391. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
28 · अल-क़सस
وَمَا كُنْتَ بِجَانِبِ الْغَرْبِيِّ اِذْ قَضَيْنَٓا اِلٰى مُوسَى الْاَمْرَ وَمَا كُنْتَ مِنَ الشَّاهِد۪ينَۙ44
तुम तो (नगर के) पश्चिमी किनारे पर नहीं थे, जब हमने मूसा को बात की निर्णित सूचना दी थी, और न तुम गवाहों में से थे
وَلٰكِنَّٓا اَنْشَاْنَا قُرُونًا فَتَطَاوَلَ عَلَيْهِمُ الْعُمُرُۚ وَمَا كُنْتَ ثَاوِيًا ف۪ٓي اَهْلِ مَدْيَنَ تَتْلُوا عَلَيْهِمْ اٰيَاتِنَاۙ وَلٰكِنَّا كُنَّا مُرْسِل۪ينَ45
लेकिन हमने बहुत-सी नस्लें उठाईं और उनपर बहुत समय बीत गया। और न तुम मदयनवालों में रहते थे कि उन्हें हमारी आयतें सुना रहे होते, किन्तु रसूलों को भेजनेवाले हम ही रहे है
وَمَا كُنْتَ بِجَانِبِ الطُّورِ اِذْ نَادَيْنَا وَلٰكِنْ رَحْمَةً مِنْ رَبِّكَ لِتُنْذِرَ قَوْمًا مَٓا اَتٰيهُمْ مِنْ نَذ۪يرٍ مِنْ قَبْلِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ46
और तुम तूर के अंचल में भी उपस्थित न थे जब हमने पुकारा था, किन्तु यह तुम्हारे रब की दयालुता है - ताकि तुम ऐसे लोगों को सचेत कर दो जिनके पास तुमसे पहले कोई सचेत करनेवाला नहीं आया, ताकि वे ध्यान दें
وَلَوْلَٓا اَنْ تُص۪يبَهُمْ مُص۪يبَةٌ بِمَا قَدَّمَتْ اَيْد۪يهِمْ فَيَقُولُوا رَبَّنَا لَوْلَٓا اَرْسَلْتَ اِلَيْنَا رَسُولًا فَنَتَّبِعَ اٰيَاتِكَ وَنَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَ47
(हम रसूल बनाकर न भेजते) यदि यह बात न होती कि जो कुछ उनके हाथ आगे भेज चुके है उसके कारण जब उनपर कोई मुसीबत आए तो वे कहने लगें, "ऐ हमारे रब, तूने क्यों न हमारी ओर कोई रसूल भेजा कि हम तेरी आयतों का (अनुसरण) करते और मोमिन होते?"
فَلَمَّا جَٓاءَهُمُ الْحَقُّ مِنْ عِنْدِنَا قَالُوا لَوْلَٓا اُو۫تِيَ مِثْلَ مَٓا اُو۫تِيَ مُوسٰىۜ اَوَلَمْ يَكْفُرُوا بِمَٓا اُو۫تِيَ مُوسٰى مِنْ قَبْلُۚ قَالُوا سِحْرَانِ تَظَاهَرَا۠ وَقَالُٓوا اِنَّا بِكُلٍّ كَافِرُونَ48
फिर जब उनके पास हमारे यहाँ से सत्य आ गया तो वे कहने लगे कि "जो चीज़ मूसा को मिली थी उसी तरह की चीज़ इसे क्यों न मिली?" क्या वे उसका इनकार नहीं कर चुके है, जो इससे पहले मूसा को प्रदान किया गया था? उन्होंने कहा, "दोनों जादू है जो एक-दूसरे की सहायता करते है।" और कहा, "हम तो हरेक का इनकार करते है।"
قُلْ فَاْتُوا بِكِتَابٍ مِنْ عِنْدِ اللّٰهِ هُوَ اَهْدٰى مِنْهُمَٓا اَتَّبِعْهُ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ49
कहो, "अच्छा तो लाओ अल्लाह के यहाँ से कोई ऐसी किताब, जो इन दोनों से बढ़कर मार्गदर्शन करनेवाली हो कि मैं उसका अनुसरण करूँ, यदि तुम सच्चे हो?"
فَاِنْ لَمْ يَسْتَج۪يبُوا لَكَ فَاعْلَمْ اَنَّمَا يَتَّبِعُونَ اَهْوَٓاءَهُمْۜ وَمَنْ اَضَلُّ مِمَّنِ اتَّبَعَ هَوٰيهُ بِغَيْرِ هُدًى مِنَ اللّٰهِۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِم۪ينَ50
अब यदि वे तुम्हारी माँग पूरी न करें तो जान लो कि वे केवल अपनी इच्छाओं के पीछे चलते है। और उस व्यक्ति से बढ़कर भटका हुआ कौन होगा जो अल्लाह की ओर से किसी मार्गदर्शन के बिना अपनी इच्छा पर चले? निश्चय ही अल्लाह ज़ालिम लोगों को मार्ग नहीं दिखाता