384. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
27 · अन-नमल
وَاِنَّهُ لَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِلْمُؤْمِن۪ينَ77
और निस्संदह यह तो ईमानवालों के लिए मार्गदर्शन और दयालुता है
اِنَّ رَبَّكَ يَقْض۪ي بَيْنَهُمْ بِحُكْمِه۪ۚ وَهُوَ الْعَز۪يزُ الْعَل۪يمُۚ78
निश्चय ही तुम्हारा रब उनके बीच अपने हुक्म से फ़ैसला कर देगा। वह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, सर्वज्ञ है
فَتَوَكَّلْ عَلَى اللّٰهِۜ اِنَّكَ عَلَى الْحَقِّ الْمُب۪ينِ79
अतः अल्लाह पर भरोसा रखो। निश्चय ही तुम स्पष्ट सत्य पर हो
اِنَّكَ لَا تُسْمِعُ الْمَوْتٰى وَلَا تُسْمِعُ الصُّمَّ الدُّعَٓاءَ اِذَا وَلَّوْا مُدْبِر۪ينَ80
तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते और न बहरों को अपनी पुकार सुना सकते हो, जबकि वे पीठ देकर फिरे भी जा रहें हो।
وَمَٓا اَنْتَ بِهَادِي الْعُمْيِ عَنْ ضَلَالَتِهِمْۜ اِنْ تُسْمِعُ اِلَّا مَنْ يُؤْمِنُ بِاٰيَاتِنَا فَهُمْ مُسْلِمُونَ81
और न तुम अंधों को उनकी गुमराही से हटाकर राह पर ला सकते हो। तुम तो बस उन्हीं को सुना सकते हो, जो हमारी आयतों पर ईमान लाना चाहें। अतः वही आज्ञाकारी होते है
وَاِذَا وَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِمْ اَخْرَجْنَا لَهُمْ دَٓابَّةً مِنَ الْاَرْضِ تُكَلِّمُهُمْۙ اَنَّ النَّاسَ كَانُوا بِاٰيَاتِنَا لَا يُوقِنُونَ۟82
और जब उनपर बात पूरी हो जाएगी, तो हम उनके लिए धरती का प्राणी सामने लाएँगे जो उनसे बातें करेगा कि "लोग हमारी आयतों पर विश्वास नहीं करते थे"
وَيَوْمَ نَحْشُرُ مِنْ كُلِّ اُمَّةٍ فَوْجًا مِمَّنْ يُكَذِّبُ بِاٰيَاتِنَا فَهُمْ يُوزَعُونَ83
और जिस दिन हम प्रत्येक समुदाय में से एक गिरोह, ऐसे लोगों का जो हमारी आयतों को झुठलाते है, घेर लाएँगे। फिर उनकी दर्जाबन्दी की जाएगी
حَتّٰٓى اِذَا جَٓاؤُ۫ قَالَ اَكَذَّبْتُمْ بِاٰيَات۪ي وَلَمْ تُح۪يطُوا بِهَا عِلْمًا اَمَّاذَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ84
यहाँ तक कि जब वे आ जाएँगे तो वह कहेगा, "क्या तुमने मेरी आयतों को झुठलाया, हालाँकि अपने ज्ञान से तुम उनपर हावी न थे या फिर तुम क्या करते थे?"
وَوَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِمْ بِمَا ظَلَمُوا فَهُمْ لَا يَنْطِقُونَ85
और बात उनपर पूरी होकर रहेगी, इसलिए कि उन्होंने ज़ुल्म किया। अतः वे कुछ बोल न सकेंगे
اَلَمْ يَرَوْا اَنَّا جَعَلْنَا الَّيْلَ لِيَسْكُنُوا ف۪يهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًاۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ86
क्या उन्होंने देखा नहीं कि हमने रात को (अँधेरी) बनाया, ताकि वे उसमें शान्ति और चैन प्राप्त करें। और दिन को प्रकाशमान बनाया (कि उसमें काम करें)? निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ है, जो ईमान ले आएँ
وَيَوْمَ يُنْفَخُ فِي الصُّورِ فَفَزِعَ مَنْ فِي السَّمٰوَاتِ وَمَنْ فِي الْاَرْضِ اِلَّا مَنْ شَٓاءَ اللّٰهُۜ وَكُلٌّ اَتَوْهُ دَاخِر۪ينَ87
और ख़याल करो जिस दिन सूर (नरसिंघा) में फूँक मारी जाएगी और जो आकाशों और धरती में है, घबरा उठेंगे, सिवाय उनके जिन्हें अल्लाह चाहे - और सब कान दबाए उसके समक्ष उपस्थित हो जाएँगे
وَتَرَى الْجِبَالَ تَحْسَبُهَا جَامِدَةً وَهِيَ تَمُرُّ مَرَّ السَّحَابِۜ صُنْعَ اللّٰهِ الَّذ۪ٓي اَتْقَنَ كُلَّ شَيْءٍۜ اِنَّهُ خَب۪يرٌ بِمَا تَفْعَلُونَ88
और तुम पहाड़ों को देखकर समझते हो कि वे जमे हुए है, हालाँकि वे चल रहे होंगे, जिस प्रकार बादल चलते है। यह अल्लाह की कारीगरी है, जिसने हर चीज़ को सुदृढ़ किया। निस्संदेह वह उसकी ख़बर रखता है, जो कुछ तुम करते हो