399. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

399. पृष्ठ
29 · अल-अंकबूत
فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِه۪ٓ اِلَّٓا اَنْ قَالُوا اقْتُلُوهُ اَوْ حَرِّقُوهُ فَاَنْجٰيهُ اللّٰهُ مِنَ النَّارِۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ24
फिर उनकी क़ौम के लोगों का उत्तर इसके सिवा और कुछ न था कि उन्होंने कहा, "मार डालो उसे या जला दो उसे!" अंततः अल्लाह ने उसको आग से बचा लिया। निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ है, जो ईमान लाएँ
وَقَالَ اِنَّمَا اتَّخَذْتُمْ مِنْ دُونِ اللّٰهِ اَوْثَانًاۙ مَوَدَّةَ بَيْنِكُمْ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۚ ثُمَّ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ يَكْفُرُ بَعْضُكُمْ بِبَعْضٍ وَيَلْعَنُ بَعْضُكُمْ بَعْضًاۘ وَمَاْوٰيكُمُ النَّارُ وَمَا لَكُمْ مِنْ نَاصِر۪ينَۗ25
और उसने कहा, "अल्लाह से हटकर तुमने कुछ मूर्तियों को केवल सांसारिक जीवन में अपने पारस्परिक प्रेम के कारण पकड़ रखा है। फिर क़ियामत के दिन तुममें से एक-दूसरे का इनकार करेगा और तुममें से एक-दूसरे पर लानत करेगा। तुम्हारा ठौर-ठिकाना आग है और तुम्हारा कोई सहायक न होगा।"
فَاٰمَنَ لَهُ لُوطٌۢ وَقَالَ اِنّ۪ي مُهَاجِرٌ اِلٰى رَبّ۪يۜ اِنَّهُ هُوَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ26
फिर लूत ने उसकी बात मानी औऱ उसने कहा, "निस्संदेह मैं अपने रब की ओर हिजरत करता हूँ। निस्संदेह वह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।"
وَوَهَبْنَا لَهُٓ اِسْحٰقَ وَيَعْقُوبَ وَجَعَلْنَا ف۪ي ذُرِّيَّتِهِ النُّبُوَّةَ وَالْكِتَابَ وَاٰتَيْنَاهُ اَجْرَهُ فِي الدُّنْيَاۚ وَاِنَّهُ فِي الْاٰخِرَةِ لَمِنَ الصَّالِح۪ينَ27
और हमने उसे इसहाक़ और याक़ूब प्रदान किए और उसकी संतति में नुबूवत (पैग़म्बरी) और किताब का सिलसिला जारी किया और हमने उसे संसार में भी उसका अच्छा प्रतिदान प्रदान किया। और निश्चय ही वह आख़िरत में अच्छे लोगों में से होगा
وَلُوطًا اِذْ قَالَ لِقَوْمِه۪ٓ اِنَّكُمْ لَتَاْتُونَ الْفَاحِشَةَۘ مَا سَبَقَكُمْ بِهَا مِنْ اَحَدٍ مِنَ الْعَالَم۪ينَ28
और हमने लूत को भेजा, जबकि उसने अपनी क़ौम के लोगों से कहा, "तुम जो वह अश्लील कर्म करते हो, जिसे तुमसे पहले सारे संसार में किसी ने नहीं किया
اَئِنَّكُمْ لَتَاْتُونَ الرِّجَالَ وَتَقْطَعُونَ السَّب۪يلَ وَتَاْتُونَ ف۪ي نَاد۪يكُمُ الْمُنْكَرَۜ فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِه۪ٓ اِلَّٓا اَنْ قَالُوا ائْتِنَا بِعَذَابِ اللّٰهِ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِق۪ينَ29
क्या तुम पुरुषों के पास जाते हो और बटमारी करते हो औऱ अपनी मजलिस में बुरा कर्म करते हो?" फिर उसकी क़ौम के लोगों का उत्तर बस यही था कि उन्होंने कहा, "ले आ हमपर अल्लाह की यातना, यदि तू सच्चा है।"
قَالَ رَبِّ انْصُرْن۪ي عَلَى الْقَوْمِ الْمُفْسِد۪ينَ۟30
उसने कहास "ऐ मेरे रब! बिगाड़ पैदा करनेवाले लोगों के मुक़ावले में मेरी सहायता कर।"