे अगले बाप-दादा का रब।"
قَالَ اِنَّ رَسُولَكُمُ الَّذ۪ٓي اُرْسِلَ اِلَيْكُمْ لَمَجْنُونٌ27
बोला, "निश्चय ही तुम्हारा यह रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, बिलकुल ही पागल है।"
قَالَ رَبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ وَمَا بَيْنَهُمَاۜ اِنْ كُنْتُمْ تَعْقِلُونَ28
उसने कहा, "पूर्व और पश्चिम का रब और जो कुछ उनके बीच है उसका भी, यदि तुम कुछ बुद्धि रखते हो।"
قَالَ لَئِنِ اتَّخَذْتَ اِلٰهًا غَيْر۪ي لَاَجْعَلَنَّكَ مِنَ الْمَسْجُون۪ينَ29
बोला, "यदि तूने मेरे सिवा किसी और को पूज्य एवं प्रभु बनाया, तो मैं तुझे बन्दी बनाकर रहूँगा।"
قَالَ اَوَلَوْ جِئْتُكَ بِشَيْءٍ مُب۪ينٍ30
उसने कहा, "क्या यदि मैं तेरे पास एक स्पष्ट चीज़ ले आऊँ तब भी?"
قَالَ فَاْتِ بِه۪ٓ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِق۪ينَ31
बोलाः “अच्छा वह ले आ; यदि तू सच्चा है” ।
فَاَلْقٰى عَصَاهُ فَاِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُب۪ينٌۚ32
फिर उसने अपनी लाठी डाल दी, तो अचानक क्या देखते है कि वह एक प्रत्यक्ष अज़गर है
وَنَزَعَ يَدَهُ فَاِذَا هِيَ بَيْضَٓاءُ لِلنَّاظِر۪ينَ۟33
और उसने अपना हाथ बाहर खींचा तो फिर क्या देखते है कि वह देखनेवालों के सामने चमक रहा है
قَالَ لِلْمَلَاِ حَوْلَهُٓ اِنَّ هٰذَا لَسَاحِرٌ عَل۪يمٌۙ34
उसने अपने आस-पास के सरदारों से कहा, "निश्चय ही यह एक बड़ा ही प्रवीण जादूगर है
يُر۪يدُ اَنْ يُخْرِجَكُمْ مِنْ اَرْضِكُمْ بِسِحْرِه۪ۗ فَمَاذَا تَاْمُرُونَ35
चाहता है कि अपने जादू से तुम्हें तुम्हारी अपनी भूमि से निकाल बाहर करें; तो अब तुम क्या कहते हो?"
قَالُٓوا اَرْجِهْ وَاَخَاهُ وَابْعَثْ فِي الْمَدَٓائِنِ حَاشِر۪ينَۙ36
उन्होंने कहा, "इसे और इसके भाई को अभी टाले रखिए, और एकत्र करनेवालों को नगरों में भेज दीजिए
يَاْتُوكَ بِكُلِّ سَحَّارٍ عَل۪يمٍ37
कि वे प्रत्येक प्रवीण जादूगर को आपके पास ले आएँ।"
فَجُمِعَ السَّحَرَةُ لِم۪يقَاتِ يَوْمٍ مَعْلُومٍۙ38
अतएव एक निश्चित दिन के नियत समय पर जादूगर एकत्र कर लिए गए
وَق۪يلَ لِلنَّاسِ هَلْ اَنْتُمْ مُجْتَمِعُونَۙ39
और लोगों से कहा गया, "क्या तुम भी एकत्र होते हो?"