374. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

374. पृष्ठ
26 · अश-शुअरा
كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍۨ الْمُرْسَل۪ينَۚ160
लूत की क़ौम के लोगों ने रसूलों को झुठलाया;
اِذْ قَالَ لَهُمْ اَخُوهُمْ لُوطٌ اَلَا تَتَّقُونَۚ161
जबकि उनके भाई लूत ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?
اِنّ۪ي لَكُمْ رَسُولٌ اَم۪ينٌۙ162
मैं तो तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُونِۚ163
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो
وَمَٓا اَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ اَجْرٍۚ اِنْ اَجْرِيَ اِلَّا عَلٰى رَبِّ الْعَالَم۪ينَۜ164
मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता, मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है
اَتَاْتُونَ الذُّكْرَانَ مِنَ الْعَالَم۪ينَۙ165
क्या सारे संसारवालों में से तुम ही ऐसे हो जो पुरुषों के पास जाते हो,
وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمْ رَبُّكُمْ مِنْ اَزْوَاجِكُمْۜ بَلْ اَنْتُمْ قَوْمٌ عَادُونَ166
और अपनी पत्नियों को, जिन्हें तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए पैदा किया, छोड़ देते हो? इतना ही नहीं, बल्कि तुम हद से आगे बढ़े हुए लोग हो।"
قَالُوا لَئِنْ لَمْ تَنْتَهِ يَا لُوطُ لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمُخْرَج۪ينَ167
उन्होंने कहा, "यदि तू बाज़ न आया, ऐ लतू! तो तू अवश्य ही निकाल बाहर किया जाएगा।"
قَالَ اِنّ۪ي لِعَمَلِكُمْ مِنَ الْقَال۪ينَۜ168
उसने कहा, "मैं तुम्हारे कर्म से अत्यन्त विरक्त हूँ।
رَبِّ نَجِّن۪ي وَاَهْل۪ي مِمَّا يَعْمَلُونَ169
ऐ मेरे रब! मुझे और मेरे लोगों को, जो कुछ ये करते है उसके परिणाम से, बचा ले।"
فَنَجَّيْنَاهُ وَاَهْلَهُٓ اَجْمَع۪ينَۙ170
अन्ततः हमने उसे और उसके सारे लोगों को बचा लिया;
اِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِر۪ينَۚ171
सिवाय एक बुढ़िया के जो पीछे रह जानेवालों में थी
ثُمَّ دَمَّرْنَا الْاٰخَر۪ينَۚ172
फिर शेष दूसरे लोगों को हमने विनष्ट कर दिया।
وَاَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ مَطَرًاۚ فَسَٓاءَ مَطَرُ الْمُنْذَر۪ينَ173
और हमने उनपर एक बरसात बरसाई। और यह चेताए हुए लोगों की बहुत ही बुरी वर्षा थी
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ174
निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟175
और निश्चय ही तुम्हारा रब बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
كَذَّبَ اَصْحَابُ لْـَٔيْكَةِ الْمُرْسَل۪ينَۚ176
अल-ऐकावालों ने रसूलों को झुठलाया
اِذْ قَالَ لَهُمْ شُعَيْبٌ اَلَا تَتَّقُونَۚ177
जबकि शुऐब ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?
اِنّ۪ي لَكُمْ رَسُولٌ اَم۪ينٌۙ178
मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُونِۚ179
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो
وَمَٓا اَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ اَجْرٍۚ اِنْ اَجْرِيَ اِلَّا عَلٰى رَبِّ الْعَالَم۪ينَۜ180
मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता। मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है
اَوْفُوا الْكَيْلَ وَلَا تَكُونُوا مِنَ الْمُخْسِر۪ينَۚ181
तुम पूरा-पूरा पैमाना भरो और घाटा न दो
وَزِنُوا بِالْقِسْطَاسِ الْمُسْتَق۪يمِۚ182
और ठीक तराज़ू से तौलो
وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ اَشْيَٓاءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْاَرْضِ مُفْسِد۪ينَۚ183
और लोगों को उनकी चीज़ों में घाटा न दो और धरती में बिगाड़ और फ़साद मचाते मत फिरो