387. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
28 · अल-क़सस
وَلَمَّا بَلَغَ اَشُدَّهُ وَاسْتَوٰٓى اٰتَيْنَاهُ حُكْمًا وَعِلْمًاۜ وَكَذٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِن۪ينَ14
और जब वह अपनी जवानी को पहुँचा और भरपूर हो गया, तो हमने उसे निर्णय-शक्ति और ज्ञान प्रदान किया। और सुकर्मी लोगों को हम इसी प्रकार बदला देते है
وَدَخَلَ الْمَد۪ينَةَ عَلٰى ح۪ينِ غَفْلَةٍ مِنْ اَهْلِهَا فَوَجَدَ ف۪يهَا رَجُلَيْنِ يَقْتَتِلَانِۘ هٰذَا مِنْ ش۪يعَتِه۪ وَهٰذَا مِنْ عَدُوِّه۪ۚ فَاسْتَغَاثَهُ الَّذ۪ي مِنْ ش۪يعَتِه۪ عَلَى الَّذ۪ي مِنْ عَدُوِّه۪ۙ فَوَكَزَهُ مُوسٰى فَقَضٰى عَلَيْهِۘ قَالَ هٰذَا مِنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِۜ اِنَّهُ عَدُوٌّ مُضِلٌّ مُب۪ينٌ15
उसने नगर में ऐसे समय प्रवेश किया जबकि वहाँ के लोग बेख़बर थे। उसने वहाँ दो आदमियों को लड़ते पाया। यह उसके अपने गिरोह का था और यह उसके शत्रुओं में से था। जो उसके गिरोह में से था उसने उसके मुक़ाबले में, जो उसके शत्रुओं में से था, सहायता के लिए उसे पुकारा। मूसा ने उसे घूँसा मारा और उसका काम तमाम कर दिया। कहा, "यह शैतान की कार्यवाई है। निश्चय ही वह खुला पथभ्रष्ट करनेवाला शत्रु है।"
قَالَ رَبِّ اِنّ۪ي ظَلَمْتُ نَفْس۪ي فَاغْفِرْ ل۪ي فَغَفَرَ لَهُۜ اِنَّهُ هُوَ الْغَفُورُ الرَّح۪يمُ16
उसने कहा, "ऐ मेरे रब, मैंने अपने आपपर ज़ुल्म किया। अतः तू मुझे क्षमा कर दे।" अतएव उसने उसे क्षमा कर दिया। निश्चय ही वही बड़ी क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
قَالَ رَبِّ بِمَٓا اَنْعَمْتَ عَلَيَّ فَلَنْ اَكُونَ ظَه۪يرًا لِلْمُجْرِم۪ينَ17
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! जैसे तूने मुझपर अनुकम्पा दर्शाई है, अब मैं भी कभी अपराधियों का सहायक नहीं बनूँगा।"
فَاَصْبَحَ فِي الْمَد۪ينَةِ خَٓائِفًا يَتَرَقَّبُ فَاِذَا الَّذِي اسْتَنْصَرَهُ بِالْاَمْسِ يَسْتَصْرِخُهُۜ قَالَ لَهُ مُوسٰٓى اِنَّكَ لَغَوِيٌّ مُب۪ينٌ18
फिर दूसरे दिन वह नगर में डरता, टोह लेता हुआ प्रविष्ट हुआ। इतने में अचानक क्या देखता है कि वही व्यक्ति जिसने कल उससे सहायता चाही थी, उसे पुकार रहा है। मूसा ने उससे कहा, "तू तो प्रत्यक्ष बहका हुआ व्यक्ति है।"
فَلَمَّٓا اَنْ اَرَادَ اَنْ يَبْطِشَ بِالَّذ۪ي هُوَ عَدُوٌّ لَهُمَاۙ قَالَ يَا مُوسٰٓى اَتُر۪يدُ اَنْ تَقْتُلَن۪ي كَمَا قَتَلْتَ نَفْسًا بِالْاَمْسِۗ اِنْ تُر۪يدُ اِلَّٓا اَنْ تَكُونَ جَبَّارًا فِي الْاَرْضِ وَمَا تُر۪يدُ اَنْ تَكُونَ مِنَ الْمُصْلِح۪ينَ19
फिर जब उसने वादा किया कि उस व्यक्ति को पकड़े, जो उन लोगों का शत्रु था, तो वह बोल उठा, "ऐ मूसा, क्या तू चाहता है कि मुझे मार डाले, जिस प्रकार तूने कल एक व्यक्ति को मार डाला? धरती में बस तू निर्दय अत्याचारी बनकर रहना चाहता है और यह नहीं चाहता कि सुधार करनेवाला हो।"
وَجَٓاءَ رَجُلٌ مِنْ اَقْصَا الْمَد۪ينَةِ يَسْعٰىۘ قَالَ يَا مُوسٰٓى اِنَّ الْمَلَاَ يَاْتَمِرُونَ بِكَ لِيَقْتُلُوكَ فَاخْرُجْ اِنّ۪ي لَكَ مِنَ النَّاصِح۪ينَ20
इसके पश्चात एक आदमी नगर के परले सिरे से दौड़ता हुआ आया। उसने कहा, "ऐ मूसा, सरदार तेरे विषय में परामर्श कर रहे हैं कि तुझे मार डालें। अतः तू निकल जा! मैं तेरा हितैषी हूँ।"
فَخَرَجَ مِنْهَا خَٓائِفًا يَتَرَقَّبُۘ قَالَ رَبِّ نَجِّن۪ي مِنَ الْقَوْمِ الظَّالِم۪ينَ۟21
फिर वह वहाँ से डरता और ख़तरा भाँपता हुआ निकल खड़ा हुआ। उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मुझे ज़ालिम लोगों से छुटकारा दे।"