388. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
28 · अल-क़सस
وَلَمَّا تَوَجَّهَ تِلْقَٓاءَ مَدْيَنَ قَالَ عَسٰى رَبّ۪ٓي اَنْ يَهْدِيَن۪ي سَوَٓاءَ السَّب۪يلِ22
जब उसने मदयन का रुख़ किया तो कहा, "आशा है, मेरा रब मुझे ठीक रास्ते पर डाल देगा।"
وَلَمَّا وَرَدَ مَٓاءَ مَدْيَنَ وَجَدَ عَلَيْهِ اُمَّةً مِنَ النَّاسِ يَسْقُونَۘ وَوَجَدَ مِنْ دُونِهِمُ امْرَاَتَيْنِ تَذُودَانِۚ قَالَ مَا خَطْبُكُمَاۜ قَالَتَا لَا نَسْق۪ي حَتّٰى يُصْدِرَ الرِّعَٓاءُ وَاَبُونَا شَيْخٌ كَب۪يرٌ23
और जब वह मदयन के पानी पर पहुँचा तो उसने उसपर पानी पिलाते लोगों को एक गिरोह पाया। और उनसे हटकर एक ओर दो स्त्रियों को पाया, जो अपन जानवरों को रोक रही थीं। उसने कहा, "तुम्हारा क्या मामला है?" उन्होंने कहा, "हम उस समय तक पानी नहीं पिला सकते, जब तक ये चरवाहे अपने जानवर निकाल न ले जाएँ, और हमारे बाप बहुत ही बूढ़े है।"
فَسَقٰى لَهُمَا ثُمَّ تَوَلّٰٓى اِلَى الظِّلِّ فَقَالَ رَبِّ اِنّ۪ي لِمَٓا اَنْزَلْتَ اِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَق۪يرٌ24
तब उसने उन दोनों के लिए पानी पिला दिया। फिर छाया की ओर पलट गया और कहा, "ऐ मेरे रब, जो भलाई भी तू मेरी उतार दे, मैं उसका ज़रूरतमंद हूँ।"
فَجَٓاءَتْهُ اِحْدٰيهُمَا تَمْش۪ي عَلَى اسْتِحْيَٓاءٍۘ قَالَتْ اِنَّ اَب۪ي يَدْعُوكَ لِيَجْزِيَكَ اَجْرَ مَا سَقَيْتَ لَنَاۜ فَلَمَّا جَٓاءَهُ وَقَصَّ عَلَيْهِ الْقَصَصَۙ قَالَ لَا تَخَفْ۠ نَجَوْتَ مِنَ الْقَوْمِ الظَّالِم۪ينَ25
फिर उन दोनों में से एक लजाती हुई उसके पास आई। उसने कहा, "मेरे बाप आपको बुला रहे है, ताकि आपने हमारे लिए (जानवरों को) जो पानी पिलाया है, उसका बदला आपको दें।" फिर जब वह उसके पास पहुँचा और उसे अपने सारे वृत्तान्त सुनाए तो उसने कहा, "कुछ भय न करो। तुम ज़ालिम लोगों से छुटकारा पा गए हो।"
قَالَتْ اِحْدٰيهُمَا يَٓا اَبَتِ اسْتَاْجِرْهُۘ اِنَّ خَيْرَ مَنِ اسْتَاْجَرْتَ الْقَوِيُّ الْاَم۪ينُ26
उन दोनों स्त्रियों में से एक ने कहा, "ऐ मेरे बाप! इसको मज़दूरी पर रख लीजिए। अच्छा व्यक्ति, जिसे आप मज़दूरी पर रखें, वही है जो बलवान, अमानतदार हो।"
قَالَ اِنّ۪ٓي اُر۪يدُ اَنْ اُنْكِحَكَ اِحْدَى ابْنَتَيَّ هَاتَيْنِ عَلٰٓى اَنْ تَاْجُرَن۪ي ثَمَانِيَ حِجَجٍۚ فَاِنْ اَتْمَمْتَ عَشْرًا فَمِنْ عِنْدِكَۚ وَمَٓا اُر۪يدُ اَنْ اَشُقَّ عَلَيْكَۜ سَتَجِدُن۪ٓي اِنْ شَٓاءَ اللّٰهُ مِنَ الصَّالِح۪ينَ27
उसने कहा, "मैं चाहता हूँ कि अपनी इन दोनों बेटियों में से एक का विवाह तुम्हारे साथ इस शर्त पर कर दूँ कि तुम आठ वर्ष तक मेरे यहाँ नौकरी करो। और यदि तुम दस वर्ष पूरे कर दो, तो यह तुम्हारी ओर से होगा। मैं तुम्हें कठिनाई में डालना नहीं चाहता। यदि अल्लाह ने चाहा तो तुम मुझे नेक पाओगे।"
قَالَ ذٰلِكَ بَيْن۪ي وَبَيْنَكَۜ اَيَّمَا الْاَجَلَيْنِ قَضَيْتُ فَلَا عُدْوَانَ عَلَيَّۜ وَاللّٰهُ عَلٰى مَا نَقُولُ وَك۪يلٌ۟28
कहा, "यह मेरे और आपके बीच निश्चय हो चुका। इन दोनों अवधियों में से जो भी मैं पूरी कर दूँ, तो तुझपर कोई ज़्यादती नहीं होगी। और जो कुछ हम कह रहे है, उसके विषय में अल्लाह पर भरोसा काफ़ी है।"