377. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

377. पृष्ठ
27 · अन-नमल
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
طٰسٓ۠ تِلْكَ اٰيَاتُ الْقُرْاٰنِ وَكِتَابٍ مُب۪ينٍۙ1
ता॰ सीन॰। ये आयतें है क़ुरआन और एक स्पष्ट किताब की
هُدًى وَبُشْرٰى لِلْمُؤْمِن۪ينَۙ2
मार्गदर्शन है और शुभ-सूचना उन ईमानवालों के लिए,
اَلَّذ۪ينَ يُق۪يمُونَ الصَّلٰوةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكٰوةَ وَهُمْ بِالْاٰخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ3
जो नमाज़ का आयोजन करते है और ज़कात देते है और वही है जो आख़िरत पर विश्वास रखते है
اِنَّ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ زَيَّنَّا لَهُمْ اَعْمَالَهُمْ فَهُمْ يَعْمَهُونَۜ4
रहे वे लोग जो आख़िरत को नहीं मानते, उनके लिए हमने उनकी करतूतों को शोभायमान बना दिया है। अतः वे भटकते फिरते है
اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ لَهُمْ سُٓوءُ الْعَذَابِ وَهُمْ فِي الْاٰخِرَةِ هُمُ الْاَخْسَرُونَ5
वही लोग है, जिनके लिए बुरी यातना है और वही है जो आख़िरत में अत्यन्त घाटे में रहेंगे
وَاِنَّكَ لَتُلَقَّى الْقُرْاٰنَ مِنْ لَدُنْ حَك۪يمٍ عَل۪يمٍ6
निश्चय ही तुम यह क़ुरआन एक बड़े तत्वदर्शी, ज्ञानवान (प्रभु) की ओर से पा रहे हो
اِذْ قَالَ مُوسٰى لِاَهْلِه۪ٓ اِنّ۪ٓي اٰنَسْتُ نَارًاۜ سَاٰت۪يكُمْ مِنْهَا بِخَبَرٍ اَوْ اٰت۪يكُمْ بِشِهَابٍ قَبَسٍ لَعَلَّكُمْ تَصْطَلُونَ7
याद करो जब मूसा ने अपने घरवालों से कहा कि "मैंने एक आग-सी देखी है। मैं अभी वहाँ से तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आता हूँ या तुम्हारे पास कोई दहकता अंगार लाता हूँ, ताकि तुम तापो।"
فَلَمَّا جَٓاءَهَا نُودِيَ اَنْ بُورِكَ مَنْ فِي النَّارِ وَمَنْ حَوْلَهَاۜ وَسُبْحَانَ اللّٰهِ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ8
फिर जब वह उसके पास पहुँचा तो उसे आवाज़ आई कि "मुबारक है वह जो इस आग में है और जो इसके आस-पास है। महान और उच्च है अल्लाह, सारे संसार का रब!
يَا مُوسٰٓى اِنَّهُٓ اَنَا۬ اللّٰهُ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُۙ9
ऐ मूसा! वह तो मैं अल्लाह हूँ, अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी!
وَاَلْقِ عَصَاكَۜ فَلَمَّا رَاٰهَا تَهْتَزُّ كَاَنَّهَا جَٓانٌّ وَلّٰى مُدْبِرًا وَلَمْ يُعَقِّبْۜ يَا مُوسٰى لَا تَخَفْ اِنّ۪ي لَا يَخَافُ لَدَيَّ الْمُرْسَلُونَۗ10
तू अपनी लाठी डाल दे।" जब मूसा ने देखा कि वह बल खा रहा है जैसे वह कोई साँप हो, तो वह पीठ फेरकर भागा और पीछे मुड़कर न देखा। "ऐ मूसा! डर मत। निस्संदेह रसूल मेरे पास डरा नहीं करते,
اِلَّا مَنْ ظَلَمَ ثُمَّ بَدَّلَ حُسْنًا بَعْدَ سُٓوءٍ فَاِنّ۪ي غَفُورٌ رَح۪يمٌ11
सिवाय उसके जिसने कोई ज़्यादती की हो। फिर बुराई के पश्चात उसे भलाई से बदल दिया, तो मैं भी बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान हूँ
وَاَدْخِلْ يَدَكَ ف۪ي جَيْبِكَ تَخْرُجْ بَيْضَٓاءَ مِنْ غَيْرِ سُٓوءٍ ف۪ي تِسْعِ اٰيَاتٍ اِلٰى فِرْعَوْنَ وَقَوْمِه۪ۜ اِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِق۪ينَ12
अपना हाथ गिरेबान में डाल। वह बिना किसी ख़राबी के उज्जवल चमकता निकलेगा। ये नौ निशानियों में से है फ़िरऔन और उसकी क़ौम की ओर भेजने के लिए। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग है।"
فَلَمَّا جَٓاءَتْهُمْ اٰيَاتُنَا مُبْصِرَةً قَالُوا هٰذَا سِحْرٌ مُب۪ينٌۚ13
किन्तु जब आँखें खोल देनेवाली हमारी निशानियाँ उनके पास आई तो उन्होंने कहा, "यह तो खुला हुआ जादू है।"