397. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
29 · अल-अंकबूत
وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّـَٔاتِهِمْ وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ اَحْسَنَ الَّذ۪ي كَانُوا يَعْمَلُونَ7
और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छा कर्म किए हम उनसे उनकी बुराइयों को दूर कर देंगे और उन्हें अवश्य ही उसका प्रतिदान प्रदान करेंगे, जो कुछ अच्छे कर्म वे करते रहे होंगे
وَوَصَّيْنَا الْاِنْسَانَ بِوَالِدَيْهِ حُسْنًاۜ وَاِنْ جَاهَدَاكَ لِتُشْرِكَ ب۪ي مَا لَيْسَ لَكَ بِه۪ عِلْمٌ فَلَا تُطِعْهُمَاۜ اِلَيَّ مَرْجِعُكُمْ فَاُنَبِّئُكُمْ بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ8
और हमने मनुष्यों को अपने माँ-बाप के साथ अच्छा व्यवहार करने की ताकीद की है। किन्तु यदि वे तुमपर ज़ोर डालें कि तू किसी ऐसी चीज़ को मेरा साक्षी ठहराए, जिसका तुझे कोई ज्ञान नहीं, तो उनकी बात न मान। मेरी ही ओर तुम सबको पलटकर आना है, फिर मैं तुम्हें बता दूँगा जो कुछ कुम करते रहे होगे
وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُدْخِلَنَّهُمْ فِي الصَّالِح۪ينَ9
और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए हम उन्हें अवश्य अच्छे लोगों में सम्मिलित करेंगे
وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يَقُولُ اٰمَنَّا بِاللّٰهِ فَاِذَٓا اُو۫ذِيَ فِي اللّٰهِ جَعَلَ فِتْنَةَ النَّاسِ كَعَذَابِ اللّٰهِۜ وَلَئِنْ جَٓاءَ نَصْرٌ مِنْ رَبِّكَ لَيَقُولُنَّ اِنَّا كُنَّا مَعَكُمْۜ اَوَلَيْسَ اللّٰهُ بِاَعْلَمَ بِمَا ف۪ي صُدُورِ الْعَالَم۪ينَ10
लोगों में ऐसे भी है जो कहते है कि "हम अल्लाह पर ईमान लाए," किन्तु जब अल्लाह के मामले में वे सताए गए तो उन्होंने लोगों की ओर से आई हुई आज़माइश को अल्लाह की यातना समझ लिया। अब यदि तेरे रब की ओर से सहायता पहुँच गई तो कहेंगे, "हम तो तुम्हारे साथ थे।" क्या जो कुछ दुनियावालों के सीनों में है उसे अल्लाह भली-भाँति नहीं जानता?
وَلَيَعْلَمَنَّ اللّٰهُ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَلَيَعْلَمَنَّ الْمُنَافِق۪ينَ11
और अल्लाह तो उन लोगों को मालूम करके रहेगा जो ईमान लाए, और वह कपटाचारियों को भी मालूम करके रहेगा
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُوا اتَّبِعُوا سَب۪يلَنَا وَلْنَحْمِلْ خَطَايَاكُمْۜ وَمَا هُمْ بِحَامِل۪ينَ مِنْ خَطَايَاهُمْ مِنْ شَيْءٍۜ اِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ12
और इनकार करनेवाले ईमान लानेवालों से कहते है, "तुम हमारे मार्ग पर चलो, हम तुम्हारी ख़ताओं का बोझ उठा लेंगे।" हालाँकि वे उनकी ख़ताओं में से कुछ भी उठानेवाले नहीं है। वे निश्चय ही झूठे है
وَلَيَحْمِلُنَّ اَثْقَالَهُمْ وَاَثْقَالًا مَعَ اَثْقَالِهِمْۘ وَلَيُسْـَٔلُنَّ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ عَمَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ۟13
हाँ, अवश्य ही वे अपने बोझ भी उठाएँगे और अपने बोझों के साथ और बहुत-से बोझ भी। और क़ियामत के दिन अवश्य उनसे उसके विषय में पूछा जाएगा जो कुछ झूठ वे घड़ते रहे होंगे
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَا نُوحًا اِلٰى قَوْمِه۪ فَلَبِثَ ف۪يهِمْ اَلْفَ سَنَةٍ اِلَّا خَمْس۪ينَ عَامًاۜ فَاَخَذَهُمُ الطُّوفَانُ وَهُمْ ظَالِمُونَ14
हमने नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा। और वह पचास साल कम एक हजार वर्ष उनके बीच रहा। अन्ततः उनको तूफ़ान ने इस दशा में आ पकड़ा कि वे अत्याचारी था