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2 · अल-बक़रा
مَثَلُهُمْ كَمَثَلِ الَّذِي اسْتَوْقَدَ نَارًاۚ فَلَمَّٓا اَضَٓاءَتْ مَا حَوْلَهُ ذَهَبَ اللّٰهُ بِنُورِهِمْ وَتَرَكَهُمْ ف۪ي ظُلُمَاتٍ لَا يُبْصِرُونَ17
उनकी मिसाल ऐसी हैं जैसे किसी व्यक्ति ने आग जलाई, फिर जब उसने उसके वातावरण को प्रकाशित कर दिया, तो अल्लाह ने उसका प्रकाश ही छीन लिया और उन्हें अँधेरों में छोड़ दिया जिससे उन्हें कुछ सुझाई नहीं दे रहा हैं
صُمٌّ بُكْمٌ عُمْيٌ فَهُمْ لَا يَرْجِعُونَۙ18
वे बहरे हैं, गूँगें हैं, अन्धे हैं, अब वे लौटने के नहीं
اَوْ كَصَيِّبٍ مِنَ السَّمَٓاءِ ف۪يهِ ظُلُمَاتٌ وَرَعْدٌ وَبَرْقٌۚ يَجْعَلُونَ اَصَابِعَهُمْ ف۪ٓي اٰذَانِهِمْ مِنَ الصَّوَاعِقِ حَذَرَ الْمَوْتِۜ وَاللّٰهُ مُح۪يطٌ بِالْكَافِر۪ينَ19
या (उनकी मिसाल ऐसी है) जैसे आकाश से वर्षा हो रही हो जिसके साथ अँधेरे हों और गरज और चमक भी हो, वे बिजली की कड़क के कारण मृत्यु के भय से अपने कानों में उँगलियाँ दे ले रहे हों - और अल्लाह ने तो इनकार करनेवालों को घेर रखा हैं
يَكَادُ الْبَرْقُ يَخْطَفُ اَبْصَارَهُمْۜ كُلَّمَٓا اَضَٓاءَ لَهُمْ مَشَوْا ف۪يهِۙ وَاِذَٓا اَظْلَمَ عَلَيْهِمْ قَامُواۜ وَلَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ لَذَهَبَ بِسَمْعِهِمْ وَاَبْصَارِهِمْۜ اِنَّ اللّٰهَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ۟20
मानो शीघ्र ही बिजली उनकी आँखों की रौशनी उचक लेने को है; जब भी उनपर चमकती हो, वे चल पड़ते हो और जब उनपर अँधेरा छा जाता हैं तो खड़े हो जाते हो; अगर अल्लाह चाहता तो उनकी सुनने और देखने की शक्ति बिलकुल ही छीन लेता। निस्सन्देह अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ اعْبُدُوا رَبَّكُمُ الَّذ۪ي خَلَقَكُمْ وَالَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَۙ21
ऐ लोगो! बन्दगी करो अपने रब की जिसने तुम्हें और तुमसे पहले के लोगों को पैदा किया, ताकि तुम बच सको;
اَلَّذ۪ي جَعَلَ لَكُمُ الْاَرْضَ فِرَاشًا وَالسَّمَٓاءَ بِنَٓاءًۖ وَاَنْزَلَ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً فَاَخْرَجَ بِه۪ مِنَ الثَّمَرَاتِ رِزْقًا لَكُمْۚ فَلَا تَجْعَلُوا لِلّٰهِ اَنْدَادًا وَاَنْتُمْ تَعْلَمُونَ22
वही है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को फर्श और आकाश को छत बनाया, और आकाश से पानी उतारा, फिर उसके द्वारा हर प्रकार की पैदावार की और फल तुम्हारी रोजी के लिए पैदा किए, अतः जब तुम जानते हो तो अल्लाह के समकक्ष न ठहराओ
وَاِنْ كُنْتُمْ ف۪ي رَيْبٍ مِمَّا نَزَّلْنَا عَلٰى عَبْدِنَا فَاْتُوا بِسُورَةٍ مِنْ مِثْلِه۪ۖ وَادْعُوا شُهَدَٓاءَكُمْ مِنْ دُونِ اللّٰهِ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ23
और अगर उसके विषय में जो हमने अपने बन्दे पर उतारा हैं, तुम किसी सन्देह में न हो तो उस जैसी कोई सूरा ले आओ और अल्लाह से हटकर अपने सहायकों को बुला लो जिनके आ मौजूद होने पर तुम्हें विश्वास हैं, यदि तुम सच्चे हो
فَاِنْ لَمْ تَفْعَلُوا وَلَنْ تَفْعَلُوا فَاتَّقُوا النَّارَ الَّت۪ي وَقُودُهَا النَّاسُ وَالْحِجَارَةُۚ اُعِدَّتْ لِلْكَافِر۪ينَ24
फिर अगर तुम ऐसा न कर सको और तुम कदापि नहीं कर सकते, तो डरो उस आग से जिसका ईधन इनसान और पत्थर हैं, जो इनकार करनेवालों के लिए तैयार की गई है