417. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
32 · अस-सजदा
وَلَنُذ۪يقَنَّهُمْ مِنَ الْعَذَابِ الْاَدْنٰى دُونَ الْعَذَابِ الْاَكْبَرِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ21
हम बड़ी यातना से इतर उन्हें छोटी यातना का मज़ा चखाएँगे, कदाचित वे पलट आएँ
وَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنْ ذُكِّرَ بِاٰيَاتِ رَبِّه۪ ثُمَّ اَعْرَضَ عَنْهَاۜ اِنَّا مِنَ الْمُجْرِم۪ينَ مُنْتَقِمُونَ۟22
और उस व्यक्ति से बढकर अत्याचारी कौन होगा जिसे उसके रब की आयतों के द्वारा याद दिलाया जाए,फिर वह उनसे मुँह फेर ले? निश्चय ही हम अपराधियों से बदला लेकर रहेंगे
وَلَقَدْ اٰتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَلَا تَكُنْ ف۪ي مِرْيَةٍ مِنْ لِقَٓائِه۪ وَجَعَلْنَاهُ هُدًى لِبَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَۚ23
हमने मूसा को किताब प्रदान की थी - अतः उसके मिलने के प्रति तुम किसी सन्देह में न रहना और हमने इसराईल की सन्तान के लिए उस (किताब) को मार्गदर्शन बनाया था
وَجَعَلْنَا مِنْهُمْ اَئِمَّةً يَهْدُونَ بِاَمْرِنَا لَمَّا صَبَرُواۜ وَكَانُوا بِاٰيَاتِنَا يُوقِنُونَ24
और जब वे जमे रहे और उन्हें हमारी आयतों पर विश्वास था, तो हमने उनमें ऐसे नायक बनाए जो हमारे आदेश से मार्ग दिखाते थे
اِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَفْصِلُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ ف۪يمَا كَانُوا ف۪يهِ يَخْتَلِفُونَ25
निश्चय ही तेरा रब ही क़ियामत के दिन उनके बीच उन बातों का फ़ैसला करेगा, जिनमें वे मतभेद करते रहे है
اَوَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ اَهْلَكْنَا مِنْ قَبْلِهِمْ مِنَ الْقُرُونِ يَمْشُونَ ف۪ي مَسَاكِنِهِمْۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍۜ اَفَلَا يَسْمَعُونَ26
क्या उनके लिए यह चीज़ भी मार्गदर्शक सिद्ध नहीं हुई कि उनसे पहले कितनी ही नस्लों को हम विनष्ट कर चुके है, जिनके रहने-बसने की जगहों में वे चलते-फिरते है? निस्संदेह इसमें बहुत-सी निशानियाँ है। फिर क्या वे सुनने नहीं?
اَوَلَمْ يَرَوْا اَنَّا نَسُوقُ الْمَٓاءَ اِلَى الْاَرْضِ الْجُرُزِ فَنُخْرِجُ بِه۪ زَرْعًا تَاْكُلُ مِنْهُ اَنْعَامُهُمْ وَاَنْفُسُهُمْۜ اَفَلَا يُبْصِرُونَ27
क्या उन्होंने देखा नहीं कि हम सूखी पड़ी भूमि की ओर पानी ले जाते है। फिर उससे खेती उगाते है, जिसमें से उनके चौपाए भी खाते है और वे स्वयं भी? तो क्या उन्हें सूझता नहीं?
وَيَقُولُونَ مَتٰى هٰذَا الْفَتْحُ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ28
वे कहते है कि "यह फ़ैसला कब होगा, यदि तुम सच्चे हो?"
قُلْ يَوْمَ الْفَتْحِ لَا يَنْفَعُ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا ا۪يمَانُهُمْ وَلَا هُمْ يُنْظَرُونَ29
कह दो कि "फ़ैसले के दिन इनकार करनेवालों का ईमान उनके लिए कुछ लाभदायक न होगा और न उन्हें ठील ही दी जाएगी।"
فَاَعْرِضْ عَنْهُمْ وَانْتَظِرْ اِنَّهُمْ مُنْتَظِرُونَ30
अच्छा, उन्हें उनके हाल पर छोड़ दो और प्रतीक्षा करो। वे भी परीक्षारत है