410. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
30 · अर-रूम
وَلَئِنْ اَرْسَلْنَا ر۪يحًا فَرَاَوْهُ مُصْفَرًّا لَظَلُّوا مِنْ بَعْدِه۪ يَكْفُرُونَ51
किन्तु यदि हम एक दूसरी हवा भेज दें, जिसके प्रभाव से वे उस (खेती) को पीली पड़ी हुई देखें तो इसके पश्चात वे कुफ़्र करने लग जाएँ
فَاِنَّكَ لَا تُسْمِعُ الْمَوْتٰى وَلَا تُسْمِعُ الصُّمَّ الدُّعَٓاءَ اِذَا وَلَّوْا مُدْبِر۪ينَ52
अतः तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते और न बहरों को अपनी पुकार सुना सकते हो, जबकि वे पीठ फेरे चले जो रहे हों
وَمَٓا اَنْتَ بِهَادِ الْعُمْيِ عَنْ ضَلَالَتِهِمْۜ اِنْ تُسْمِعُ اِلَّا مَنْ يُؤْمِنُ بِاٰيَاتِنَا فَهُمْ مُسْلِمُونَ۟53
और न तुम अंधों को उनकी गुमराही से फेरकर मार्ग पर ला सकते हो। तुम तो केवल उन्हीं को सुना सकते हो जो हमारी आयतों पर ईमान लाएँ। तो वही आज्ञाकारी हैं
اَللّٰهُ الَّذ۪ي خَلَقَكُمْ مِنْ ضَعْفٍ ثُمَّ جَعَلَ مِنْ بَعْدِ ضَعْفٍ قُوَّةً ثُمَّ جَعَلَ مِنْ بَعْدِ قُوَّةٍ ضَعْفًا وَشَيْبَةًۜ يَخْلُقُ مَا يَشَٓاءُۚ وَهُوَ الْعَل۪يمُ الْقَد۪يرُ54
अल्लाह ही है जिसनें तुम्हें निर्बल पैदा किया, फिर निर्बलता के पश्चात शक्ति प्रदान की; फिर शक्ति के पश्चात निर्बलता औऱ बुढापा दिया। वह जो कुछ चाहता है पैदा करता है। वह जाननेवाला, सामर्थ्यवान है
وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يُقْسِمُ الْمُجْرِمُونَۙ مَا لَبِثُوا غَيْرَ سَاعَةٍۜ كَذٰلِكَ كَانُوا يُؤْفَكُونَ55
जिस दिन वह घड़ी आ खड़ी होगी अपराधी क़सम खाएँगे कि वे घड़ी भर से अधिक नहीं ठहरें। इसी प्रकार वे उलटे फिरे चले जाते थे
وَقَالَ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْعِلْمَ وَالْا۪يمَانَ لَقَدْ لَبِثْتُمْ ف۪ي كِتَابِ اللّٰهِ اِلٰى يَوْمِ الْبَعْثِۘ فَهٰذَا يَوْمُ الْبَعْثِ وَلٰكِنَّكُمْ كُنْتُمْ لَا تَعْلَمُونَ56
किन्तु जिन लोगों को ज्ञान और ईमान प्रदान हुआ, वे कहते, "अल्लाह के लेख में तो तुम जीवित होकर उठने के दिन ठहरे रहे हो। तो यही जीवित हो उठाने का दिन है। किन्तु तुम जानते न थे।"
فَيَوْمَئِذٍ لَا يَنْفَعُ الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا مَعْذِرَتُهُمْ وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ57
अतः उस दिन ज़ुल्म करनेवालों को उनका कोई उज़्र (सफाई पेश करना) काम न आएगा और न उनसे यह चाहा जाएगा कि वे किसी यत्न से (अल्लाह के) प्रकोप को टाल सकें
وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ ف۪ي هٰذَا الْقُرْاٰنِ مِنْ كُلِّ مَثَلٍۜ وَلَئِنْ جِئْتَهُمْ بِاٰيَةٍ لَيَقُولَنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اِنْ اَنْتُمْ اِلَّا مُبْطِلُونَ58
हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए प्रत्येक मिसाल पेश कर दी है। यदि तुम कोई भी निशानी उनके पास ले आओ, जिन लोगों ने इनकार किया है, वे तो यही कहेंगे, "तुम तो बस झूठ घड़ते हो।"
كَذٰلِكَ يَطْبَعُ اللّٰهُ عَلٰى قُلُوبِ الَّذ۪ينَ لَا يَعْلَمُونَ59
इस प्रकार अल्लाह उन लोगों के दिलों पर ठप्पा लगा देता है जो अज्ञानी है
فَاصْبِرْ اِنَّ وَعْدَ اللّٰهِ حَقٌّ وَلَا يَسْتَخِفَّنَّكَ الَّذ۪ينَ لَا يُوقِنُونَ60
अतः धैर्य से काम लो निश्चय ही अल्लाह का वादा सच्चा है और जिन्हें विश्वास नहीं, वे तुम्हें कदापि हल्का न पाएँ