395. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
28 · अल-क़सस
قَالَ اِنَّمَٓا اُو۫ت۪يتُهُ عَلٰى عِلْمٍ عِنْد۪يۜ اَوَلَمْ يَعْلَمْ اَنَّ اللّٰهَ قَدْ اَهْلَكَ مِنْ قَبْلِه۪ مِنَ الْقُرُونِ مَنْ هُوَ اَشَدُّ مِنْهُ قُوَّةً وَاَكْثَرُ جَمْعًاۜ وَلَا يُسْـَٔلُ عَنْ ذُنُوبِهِمُ الْمُجْرِمُونَ78
उसने कहा, "मुझे तो यह मेरे अपने व्यक्तिगत ज्ञान के कारण मिला है।" क्या उसने यह नहीं जाना कि अल्लाह उससे पहले कितनी ही नस्लों को विनष्ट कर चुका है जो शक्ति में उससे बढ़-चढ़कर और बाहुल्य में उससे अधिक थीं? अपराधियों से तो (उनकी तबाही के समय) उनके गुनाहों के विषय में पूछा भी नहीं जाता
فَخَرَجَ عَلٰى قَوْمِه۪ ف۪ي ز۪ينَتِه۪ۜ قَالَ الَّذ۪ينَ يُر۪يدُونَ الْحَيٰوةَ الدُّنْيَا يَا لَيْتَ لَنَا مِثْلَ مَٓا اُو۫تِيَ قَارُونُۙ اِنَّهُ لَذُو حَظٍّ عَظ۪يمٍ79
फिर वह अपनी क़ौम के सामने अपने ठाठ-बाट में निकला। जो लोग सांसारिक जीवन के चाहनेवाले थे, उन्होंने कहा, "क्या ही अच्छा होता जैसा कुछ क़ारून को मिला है, हमें भी मिला होता! वह तो बड़ा ही भाग्यशाली है।"
وَقَالَ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْعِلْمَ وَيْلَكُمْ ثَوَابُ اللّٰهِ خَيْرٌ لِمَنْ اٰمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًاۚ وَلَا يُلَقّٰيهَٓا اِلَّا الصَّابِرُونَ80
किन्तु जिनको ज्ञान प्राप्त था, उन्होंने कहा, "अफ़सोस तुमपर! अल्लाह का प्रतिदान उत्तम है, उस व्यक्ति के लिए जो ईमान लाए और अच्छा कर्म करे, और यह बात उन्हीम के दिलों में पड़ती है जो धैर्यवान होते है।"
فَخَسَفْنَا بِه۪ وَبِدَارِهِ الْاَرْضَ فَمَا كَانَ لَهُ مِنْ فِئَةٍ يَنْصُرُونَهُ مِنْ دُونِ اللّٰهِۗ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُنْتَصِر۪ينَ81
अन्ततः हमने उसको और उसके घर को धरती में धँसा दिया। और कोई ऐसा गिरोह न हुआ जो अल्लाह के मुक़ाबले में उसकी सहायता करता, और न वह स्वयं अपना बचाव कर सका
وَاَصْبَحَ الَّذ۪ينَ تَمَنَّوْا مَكَانَهُ بِالْاَمْسِ يَقُولُونَ وَيْكَاَنَّ اللّٰهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَنْ يَشَٓاءُ مِنْ عِبَادِه۪ وَيَقْدِرُۚ لَوْلَٓا اَنْ مَنَّ اللّٰهُ عَلَيْنَا لَخَسَفَ بِنَاۜ وَيْكَاَنَّهُ لَا يُفْلِحُ الْكَافِرُونَ۟82
अब वही लोग, जो कल उसके पद की कामना कर रहे थे, कहने लगें, "अफ़सोस हम भूल गए थे कि अल्लाह अपने बन्दों में से जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा करता है और जिसे चाहता है नपी-तुली देता है। यदि अल्लाह ने हमपर उपकार न किया होता तो हमें भी धँसा देता। अफ़सोस हम भूल गए थे कि इनकार करनेवाले सफल नहीं हुआ करते।"
تِلْكَ الدَّارُ الْاٰخِرَةُ نَجْعَلُهَا لِلَّذ۪ينَ لَا يُر۪يدُونَ عُلُوًّا فِي الْاَرْضِ وَلَا فَسَادًاۜ وَالْعَاقِبَةُ لِلْمُتَّق۪ينَ83
आख़िरत का घर हम उन लोगों के लिए ख़ास कर देंगे जो न धरती में अपनी बड़ाई चाहते है और न बिगाड़। परिणाम तो अन्ततः डर रखनेवालों के पक्ष में है
مَنْ جَٓاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ خَيْرٌ مِنْهَاۚ وَمَنْ جَٓاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلَا يُجْزَى الَّذ۪ينَ عَمِلُوا السَّيِّـَٔاتِ اِلَّا مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ84
जो कोई अच्छा आचारण लेकर आया उसे उससे उत्तम प्राप्त होगा, और जो बुरा आचरण लेकर आया तो बुराइयाँ करनेवालों को तो वस वही मिलेगा जो वे करते थे