418. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
33 · अल-अहज़ाब
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
يَٓا اَيُّهَا النَّبِيُّ اتَّقِ اللّٰهَ وَلَا تُطِعِ الْكَافِر۪ينَ وَالْمُنَافِق۪ينَۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ عَل۪يمًا حَك۪يمًاۙ1
ऐ नबी! अल्लाह का डर रखना और इनकार करनेवालों और कपटाचारियों का कहना न मानना। वास्तब में अल्लाह सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है
وَاتَّبِعْ مَا يُوحٰٓى اِلَيْكَ مِنْ رَبِّكَۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَب۪يرًاۙ2
और अनुकरण करना उस चीज़ का जो तुम्हारे रब की ओर से तुम्हें प्रकाशना की जा रही है। निश्चय ही अल्लाह उसकी ख़बर रखता है जो तुम करते हो
وَتَوَكَّلْ عَلَى اللّٰهِۜ وَكَفٰى بِاللّٰهِ وَك۪يلًا3
और अल्लाह पर भरोसा रखो। और अल्लाह भरोसे के लिए काफी है
مَا جَعَلَ اللّٰهُ لِرَجُلٍ مِنْ قَلْبَيْنِ ف۪ي جَوْفِه۪ۚ وَمَا جَعَلَ اَزْوَاجَكُمُ الّٰٓـ۪ٔي تُظَاهِرُونَ مِنْهُنَّ اُمَّهَاتِكُمْۚ وَمَا جَعَلَ اَدْعِيَٓاءَكُمْ اَبْنَٓاءَكُمْۜ ذٰلِكُمْ قَوْلُكُمْ بِاَفْوَاهِكُمْۜ وَاللّٰهُ يَقُولُ الْحَقَّ وَهُوَ يَهْدِي السَّب۪يلَ4
अल्लाह ने किसी व्यक्ति के सीने में दो दिल नहीं रखे। और न उसने तुम्हारी उन पत्ऩियों को जिनसे तुम ज़िहार कर बैठते हो, वास्तव में तुम्हारी माँ बनाया, और न उसने तुम्हारे मुँह बोले बेटों को तुम्हारे वास्तविक बेटे बनाए। ये तो तुम्हारे मुँह की बातें है। किन्तु अल्लाह सच्ची बात कहता है और वही मार्ग दिखाता है
اُدْعُوهُمْ لِاٰبَٓائِهِمْ هُوَ اَقْسَطُ عِنْدَ اللّٰهِۚ فَاِنْ لَمْ تَعْلَمُٓوا اٰبَٓاءَهُمْ فَاِخْوَانُكُمْ فِي الدّ۪ينِ وَمَوَال۪يكُمْۜ وَلَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ ف۪يمَٓا اَخْطَاْتُمْ بِه۪ۙ وَلٰكِنْ مَا تَعَمَّدَتْ قُلُوبُكُمْۜ وَكَانَ اللّٰهُ غَفُورًا رَح۪يمًا5
उन्हें उनके बापों का बेटा करकर पुकारो। अल्लाह के यहाँ यही अधिक न्यायसंगत बात है। और यदि तुम उनके बापों को न जानते हो, तो धर्म में वे तुम्हारे भाई तो है ही और तुम्हारे सहचर भी। इस सिलसिले में तुमसे जो ग़लती हुई हो उसमें तुमपर कोई गुनाह नहीं, किन्तु जिसका संकल्प तुम्हारे दिलों ने कर लिया, उसकी बात और है। वास्तव में अल्लाह अत्यन्त क्षमाशील, दयावान है
اَلنَّبِيُّ اَوْلٰى بِالْمُؤْمِن۪ينَ مِنْ اَنْفُسِهِمْ وَاَزْوَاجُهُٓ اُمَّهَاتُهُمْۜ وَاُو۬لُوا الْاَرْحَامِ بَعْضُهُمْ اَوْلٰى بِبَعْضٍ ف۪ي كِتَابِ اللّٰهِ مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَ وَالْمُهَاجِر۪ينَ اِلَّٓا اَنْ تَفْعَلُٓوا اِلٰٓى اَوْلِيَٓائِكُمْ مَعْرُوفًاۜ كَانَ ذٰلِكَ فِي الْكِتَابِ مَسْطُورًا6
नबी का हक़ ईमानवालों पर स्वयं उनके अपने प्राणों से बढ़कर है। और उसकी पत्नियों उनकी माएँ है। और अल्लाह के विधान के अनुसार सामान्य मोमिनों और मुहाजिरों की अपेक्षा नातेदार आपस में एक-दूसरे से अधिक निकट है। यह और बात है कि तुम अपने साथियों के साथ कोई भलाई करो। यह बात किताब में लिखी हुई है