41. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
2 · अल-बक़रा
فَلَمَّا فَصَلَ طَالُوتُ بِالْجُنُودِۙ قَالَ اِنَّ اللّٰهَ مُبْتَل۪يكُمْ بِنَهَرٍۚ فَمَنْ شَرِبَ مِنْهُ فَلَيْسَ مِنّ۪يۚ وَمَنْ لَمْ يَطْعَمْهُ فَاِنَّهُ مِنّ۪ٓي اِلَّا مَنِ اغْتَرَفَ غُرْفَةً بِيَدِه۪ۚ فَشَرِبُوا مِنْهُ اِلَّا قَل۪يلًا مِنْهُمْۜ فَلَمَّا جَاوَزَهُ هُوَ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا مَعَهُۙ قَالُوا لَا طَاقَةَ لَنَا الْيَوْمَ بِجَالُوتَ وَجُنُودِه۪ۜ قَالَ الَّذ۪ينَ يَظُنُّونَ اَنَّهُمْ مُلَاقُوا اللّٰهِۙ كَمْ مِنْ فِئَةٍ قَل۪يلَةٍ غَلَبَتْ فِئَةً كَث۪يرَةً بِاِذْنِ اللّٰهِۜ وَاللّٰهُ مَعَ الصَّابِر۪ينَ249
फिर तब तालूत सेनाएँ लेकर चला तो उनने कहा, "अल्लाह निश्चित रूप से एक नदी द्वारा तुम्हारी परीक्षा लेनेवाला है। तो जिसने उसका पानी पी लिया, वह मुझमें से नहीं है और जिसने उसको नहीं चखा, वही मुझमें से है। यह और बात है कि कोई अपने हाथ से एक चुल्लू भर ले ले।" फिर उनमें से थोड़े लोगों के सिवा सभी ने उसका पानी पी लिया, फिर जब तालूत और ईमानवाले जो उसके साथ थे नदी पार कर गए तो कहने लगे, "आज हममें जालूत और उसकी सेनाओं का मुक़ाबला करने की शक्ति नहीं हैं।" इस पर लोगों ने, जो समझते थे कि उन्हें अल्लाह से मिलना है, कहा, "कितनी ही बार एक छोटी-सी टुकड़ी ने अल्लाह की अनुज्ञा से एक बड़े गिरोह पर विजय पाई है। अल्लाह तो जमनेवालो के साथ है।"
وَلَمَّا بَرَزُوا لِجَالُوتَ وَجُنُودِه۪ قَالُوا رَبَّنَٓا اَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ اَقْدَامَنَا وَانْصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِر۪ينَۜ250
और जब वे जालूत और उसकी सेनाओं के मुक़ाबले पर आए तो कहा, "ऐ हमारे रब! हमपर धैर्य उडेल दे और हमारे क़दम जमा दे और इनकार करनेवाले लोगों पर हमें विजय प्रदान कर।"
فَهَزَمُوهُمْ بِاِذْنِ اللّٰهِۙ وَقَتَلَ دَاوُ۫دُ جَالُوتَ وَاٰتٰيهُ اللّٰهُ الْمُلْكَ وَالْحِكْمَةَ وَعَلَّمَهُ مِمَّا يَشَٓاءُۜ وَلَوْلَا دَفْعُ اللّٰهِ النَّاسَ بَعْضَهُمْ بِبَعْضٍ لَفَسَدَتِ الْاَرْضُ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ ذُو فَضْلٍ عَلَى الْعَالَم۪ينَ251
अन्ततः अल्लाह की अनुज्ञा से उन्होंने उनको पराजित कर दिया और दाऊद ने जालूत को क़त्ल कर दिया, और अल्लाह ने उसे राज्य और तत्वदर्शिता (हिकमत) प्रदान की, जो कुछ वह (दाऊद) चाहे, उससे उसको अवगत कराया। और यदि अल्लाह मनुष्यों के एक गिरोह को दूसरे गिरोह के द्वारा हटाता न रहता तो धरती की व्यवस्था बिगड़ जाती, किन्तु अल्लाह संसारवालों के लिए उदार अनुग्राही है
تِلْكَ اٰيَاتُ اللّٰهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّۜ وَاِنَّكَ لَمِنَ الْمُرْسَل۪ينَ252
ये अल्लाह की सच्ची आयतें है जो हम तुम्हें (सोद्देश्य) सुना रहे है और निश्चय ही तुम उन लोगों में से हो, जो रसूस बनाकर भेजे गए है