370. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

370. पृष्ठ
26 · अश-शुअरा
فَلَمَّا تَرَٓاءَ الْجَمْعَانِ قَالَ اَصْحَابُ مُوسٰٓى اِنَّا لَمُدْرَكُونَۚ61
फिर जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देख लिया तो मूसा के साथियों ने कहा, "हम तो पकड़े गए!"
قَالَ كَلَّاۚ اِنَّ مَعِيَ رَبّ۪ي سَيَهْد۪ينِ62
उसने कहा, "कदापि नहीं, मेरे साथ मेरा रब है। वह अवश्य मेरा मार्गदर्शन करेगा।"
فَاَوْحَيْنَٓا اِلٰى مُوسٰٓى اَنِ اضْرِبْ بِعَصَاكَ الْبَحْرَۜ فَانْفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَالطَّوْدِ الْعَظ۪يمِۚ63
तब हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "अपनी लाठी सागर पर मार।"
وَاَزْلَفْنَا ثَمَّ الْاٰخَر۪ينَۚ64
और हम दूसरों को भी निकट ले आए
وَاَنْجَيْنَا مُوسٰى وَمَنْ مَعَهُٓ اَجْمَع۪ينَۚ65
हमने मूसा को और उन सबको जो उसके साथ थे, बचा लिया
ثُمَّ اَغْرَقْنَا الْاٰخَر۪ينَۜ66
और दूसरों को डूबो दिया
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ67
निस्संदेह इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟68
और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَاَ اِبْرٰه۪يمَۢ69
और उन्हें इबराहीम का वृत्तान्त सुनाओ,
اِذْ قَالَ لِاَب۪يهِ وَقَوْمِه۪ مَا تَعْبُدُونَ70
जबकि उसने अपने बाप और अपनी क़ौंम के लोगों से कहा, "तुम क्या पूजते हो?"
قَالُوا نَعْبُدُ اَصْنَامًا فَنَظَلُّ لَهَا عَاكِف۪ينَ71
उन्होंने कहा, "हम बुतों की पूजा करते है, हम तो उन्हीं की सेवा में लगे रहेंगे।"
قَالَ هَلْ يَسْمَعُونَكُمْ اِذْ تَدْعُونَۙ72
उसने कहा, "क्या ये तुम्हारी सुनते है, जब तुम पुकारते हो,
اَوْ يَنْفَعُونَكُمْ اَوْ يَضُرُّونَ73
या ये तुम्हें कुछ लाभ या हानि पहुँचाते है?"
قَالُوا بَلْ وَجَدْنَٓا اٰبَٓاءَنَا كَذٰلِكَ يَفْعَلُونَ74
उन्होंने कहा, "नहीं, बल्कि हमने तो अपने बाप-दादा को ऐसा ही करते पाया है।"
قَالَ اَفَرَاَيْتُمْ مَا كُنْتُمْ تَعْبُدُونَۙ75
उसने कहा, "क्या तुमने उनपर विचार भी किया कि जिन्हें तुम पूजते हो,
اَنْتُمْ وَاٰبَٓاؤُ۬كُمُ الْاَقْدَمُونَ76
तुम और तुम्हारे पहले के बाप-दादा?
فَاِنَّهُمْ عَدُوٌّ ل۪ٓي اِلَّا رَبَّ الْعَالَم۪ينَۙ77
वे सब तो मेरे शत्रु है, सिवाय सारे संसार के रब के,
اَلَّذ۪ي خَلَقَن۪ي فَهُوَ يَهْد۪ينِۙ78
जिसने मुझे पैदा किया और फिर वही मेरा मार्गदर्शन करता है
وَالَّذ۪ي هُوَ يُطْعِمُن۪ي وَيَسْق۪ينِۙ79
और वही है जो मुझे खिलाता और पिलाता है
وَاِذَا مَرِضْتُ فَهُوَ يَشْف۪ينِۖ80
और जब मैं बीमार होता हूँ, तो वही मुझे अच्छा करता है
وَالَّذ۪ي يُم۪يتُن۪ي ثُمَّ يُحْي۪ينِۙ81
और वही है जो मुझे मारेगा, फिर मुझे जीवित करेगा
وَالَّذ۪ٓي اَطْمَعُ اَنْ يَغْفِرَ ل۪ي خَط۪ٓيـَٔت۪ي يَوْمَ الدّ۪ينِۜ82
और वही है जिससे मुझे इसकी आकांक्षा है कि बदला दिए जाने के दिन वह मेरी ख़ता माफ़ कर देगा
رَبِّ هَبْ ل۪ي حُكْمًا وَاَلْحِقْن۪ي بِالصَّالِح۪ينَۙ83
ऐ मेरे रब! मुझे निर्णय-शक्ति प्रदान कर और मुझे योग्य लोगों के साथ मिला।