408. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

408. पृष्ठ
30 · अर-रूम
وَاِذَا مَسَّ النَّاسَ ضُرٌّ دَعَوْا رَبَّهُمْ مُن۪يب۪ينَ اِلَيْهِ ثُمَّ اِذَٓا اَذَاقَهُمْ مِنْهُ رَحْمَةً اِذَا فَر۪يقٌ مِنْهُمْ بِرَبِّهِمْ يُشْرِكُونَۙ33
और जब लोगों को कोई तकलीफ़ पहुँचती है तो वे अपने रब को, उसकी ओर रुजू (प्रवृत) होकर पुकारते है। फिर जब वह उन्हें अपनी दयालुता का रसास्वादन करा देता है, तो क्या देखते है कि उनमें से कुछ लोग अपने रब का साझी ठहराने लगे;
لِيَكْفُرُوا بِمَٓا اٰتَيْنَاهُمْۜ فَتَمَتَّعُوا۠ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ34
ताकि इस प्रकार वे उसके प्रति अकृतज्ञता दिखलाएँ जो कुछ हमने उन्हें दिया है। "अच्छा तो मज़े उड़ा लो, शीघ्र ही तुम जान लोगे।"
اَمْ اَنْزَلْنَا عَلَيْهِمْ سُلْطَانًا فَهُوَ يَتَكَلَّمُ بِمَا كَانُوا بِه۪ يُشْرِكُونَ35
(क्या उनके देवताओं ने उनकी सहायता की थी) या हमने उनपर ऐसा कोई प्रमाण उतारा है कि वह उसके हक़ में बोलता हो, जो वे उसके साथ साझी ठहराते है
وَاِذَٓا اَذَقْنَا النَّاسَ رَحْمَةً فَرِحُوا بِهَاۜ وَاِنْ تُصِبْهُمْ سَيِّئَةٌ بِمَا قَدَّمَتْ اَيْد۪يهِمْ اِذَا هُمْ يَقْنَطُونَ36
और जब हम लोगों को दयालुता का रसास्वादन कराते है तो वे उसपर इतराने लगते है; परन्तु जो कुछ उनके हाथों ने आगे भेजा है यदि उसके कारण उनपर कोई विपत्ति आ जाए, तो क्या देखते है कि वे निराश हो रहे है
اَوَلَمْ يَرَوْا اَنَّ اللّٰهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَنْ يَشَٓاءُ وَيَقْدِرُۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ37
क्या उन्होंने विचार नहीं किया कि अल्लाह जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और जिसके लिए चाहता है नपी-तुली कर देता है? निस्संदेह इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ है, जो ईमान लाएँ
فَاٰتِ ذَا الْقُرْبٰى حَقَّهُ وَالْمِسْك۪ينَ وَابْنَ السَّب۪يلِۜ ذٰلِكَ خَيْرٌ لِلَّذ۪ينَ يُر۪يدُونَ وَجْهَ اللّٰهِۘ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ38
अतः नातेदार को उसका हक़ दो और मुहताज और मुसाफ़िर को भी। यह अच्छा है उनके लिए जो अल्लाह की प्रसन्नता के इच्छुक हों और वही सफल है
وَمَٓا اٰتَيْتُمْ مِنْ رِبًا لِيَرْبُوَ۬ا ف۪ٓي اَمْوَالِ النَّاسِ فَلَا يَرْبُوا عِنْدَ اللّٰهِۚ وَمَٓا اٰتَيْتُمْ مِنْ زَكٰوةٍ تُر۪يدُونَ وَجْهَ اللّٰهِ فَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُضْعِفُونَ39
तुम जो कुछ ब्याज पर देते हो, ताकि वह लोगों के मालों में सम्मिलित होकर बढ़ जाए, तो वह अल्लाह के यहाँ नहीं बढ़ता। किन्तु जो ज़कात तुमने अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए दी, तो ऐसे ही लोग (अल्लाह के यहाँ) अपना माल बढ़ाते है
اَللّٰهُ الَّذ۪ي خَلَقَكُمْ ثُمَّ رَزَقَكُمْ ثُمَّ يُم۪يتُكُمْ ثُمَّ يُحْي۪يكُمْۜ هَلْ مِنْ شُرَكَٓائِكُمْ مَنْ يَفْعَلُ مِنْ ذٰلِكُمْ مِنْ شَيْءٍۜ سُبْحَانَهُ وَتَعَالٰى عَمَّا يُشْرِكُونَ۟40
अल्लाह ही है जिसने तुम्हें पैदा किया, फिर तुम्हें रोज़ी दी; फिर वह तुम्हें मृत्यु देता है; फिर तुम्हें जीवित करेगा। क्या तुम्हारे ठहराए हुए साझीदारों में भी कोई है, जो इन कामों में से कुछ कर सके? महान और उच्च है वह उसमें जो साझी वे ठहराते है
ظَهَرَ الْفَسَادُ فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ بِمَا كَسَبَتْ اَيْدِي النَّاسِ لِيُذ۪يقَهُمْ بَعْضَ الَّذ۪ي عَمِلُوا لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ41
थल और जल में बिगाड़ फैल गया स्वयं लोगों ही के हाथों की कमाई के कारण, ताकि वह उन्हें उनकी कुछ करतूतों का मज़ा चखाए, कदाचित वे बाज़ आ जाएँ