398. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
29 · अल-अंकबूत
فَاَنْجَيْنَاهُ وَاَصْحَابَ السَّف۪ينَةِ وَجَعَلْنَاهَٓا اٰيَةً لِلْعَالَم۪ينَ15
फिर उसको और नौकावालों को हमने बचा लिया और उसे सारे संसार के लिए एक निशानी बना दिया
وَاِبْرٰه۪يمَ اِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ اعْبُدُوا اللّٰهَ وَاتَّقُوهُۜ ذٰلِكُمْ خَيْرٌ لَكُمْ اِنْ كُنْتُمْ تَعْلَمُونَ16
और इबराहीम को भी भेजा, जबकि उसने अपनी क़ौम के लोगों से कहा, "अल्लाह की बन्दगी करो और उसका डर रखो। यह तुम्हारे लिए अच्छा है, यदि तुम जानो
اِنَّمَا تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ اَوْثَانًا وَتَخْلُقُونَ اِفْكًاۜ اِنَّ الَّذ۪ينَ تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ لَا يَمْلِكُونَ لَكُمْ رِزْقًا فَابْتَغُوا عِنْدَ اللّٰهِ الرِّزْقَ وَاعْبُدُوهُ وَاشْكُرُوا لَهُۜ اِلَيْهِ تُرْجَعُونَ17
तुम तो अल्लाह से हटकर बस मूर्तियों को पूज रहे हो और झूठ घड़ रहे हो। तुम अल्लाह से हटकर जिनको पूजते हो वे तुम्हारे लिए रोज़ी का भी अधिकार नहीं रखते। अतः तुम अल्लाह ही के यहाँ रोज़ी तलाश करो और उसी की बन्दगी करो और उसके आभारी बनो। तुम्हें उसी की ओर लौटकर जाना है
وَاِنْ تُكَذِّبُوا فَقَدْ كَذَّبَ اُمَمٌ مِنْ قَبْلِكُمْۜ وَمَا عَلَى الرَّسُولِ اِلَّا الْبَلَاغُ الْمُب۪ينُ18
और यदि तुम झुठलाते हो तो तुमसे पहले कितने ही समुदाय झुठला चुके है। रसूल पर तो बस केवल स्पष्ट रूप से (सत्य संदेश) पहुँचा देने की ज़िम्मेदारी है।"
اَوَلَمْ يَرَوْا كَيْفَ يُبْدِئُ اللّٰهُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُع۪يدُهُۜ اِنَّ ذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ يَس۪يرٌ19
क्या उन्होंने देखा नहीं कि अल्लाह किस प्रकार पैदाइश का आरम्भ करता है और फिर उसकी पुनरावृत्ति करता है? निस्संदेह यह अल्लाह के लिए अत्यन्त सरल है
قُلْ س۪يرُوا فِي الْاَرْضِ فَانْظُرُوا كَيْفَ بَدَاَ الْخَلْقَ ثُمَّ اللّٰهُ يُنْشِئُ النَّشْاَةَ الْاٰخِرَةَۜ اِنَّ اللّٰهَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌۚ20
कहो कि, "धरती में चलो-फिरो और देखो कि उसने किस प्रकार पैदाइश का आरम्भ किया। फिर अल्लाह पश्चात्वर्ती उठान उठाएगा। निश्चय ही अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
يُعَذِّبُ مَنْ يَشَٓاءُ وَيَرْحَمُ مَنْ يَشَٓاءُۚ وَاِلَيْهِ تُقْلَبُونَ21
वह जिसे चाहे यातना दे और जिसपर चाहे दया करे। और उसी की ओर तुम्हें पलटकर जाना है।"
وَمَٓا اَنْتُمْ بِمُعْجِز۪ينَ فِي الْاَرْضِ وَلَا فِي السَّمَٓاءِۘ وَمَا لَكُمْ مِنْ دُونِ اللّٰهِ مِنْ وَلِيٍّ وَلَا نَص۪يرٍ۟22
तुम न तो धरती में क़ाबू से बाहर निकल सकते हो और न आकाश में। और अल्लाह से हटकर न तो तुम्हारा कोई मित्र है और न सहायक
وَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِاٰيَاتِ اللّٰهِ وَلِقَٓائِه۪ٓ اُو۬لٰٓئِكَ يَئِسُوا مِنْ رَحْمَت۪ي وَاُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ23
और जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों और उससे मिलने का इनकार किया, वही लोग है जो मेरी दयालुता से निराश हुए और वही है जिनके लिए दुखद यातना है। -