409. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
30 · अर-रूम
قُلْ س۪يرُوا فِي الْاَرْضِ فَانْظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلُۜ كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُشْرِك۪ينَ42
कहो, "धरती में चल-फिरकर देखो कि उन लोगों का कैसा परिणाम हुआ जो पहले गुज़रे है। उनमें अधिकतर बहुदेववादी ही थे।"
فَاَقِمْ وَجْهَكَ لِلدّ۪ينِ الْقَيِّمِ مِنْ قَبْلِ اَنْ يَاْتِيَ يَوْمٌ لَا مَرَدَّ لَهُ مِنَ اللّٰهِ يَوْمَئِذٍ يَصَّدَّعُونَ43
अतः तुम अपना रुख़ सीधे व ठीक धर्म की ओर जमा दो, इससे पहले कि अल्लाह की ओर से वह दिन आ जाए जिसके लिए वापसी नहीं। उस दिन लोग अलग-अलग हो जाएँगे
مَنْ كَفَرَ فَعَلَيْهِ كُفْرُهُۚ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا فَلِاَنْفُسِهِمْ يَمْهَدُونَۙ44
जिस किसी ने इनकार किया तो उसका इनकार उसी के लिए घातक सिद्ध होगा, और जिन लोगों ने अच्छा कर्म किया वे अपने ही लिए आराम का साधन जुटा रहे है
لِيَجْزِيَ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ مِنْ فَضْلِه۪ۜ اِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْكَافِر۪ينَ45
ताकि वह अपने उदार अनुग्रह से उन लोगों को बदला दे जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए। निश्चय ही वह इनकार करनेवालों को पसन्द नहीं करता। -
وَمِنْ اٰيَاتِه۪ٓ اَنْ يُرْسِلَ الرِّيَاحَ مُبَشِّرَاتٍ وَلِيُذ۪يقَكُمْ مِنْ رَحْمَتِه۪ وَلِتَجْرِيَ الْفُلْكُ بِاَمْرِه۪ وَلِتَبْتَغُوا مِنْ فَضْلِه۪ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ46
और उसकी निशानियों में से यह भी है कि शुभ सूचना देनेवाली हवाएँ भेजता है (ताकि उनके द्वारा तुम्हें वर्षा की शुभ सूचना मिले) और ताकि वह तुम्हें अपनी दयालुता का रसास्वादन कराए और ताकि उसके आदेश से नौकाएँ चलें और ताकि तुम उसका अनुग्रह (रोज़ी) तलाश करो और कदाचित तुम कृतज्ञता दिखलाओ
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ رُسُلًا اِلٰى قَوْمِهِمْ فَجَٓاؤُ۫هُمْ بِالْبَيِّنَاتِ فَانْتَقَمْنَا مِنَ الَّذ۪ينَ اَجْرَمُواۜ وَكَانَ حَقًّا عَلَيْنَا نَصْرُ الْمُؤْمِن۪ينَ47
हम तुमसे पहले कितने ही रसूलों को उनकी क़ौम की ओर भेज चुके है और वे उनके पास खुली निशानियाँ लेकर आए। फिर हम उन लोगों से बदला लेकर रहे जिन्होंने अपराध किया, और ईमानवालों की सहायता करना तो हमपर एक हक़ है
اَللّٰهُ الَّذ۪ي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ فَتُث۪يرُ سَحَابًا فَيَبْسُطُهُ فِي السَّمَٓاءِ كَيْفَ يَشَٓاءُ وَيَجْعَلُهُ كِسَفًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِه۪ۚ فَاِذَٓا اَصَابَ بِه۪ مَنْ يَشَٓاءُ مِنْ عِبَادِه۪ٓ اِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ48
अल्लाह ही है जो हवाओं को भेजता है। फिर वे बादलों को उठाती हैं; फिर जिस तरह चाहता है उन्हें आकाश में फैला देता है और उन्हें परतों और टुकड़ियों का रूप दे देता है। फिर तुम देखते हो कि उनके बीच से वर्षा की बूँदें टपकी चली आती है। फिर जब वह अपने बन्दों में से जिनपर चाहता है, उसे बरसाता है। तो क्या देखते है कि वे हर्षित हो उठे
وَاِنْ كَانُوا مِنْ قَبْلِ اَنْ يُنَزَّلَ عَلَيْهِمْ مِنْ قَبْلِه۪ لَمُبْلِس۪ينَ49
जबकि इससे पूर्व, इससे पहले कि वह उनपर उतरे, वे बिलकुल निराश थे
فَانْظُرْ اِلٰٓى اٰثَارِ رَحْمَتِ اللّٰهِ كَيْفَ يُحْيِ الْاَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَاۜ اِنَّ ذٰلِكَ لَمُحْيِ الْمَوْتٰىۚ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ50
अतः देखों अल्लाह की दयालुता के चिन्ह! वह किस प्रकार धरती को उसके मृत हो जाने के पश्चात जीवन प्रदान करता है। निश्चय ही वह मुर्दों को जीवत करनेवाला है, और उसे हर चीज़ का सामर्थ्य प्राप्ती है