386. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

386. पृष्ठ
28 · अल-क़सस
وَنُمَكِّنَ لَهُمْ فِي الْاَرْضِ وَنُرِيَ فِرْعَوْنَ وَهَامَانَ وَجُنُودَهُمَا مِنْهُمْ مَا كَانُوا يَحْذَرُونَ6
और धरती में उन्हें सत्ताधिकार प्रदान करें और उनकी ओर से फ़िरऔन और हामान और उनकी सेनाओं को वह कुछ दिखाएँ, जिसकी उन्हें आशंका थी
وَاَوْحَيْنَٓا اِلٰٓى اُمِّ مُوسٰٓى اَنْ اَرْضِع۪يهِۚ فَاِذَا خِفْتِ عَلَيْهِ فَاَلْق۪يهِ فِي الْيَمِّ وَلَا تَخَاف۪ي وَلَا تَحْزَن۪يۚ اِنَّا رَٓادُّوهُ اِلَيْكِ وَجَاعِلُوهُ مِنَ الْمُرْسَل۪ينَ7
हमने मूसा की माँ को संकेत किया कि "उसे दूध पिला फिर जब तुझे उसके विषय में भय हो, तो उसे दरिया में डाल दे और न तुझे कोई भय हो और न तू शोकाकुल हो। हम उसे तेरे पास लौटा लाएँगे और उसे रसूल बनाएँगे।"
فَالْتَقَطَهُٓ اٰلُ فِرْعَوْنَ لِيَكُونَ لَهُمْ عَدُوًّا وَحَزَنًاۜ اِنَّ فِرْعَوْنَ وَهَامَانَ وَجُنُودَهُمَا كَانُوا خَاطِـ۪ٔينَ8
अन्ततः फ़िरऔन के लोगों ने उसे उठा लिया, ताकि परिणामस्वरूप वह उनका शत्रु और उनके लिए दुख बने। निश्चय ही फ़िरऔन और हामान और उनकी सेनाओं से बड़ी चूक हुई
وَقَالَتِ امْرَاَتُ فِرْعَوْنَ قُرَّتُ عَيْنٍ ل۪ي وَلَكَۜ لَا تَقْتُلُوهُۗ عَسٰٓى اَنْ يَنْفَعَنَٓا اَوْ نَتَّخِذَهُ وَلَدًا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ9
फ़िरऔन की स्त्री ने कहा, "यह मेरी और तुम्हारी आँखों की ठंडक है। इसकी हत्या न करो, कदाचित यह हमें लाभ पहुँचाए या हम इसे अपना बेटा ही बना लें।" और वे (परिणाम से) बेख़बर थे
وَاَصْبَحَ فُؤَادُ اُمِّ مُوسٰى فَارِغًاۜ اِنْ كَادَتْ لَتُبْد۪ي بِه۪ لَوْلَٓا اَنْ رَبَطْنَا عَلٰى قَلْبِهَا لِتَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَ10
और मूसा की माँ का हृदय विचलित हो गया। निकट था कि वह उसको प्रकट कर देती, यदि हम उसके दिल को इस ध्येय से न सँभालते कि वह मोमिनों में से हो
وَقَالَتْ لِاُخْتِه۪ قُصّ۪يهِۘ فَبَصُرَتْ بِه۪ عَنْ جُنُبٍ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَۙ11
उसने उसकी बहन से कहा, "तू उसके पीछे-पीछे जा।" अतएव वह उसे दूर ही दूर से देखती रही और वे महसूस नहीं कर रहे थे
وَحَرَّمْنَا عَلَيْهِ الْمَرَاضِعَ مِنْ قَبْلُ فَقَالَتْ هَلْ اَدُلُّكُمْ عَلٰٓى اَهْلِ بَيْتٍ يَكْفُلُونَهُ لَكُمْ وَهُمْ لَهُ نَاصِحُونَ12
हमने पहले ही से दूध पिलानेवालियों को उसपर हराम कर दिया। अतः उसने (मूसा की बहन से) कहा कि "क्या मैं तुम्हें ऐसे घरवालों का पता बताऊँ जो तुम्हारे लिए इसके पालन-पोषण का ज़िम्मा लें और इसके शुभ-चिंतक हों?"
فَرَدَدْنَاهُ اِلٰٓى اُمِّه۪ كَيْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَ وَلِتَعْلَمَ اَنَّ وَعْدَ اللّٰهِ حَقٌّ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ۟13
इस प्रकार हम उसे उसकी माँ के पास लौटा लाए, ताकि उसकी आँख ठंड़ी हो और वह शोकाकुल न हो और ताकि वह जान ले कि अल्लाह का वादा सच्चा है, किन्तु उनमें से अधिकतर लोग जानते नहीं