419. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
33 · अल-अहज़ाब
وَاِذْ اَخَذْنَا مِنَ النَّبِيّ۪نَ م۪يثَاقَهُمْ وَمِنْكَ وَمِنْ نُوحٍ وَاِبْرٰه۪يمَ وَمُوسٰى وَع۪يسَى ابْنِ مَرْيَمَۖ وَاَخَذْنَا مِنْهُمْ م۪يثَاقًا غَل۪يظًاۙ7
और याद करो जब हमने नबियों से वचन लिया, तुमसे भी और नूह और इबराहीम और मूसा और मरयम के बेटे ईसा से भी। इन सबसे हमने ढृढ़ वचन लिया,
لِيَسْـَٔلَ الصَّادِق۪ينَ عَنْ صِدْقِهِمْۚ وَاَعَدَّ لِلْكَافِر۪ينَ عَذَابًا اَل۪يمًا۟8
ताकि वह सच्चे लोगों से उनकी सच्चाई के बारे में पूछे। और इनकार करनेवालों के लिए तो उसने दुखद यातना तैयार कर रखी है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللّٰهِ عَلَيْكُمْ اِذْ جَٓاءَتْكُمْ جُنُودٌ فَاَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ ر۪يحًا وَجُنُودًا لَمْ تَرَوْهَاۜ وَكَانَ اللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَص۪يرًاۚ9
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह की उस अनुकम्पा को याद करो जो तुमपर हुई; जबकि सेनाएँ तुमपर चढ़ आई तो हमने उनपर एक हवा भेज दी और ऐसी सेनाएँ भी, जिनको तुमने देखा नहीं। और अल्लाह वह सब कुछ देखता है जो तुम करते हो
اِذْ جَٓاؤُ۫كُمْ مِنْ فَوْقِكُمْ وَمِنْ اَسْفَلَ مِنْكُمْ وَاِذْ زَاغَتِ الْاَبْصَارُ وَبَلَغَتِ الْقُلُوبُ الْحَنَاجِرَ وَتَظُنُّونَ بِاللّٰهِ الظُّنُونَا10
याद करो जब वे तुम्हारे ऊपर की ओर से और तुम्हारे नीचे की ओर से भी तुमपर चढ़ आए, और जब निगाहें टेढ़ी-तिरछी हो गई और उर (हृदय) कंठ को आ लगे। और तुम अल्लाह के बारे में तरह-तरह के गुमान करने लगे थे
هُنَالِكَ ابْتُلِيَ الْمُؤْمِنُونَ وَزُلْزِلُوا زِلْزَالًا شَد۪يدًا11
उस समय ईमानवाले आज़माए गए और पूरी तरह हिला दिए गए
وَاِذْ يَقُولُ الْمُنَافِقُونَ وَالَّذ۪ينَ ف۪ي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌ مَا وَعَدَنَا اللّٰهُ وَرَسُولُهُٓ اِلَّا غُرُورًا12
और जब कपटाचारी और वे लोग जिनके दिलों में रोग है कहने लगे, "अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे जो वादा किया था वह तो धोखा मात्र था।"
وَاِذْ قَالَتْ طَٓائِفَةٌ مِنْهُمْ يَٓا اَهْلَ يَثْرِبَ لَا مُقَامَ لَكُمْ فَارْجِعُواۚ وَيَسْتَاْذِنُ فَر۪يقٌ مِنْهُمُ النَّبِيَّ يَقُولُونَ اِنَّ بُيُوتَنَا عَوْرَةٌ وَمَا هِيَ بِعَوْرَةٍۜ اِنْ يُر۪يدُونَ اِلَّا فِرَارًا13
और जबकि उनमें से एक गिरोह ने कहा, "ऐ यसरिबवालो, तुम्हारे लिए ठहरने का कोई मौक़ा नहीं। अतः लौट चलो।" और उनका एक गिरोह नबी से यह कहकर (वापस जाने की) अनुमति चाह रहा था कि "हमारे घर असुरक्षित है।" यद्यपि वे असुरक्षित न थे। वे तो बस भागना चाहते थे
وَلَوْ دُخِلَتْ عَلَيْهِمْ مِنْ اَقْطَارِهَا ثُمَّ سُئِلُوا الْفِتْنَةَ لَاٰتَوْهَا وَمَا تَلَبَّثُوا بِهَٓا اِلَّا يَس۪يرًا14
और यदि उसके चतुर्दिक से उनपर हमला हो जाता, फिर उस समय उनसे उपद्रव के लिए कहा जाता, तो वे ऐसा कर डालते और इसमें विलम्ब थोड़े ही करते!
وَلَقَدْ كَانُوا عَاهَدُوا اللّٰهَ مِنْ قَبْلُ لَا يُوَلُّونَ الْاَدْبَارَۜ وَكَانَ عَهْدُ اللّٰهِ مَسْؤُ۫لًا15
यद्यपि वे इससे पहले अल्लाह को वचन दे चुके थे कि वे पीठ न फेरेंगे, और अल्लाह से की गई प्रतिज्ञा के विषय में तो पूछा जाना ही है