379. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

379. पृष्ठ
27 · अन-नमल
اِنّ۪ي وَجَدْتُ امْرَاَةً تَمْلِكُهُمْ وَاُو۫تِيَتْ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ وَلَهَا عَرْشٌ عَظ۪يمٌ23
मैंने एक स्त्री को उनपर शासन करते पाया है। उसे हर चीज़ प्राप्त है औऱ उसका एक बड़ा सिंहासन है
وَجَدْتُهَا وَقَوْمَهَا يَسْجُدُونَ لِلشَّمْسِ مِنْ دُونِ اللّٰهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ اَعْمَالَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ السَّب۪يلِ فَهُمْ لَا يَهْتَدُونَۙ24
मैंने उसे और उसकी क़ौम के लोगों को अल्लाह से इतर सूर्य को सजदा करते हुए पाया। शैतान ने उनके कर्मों को उनके लिए शोभायमान बना दिया है और उन्हें मार्ग से रोक दिया है - अतः वे सीधा मार्ग नहीं पा रहे है। -
اَلَّا يَسْجُدُوا لِلّٰهِ الَّذ۪ي يُخْرِجُ الْخَبْءَ فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُخْفُونَ وَمَا تُعْلِنُونَ25
खि अल्लाह को सजदा न करें जो आकाशों और धरती की छिपी चीज़ें निकालता है, और जानता है जो कुछ भी तुम छिपाते हो और जो कुछ प्रकट करते हो
اَللّٰهُ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظ۪يمِ26
अल्लाह कि उसके सिवा कोई इष्ट -पूज्य नहीं, वह महान सिंहासन का रब है।"
قَالَ سَنَنْظُرُ اَصَدَقْتَ اَمْ كُنْتَ مِنَ الْكَاذِب۪ينَ27
उसने कहा, "अभी हम देख लेते है कि तूने सच कहा या तू झूठा है
اِذْهَبْ بِكِتَاب۪ي هٰذَا فَاَلْقِهْ اِلَيْهِمْ ثُمَّ تَوَلَّ عَنْهُمْ فَانْظُرْ مَاذَا يَرْجِعُونَ28
मेरा यह पत्र लेकर जा, और इसे उन लोगों की ओर डाल दे। फिर उनके पास से अलग हटकर देख कि वे क्या प्रतिक्रिया व्यक्त करते है।"
قَالَتْ يَٓا اَيُّهَا الْمَلَؤُ۬ا اِنّ۪ٓي اُلْقِيَ اِلَيَّ كِتَابٌ كَر۪يمٌ29
वह बोली, "ऐ सरदारों! मेरी ओर एक प्रतिष्ठित पत्र डाला गया है
اِنَّهُ مِنْ سُلَيْمٰنَ وَاِنَّهُ بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّح۪يمِۙ30
वह सुलैमान की ओर से है और वह यह है कि अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यन्त दयावान है
اَلَّا تَعْلُوا عَلَيَّ وَاْتُون۪ي مُسْلِم۪ينَ۟31
यह कि मेरे मुक़ाबले में सरकशी न करो और आज्ञाकारी बनकर मेरे पास आओ।"
قَالَتْ يَٓا اَيُّهَا الْمَلَؤُ۬ا اَفْتُون۪ي ف۪ٓي اَمْر۪يۚ مَا كُنْتُ قَاطِعَةً اَمْرًا حَتّٰى تَشْهَدُونِ32
उसने कहा, "ऐ सरदारों! मेरे मामलें में मुझे परामर्श दो। मैं किसी मामले का फ़ैसला नहीं करती, जब तक कि तुम मेरे पास मौजूद न हो।"
قَالُوا نَحْنُ اُو۬لُوا قُوَّةٍ وَاُو۬لُوا بَاْسٍ شَد۪يدٍ وَالْاَمْرُ اِلَيْكِ فَانْظُر۪ي مَاذَا تَاْمُر۪ينَ33
उन्होंने कहा, "हम शक्तिशाली है और हमें बड़ी युद्ध-क्षमता प्राप्त है। आगे मामले का अधिकार आपको है, अतः आप देख लें कि आपको क्या आदेश देना है।"
قَالَتْ اِنَّ الْمُلُوكَ اِذَا دَخَلُوا قَرْيَةً اَفْسَدُوهَا وَجَعَلُٓوا اَعِزَّةَ اَهْلِهَٓا اَذِلَّةًۚ وَكَذٰلِكَ يَفْعَلُونَ34
उसने कहा, "सम्राट जब किसी बस्ती में प्रवेश करते है, तो उसे ख़राब कर देते है और वहाँ के प्रभावशाली लोगों को अपमानित करके रहते है। और वे ऐसा ही करेंगे
وَاِنّ۪ي مُرْسِلَةٌ اِلَيْهِمْ بِهَدِيَّةٍ فَنَاظِرَةٌ بِمَ يَرْجِعُ الْمُرْسَلُونَ35
मैं उनके पास एक उपहार भेजती हूँ; फिर देखती हूँ कि दूत क्या उत्तर लेकर लौटते है।"