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411. पृष्ठ
31 · लुक़मान
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
الٓمٓ۠1
अलिफ़॰ लाम॰ मीम॰
تِلْكَ اٰيَاتُ الْكِتَابِ الْحَك۪يمِۙ2
(जो आयतें उतर रही हैं) वे तत्वज्ञान से परिपूर्ण किताब की आयते हैं
هُدًى وَرَحْمَةً لِلْمُحْسِن۪ينَۙ3
मार्गदर्शन और दयालुता उत्तमकारों के लिए
اَلَّذ۪ينَ يُق۪يمُونَ الصَّلٰوةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكٰوةَ وَهُمْ بِالْاٰخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَۜ4
जो नमाज़ का आयोजन करते है और ज़कात देते है और आख़िरत पर विश्वास रखते है
اُو۬لٰٓئِكَ عَلٰى هُدًى مِنْ رَبِّهِمْ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ5
वही अपने रब की और से मार्ग पर हैं और वही सफल है
وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يَشْتَر۪ي لَهْوَ الْحَد۪يثِ لِيُضِلَّ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ بِغَيْرِ عِلْمٍۙ وَيَتَّخِذَهَا هُزُوًاۜ اُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُه۪ينٌ6
लोगों में से कोई ऐसा भी है जो दिल को लुभानेवाली बातों का ख़रीदार बनता है, ताकि बिना किसी ज्ञान के अल्लाह के मार्ग से (दूसरों को) भटकाए और उनका परिहास करे। वही है जिनके लिए अपमानजनक यातना है
وَاِذَا تُتْلٰى عَلَيْهِ اٰيَاتُنَا وَلّٰى مُسْتَكْبِرًا كَاَنْ لَمْ يَسْمَعْهَا كَاَنَّ ف۪ٓي اُذُنَيْهِ وَقْرًاۚ فَبَشِّرْهُ بِعَذَابٍ اَل۪يمٍ7
जब उसे हमारी आयतें सुनाई जाती हैं तो वह स्वयं को बड़ा समझता हुआ पीठ फेरकर चल देता है, मानो उसने उन्हें सुना ही नहीं, मानो उसके काम बहरे है। अच्छा तो उसे एक दुखद यातना की शुभ सूचना दे दो
اِنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ جَنَّاتُ النَّع۪يمِۙ8
अलबत्ता जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए नेमत भरी जन्नतें हैं,
خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۜ وَعْدَ اللّٰهِ حَقًّاۜ وَهُوَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ9
जिनमें वे सदैव रहेंगे। यह अल्लाह का सच्चा वादा है और वह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
خَلَقَ السَّمٰوَاتِ بِغَيْرِ عَمَدٍ تَرَوْنَهَا وَاَلْقٰى فِي الْاَرْضِ رَوَاسِيَ اَنْ تَم۪يدَ بِكُمْ وَبَثَّ ف۪يهَا مِنْ كُلِّ دَٓابَّةٍۜ وَاَنْزَلْنَا مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً فَاَنْبَتْنَا ف۪يهَا مِنْ كُلِّ زَوْجٍ كَر۪يمٍ10
उसने आकाशों को पैदा किया, (जो थमें हुए हैं) बिना ऐसे स्तम्भों के जो तुम्हें दिखाई दें। और उसने धरती में पहाड़ डाल दिए कि ऐसा न हो कि तुम्हें लेकर डाँवाडोल हो जाए और उसने उसमें हर प्रकार के जानवर फैला दिए। और हमने ही आकाश से पानी उतारा, फिर उसमें हर प्रकार की उत्तम चीज़े उगाई
هٰذَا خَلْقُ اللّٰهِ فَاَرُون۪ي مَاذَا خَلَقَ الَّذ۪ينَ مِنْ دُونِه۪ۜ بَلِ الظَّالِمُونَ ف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ۟11
यह तो अल्लाह की संरचना है। अब तनिक मुझे दिखाओं कि उससे हटकर जो दूसरे हैं (तुम्हारे ठहराए हुए प्रुभ) उन्होंने क्या पैदा किया हैं! नहीं, बल्कि ज़ालिम तो एक खुली गुमराही में पड़े हुए है