373. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
26 · अश-शुअरा
اِنْ هٰذَٓا اِلَّا خُلُقُ الْاَوَّل۪ينَۙ137
यह तो बस पहले लोगों की पुरानी आदत है
وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّب۪ينَۚ138
और हमें कदापि यातना न दी जाएगी।"
فَكَذَّبُوهُ فَاَهْلَكْنَاهُمْۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ139
अन्ततः उन्होंने उन्हें झुठला दिया जो हमने उनको विनष्ट कर दिया। बेशक इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟140
और बेशक तुम्हारा रब ही है, जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
كَذَّبَتْ ثَمُودُ الْمُرْسَل۪ينَۚ141
समूद ने रसूलों को झुठलाया,
اِذْ قَالَ لَهُمْ اَخُوهُمْ صَالِحٌ اَلَا تَتَّقُونَۚ142
जबकि उसके भाई सालेह ने उससे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?
اِنّ۪ي لَكُمْ رَسُولٌ اَم۪ينٌۙ143
निस्संदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُونِۚ144
अतः तुम अल्लाह का डर रखो और मेरी बात मानो
وَمَٓا اَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ اَجْرٍۚ اِنْ اَجْرِيَ اِلَّا عَلٰى رَبِّ الْعَالَم۪ينَۜ145
मैं इस काम पर तुमसे कोई बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है
اَتُتْرَكُونَ ف۪ي مَا هٰهُنَٓا اٰمِن۪ينَۙ146
क्या तुम यहाँ जो कुछ है उसके बीच, निश्चिन्त छोड़ दिए जाओगे,
ف۪ي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍۙ147
बाग़ों और स्रोतों
وَزُرُوعٍ وَنَخْلٍ طَلْعُهَا هَض۪يمٌۚ148
और खेतों और उन खजूरों में जिनके गुच्छे तरो ताज़ा और गुँथे हुए है?
وَتَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا فَارِه۪ينَۚ149
तुम पहाड़ों को काट-काटकर इतराते हुए घर बनाते हो?
فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُونِۚ150
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो
وَلَا تُط۪يعُٓوا اَمْرَ الْمُسْرِف۪ينَۙ151
और उन हद से गुज़र जानेवालों की आज्ञा का पालन न करो,
اَلَّذ۪ينَ يُفْسِدُونَ فِي الْاَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ152
जो धरती में बिगाड़ पैदा करते है, और सुधार का काम नहीं करते।"
قَالُٓوا اِنَّمَٓا اَنْتَ مِنَ الْمُسَحَّر۪ينَۚ153
उन्होंने कहा, "तू तो बस जादू का मारा हुआ है।
مَٓا اَنْتَ اِلَّا بَشَرٌ مِثْلُنَاۚ فَاْتِ بِاٰيَةٍ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِق۪ينَ154
तू बस हमारे ही जैसा एक आदमी है। यदि तू सच्चा है, तो कोई निशानी ले आ।"
قَالَ هٰذِه۪ نَاقَةٌ لَهَا شِرْبٌ وَلَكُمْ شِرْبُ يَوْمٍ مَعْلُومٍۚ155
उसने कहा, "यह ऊँटनी है। एक दिन पानी पीने की बारी इसकी है और एक नियत दिन की बारी पानी लेने की तुम्हारी है
وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُٓوءٍ فَيَاْخُذَكُمْ عَذَابُ يَوْمٍ عَظ۪يمٍ156
तकलीफ़ पहुँचाने के लिए इसे हाथ न लगाना, अन्यथा एक बड़े दिन की यातना तुम्हें आ लेगी।"
فَعَقَرُوهَا فَاَصْبَحُوا نَادِم۪ينَۙ157
किन्तु उन्होंने उसकी कूचें काट दी। फिर पछताते रह गए
فَاَخَذَهُمُ الْعَذَابُۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ158
अन्ततः यातना ने उन्हें आ दबोचा। निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟159
और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयाशील है