420. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
33 · अल-अहज़ाब
قُلْ لَنْ يَنْفَعَكُمُ الْفِرَارُ اِنْ فَرَرْتُمْ مِنَ الْمَوْتِ اَوِ الْقَتْلِ وَاِذًا لَا تُمَتَّعُونَ اِلَّا قَل۪يلًا16
कह दो, "यदि तुम मृत्यु और मारे जाने से भागो भी तो यह भागना तुम्हारे लिए कदापि लाभप्रद न होगा। और इस हालत में भी तुम सुख थोड़े ही प्राप्त कर सकोगे।"
قُلْ مَنْ ذَا الَّذ۪ي يَعْصِمُكُمْ مِنَ اللّٰهِ اِنْ اَرَادَ بِكُمْ سُٓوءًا اَوْ اَرَادَ بِكُمْ رَحْمَةًۜ وَلَا يَجِدُونَ لَهُمْ مِنْ دُونِ اللّٰهِ وَلِيًّا وَلَا نَص۪يرًا17
कहो, "कहो है जो तुम्हें अल्लाह से बचा सकता है, यदि वह तुम्हारी कोई बुराई चाहे या वह तुम्हारे प्रति दयालुता का इरादा करे (तो कौन है जो उसकी दयालुता को रोक सके)?" वे अल्लाह के अल्लाह के अलावा न अपना कोई निकटवर्ती समर्थक पाएँगे और न (दूर का) सहायक
قَدْ يَعْلَمُ اللّٰهُ الْمُعَوِّق۪ينَ مِنْكُمْ وَالْقَٓائِل۪ينَ لِاِخْوَانِهِمْ هَلُمَّ اِلَيْنَاۚ وَلَا يَاْتُونَ الْبَاْسَ اِلَّا قَل۪يلًاۙ18
अल्लाह तुममें से उन लोगों को भली-भाँति जानता है जो (युद्ध से) रोकते है और अपने भाइयों से कहते है, "हमारे पास आ जाओ।" और वे लड़ाई में थोड़े ही आते है, (क्योंकि वे)
اَشِحَّةً عَلَيْكُمْۚ فَاِذَا جَٓاءَ الْخَوْفُ رَاَيْتَهُمْ يَنْظُرُونَ اِلَيْكَ تَدُورُ اَعْيُنُهُمْ كَالَّذ۪ي يُغْشٰى عَلَيْهِ مِنَ الْمَوْتِۚ فَاِذَا ذَهَبَ الْخَوْفُ سَلَقُوكُمْ بِاَلْسِنَةٍ حِدَادٍ اَشِحَّةً عَلَى الْخَيْرِۜ اُو۬لٰٓئِكَ لَمْ يُؤْمِنُوا فَاَحْبَطَ اللّٰهُ اَعْمَالَهُمْۜ وَكَانَ ذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ يَس۪يرًا19
तुम्हारे साथ कृपणता से काम लेते है। अतः जब भय का समय आ जाता है, तो तुम उन्हें देखते हो कि वे तुम्हारी ओर इस प्रकार ताक रहे कि उनकी आँखें चक्कर खा रही है, जैसे किसी व्यक्ति पर मौत की बेहोशी छा रही हो। किन्तु जब भय जाता रहता है तो वे माल के लोभ में तेज़ ज़बाने तुमपर चलाते है। ऐसे लोग ईमान लाए ही नहीं। अतः अल्लाह ने उनके कर्म उनकी जान को लागू कर दिए। और यह अल्लाह के लिए बहुत सरल है
يَحْسَبُونَ الْاَحْزَابَ لَمْ يَذْهَبُواۚ وَاِنْ يَاْتِ الْاَحْزَابُ يَوَدُّوا لَوْ اَنَّهُمْ بَادُونَ فِي الْاَعْرَابِ يَسْـَٔلُونَ عَنْ اَنْبَٓائِكُمْۜ وَلَوْ كَانُوا ف۪يكُمْ مَا قَاتَلُٓوا اِلَّا قَل۪يلًا۟20
वे समझ रहे है कि (शत्रु के) सैन्य दल अभी गए नहीं हैं, और यदि वे गिरोह फिर आ जाएँ तो वे चाहेंगे कि किसी प्रकार बाहर (मरुस्थल में) बद्दु ओं के साथ हो रहें और वहीं से तुम्हारे बारे में समाचार पूछते रहे। और यदि वे तुम्हारे साथ होते भी तो लड़ाई में हिस्सा थोड़े ही लेते
لَقَدْ كَانَ لَكُمْ ف۪ي رَسُولِ اللّٰهِ اُسْوَةٌ حَسَنَةٌ لِمَنْ كَانَ يَرْجُوا اللّٰهَ وَالْيَوْمَ الْاٰخِرَ وَذَكَرَ اللّٰهَ كَث۪يرًاۜ21
निस्संदेह तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल में एक उत्तम आदर्श है अर्थात उस व्यक्ति के लिए जो अल्लाह और अन्तिम दिन की आशा रखता हो और अल्लाह को अधिक याद करे
وَلَمَّا رَاَ الْمُؤْمِنُونَ الْاَحْزَابَۙ قَالُوا هٰذَا مَا وَعَدَنَا اللّٰهُ وَرَسُولُهُ وَصَدَقَ اللّٰهُ وَرَسُولُهُۘ وَمَا زَادَهُمْ اِلَّٓا ا۪يمَانًا وَتَسْل۪يمًاۜ22
और जब ईमानवालों ने सैन्य दलों को देखा तो वे पुकार उठे, "यह तो वही चीज़ है, जिसका अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे वादा किया था। और अल्लाह और उसके रसूल ने सच कहा था।" इस चीज़ ने उनके ईमान और आज्ञाकारिता ही को बढ़ाया