401. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

401. पृष्ठ
29 · अल-अंकबूत
وَقَارُونَ وَفِرْعَوْنَ وَهَامَانَ وَلَقَدْ جَٓاءَهُمْ مُوسٰى بِالْبَيِّنَاتِ فَاسْتَكْبَرُوا فِي الْاَرْضِ وَمَا كَانُوا سَابِق۪ينَۚ39
और क़ारून और फ़िरऔन और हामान को हमने विनष्ट किया। मूसा उनके पास खुली निशानियाँ लेकर आया। किन्तु उन्होंने धरती में घमंड किया, हालाँकि वे हमसे निकल जानेवाले न थे
فَكُلًّا اَخَذْنَا بِذَنْبِه۪ۚ فَمِنْهُمْ مَنْ اَرْسَلْنَا عَلَيْهِ حَاصِبًاۚ وَمِنْهُمْ مَنْ اَخَذَتْهُ الصَّيْحَةُۚ وَمِنْهُمْ مَنْ خَسَفْنَا بِهِ الْاَرْضَۚ وَمِنْهُمْ مَنْ اَغْرَقْنَاۚ وَمَا كَانَ اللّٰهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلٰكِنْ كَانُٓوا اَنْفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ40
अन्ततः हमने हरेक को उसके अपने गुनाह के कारण पकड़ लिया। फिर उनमें से कुछ पर तो हमने पथराव करनेवाली वायु भेजी और उनमें से कुछ को एक प्रचंड चीत्कार न आ लिया। और उनमें से कुछ को हमने धरती में धँसा दिया। और उनमें से कुछ को हमने डूबो दिया। अल्लाह तो ऐसा न था कि उनपर ज़ुल्म करता, किन्तु वे स्वयं अपने आपपर ज़ुल्म कर रहे थे
مَثَلُ الَّذ۪ينَ اتَّخَذُوا مِنْ دُونِ اللّٰهِ اَوْلِيَٓاءَ كَمَثَلِ الْعَنْكَبُوتِۚ اِتَّخَذَتْ بَيْتًاۜ وَاِنَّ اَوْهَنَ الْبُيُوتِ لَبَيْتُ الْعَنْكَبُوتِۢ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ41
जिन लोगों ने अल्लाह से हटकर अपने दूसरे संरक्षक बना लिए है उनकी मिसाल मकड़ी जैसी है, जिसने अपना एक घर बनाया, और यह सच है कि सब घरों से कमज़ोर घर मकड़ी का घर ही होता है। क्या ही अच्छा होता कि वे जानते!
اِنَّ اللّٰهَ يَعْلَمُ مَا يَدْعُونَ مِنْ دُونِه۪ مِنْ شَيْءٍۜ وَهُوَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ42
निस्संदेह अल्लाह उन चीज़ों को भली-भाँति जानता है, जिन्हें ये उससे हटकर पुकारते है। वह तो अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
وَتِلْكَ الْاَمْثَالُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِۚ وَمَا يَعْقِلُهَٓا اِلَّا الْعَالِمُونَ43
ये मिसालें हम लोगों के लिए पेश करते है, परन्तु इनको ज्ञानवान ही समझते है
خَلَقَ اللّٰهُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ بِالْحَقِّۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِلْمُؤْمِن۪ينَ۟44
अल्लाह ने आकाशों और धरती को सत्य के साथ पैदा किया। निश्चय ही इसमें ईमानवालों के लिए एक बड़ी निशानी है
اُتْلُ مَٓا اُو۫حِيَ اِلَيْكَ مِنَ الْكِتَابِ وَاَقِمِ الصَّلٰوةَۜ اِنَّ الصَّلٰوةَ تَنْهٰى عَنِ الْفَحْشَٓاءِ وَالْمُنْكَرِۜ وَلَذِكْرُ اللّٰهِ اَكْبَرُۜ وَاللّٰهُ يَعْلَمُ مَا تَصْنَعُونَ45
उस किताब को पढ़ो जो तुम्हारी ओर प्रकाशना के द्वारा भेजी गई है, और नमाज़ का आयोजन करो। निस्संदेह नमाज़ अश्लीलता और बुराई से रोकती है। और अल्लाह का याद करना तो बहुत बड़ी चीज़ है। अल्लाह जानता है जो कुछ तुम रचते और बनाते हो