421. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
33 · अल-अहज़ाब
مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَ رِجَالٌ صَدَقُوا مَا عَاهَدُوا اللّٰهَ عَلَيْهِۚ فَمِنْهُمْ مَنْ قَضٰى نَحْبَهُ وَمِنْهُمْ مَنْ يَنْتَظِرُۘ وَمَا بَدَّلُوا تَبْد۪يلًاۙ23
ईमानवालों के रूप में ऐसे पुरुष मौजूद है कि जो प्रतिज्ञा उन्होंने अल्लाह से की थी उसे उन्होंने सच्चा कर दिखाया। फिर उनमें से कुछ तो अपना प्रण पूरा कर चुके और उनमें से कुछ प्रतीक्षा में है। और उन्होंने अपनी बात तनिक भी नहीं बदली
لِيَجْزِيَ اللّٰهُ الصَّادِق۪ينَ بِصِدْقِهِمْ وَيُعَذِّبَ الْمُنَافِق۪ينَ اِنْ شَٓاءَ اَوْ يَتُوبَ عَلَيْهِمْۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ غَفُورًا رَح۪يمًاۚ24
ताकि इसके परिणामस्वरूप अल्लाह सच्चों को उनकी सच्चाई का बदला दे और कपटाचारियों को चाहे तो यातना दे या उनकी तौबा क़बूल करे। निश्चय ही अल्लाह बड़ी क्षमाशील, दयावान है
وَرَدَّ اللّٰهُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِغَيْظِهِمْ لَمْ يَنَالُوا خَيْرًاۜ وَكَفَى اللّٰهُ الْمُؤْمِن۪ينَ الْقِتَالَۜ وَكَانَ اللّٰهُ قَوِيًّا عَز۪يزًاۚ25
अल्लाह ने इनकार करनेवालों को उनके अपने क्रोध के साथ फेर दिया। वे कोई भलाई प्राप्त न कर सके। अल्लाह ने मोमिनों को युद्ध करने से बचा लिया। अल्लाह तो है ही बड़ा शक्तिवान, प्रभुत्वशाली
وَاَنْزَلَ الَّذ۪ينَ ظَاهَرُوهُمْ مِنْ اَهْلِ الْكِتَابِ مِنْ صَيَاص۪يهِمْ وَقَذَفَ ف۪ي قُلُوبِهِمُ الرُّعْبَ فَر۪يقًا تَقْتُلُونَ وَتَاْسِرُونَ فَر۪يقًاۚ26
और किताबवालों में सो जिन लोगों ने उसकी सहायता की थी, उन्हें उनकी गढ़ियों से उतार लाया। और उनके दिलों में धाक बिठा दी कि तुम एक गिरोह को जान से मारने लगे और एक गिरोह को बन्दी बनाने लगे
وَاَوْرَثَكُمْ اَرْضَهُمْ وَدِيَارَهُمْ وَاَمْوَالَهُمْ وَاَرْضًا لَمْ تَطَؤُ۫هَاۜ وَكَانَ اللّٰهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرًا۟27
और उसने तुम्हें उनके भू-भाग और उनके घरों और उनके मालों का वारिस बना दिया और उस भू-भाग का भी जिसे तुमने पददलित नहीं किया। वास्तव में अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
يَٓا اَيُّهَا النَّبِيُّ قُلْ لِاَزْوَاجِكَ اِنْ كُنْتُنَّ تُرِدْنَ الْحَيٰوةَ الدُّنْيَا وَز۪ينَتَهَا فَتَعَالَيْنَ اُمَتِّعْكُنَّ وَاُسَرِّحْكُنَّ سَرَاحًا جَم۪يلًا28
ऐ नबी! अपनी पत्नि यों से कह दो कि "यदि तुम सांसारिक जीवन और उसकी शोभा चाहती हो तो आओ, मैं तुम्हें कुछ दे-दिलाकर भली रीति से विदा कर दूँ
وَاِنْ كُنْتُنَّ تُرِدْنَ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ وَالدَّارَ الْاٰخِرَةَ فَاِنَّ اللّٰهَ اَعَدَّ لِلْمُحْسِنَاتِ مِنْكُنَّ اَجْرًا عَظ۪يمًا29
"किन्तु यदि तुम अल्लाह और उसके रसूल और आख़िरत के घर को चाहती हो तो निश्चय ही अल्लाह ने तुममे से उत्तमकार स्त्रियों के लिए बड़ा प्रतिदान रख छोड़ा है।"
يَا نِسَٓاءَ النَّبِيِّ مَنْ يَاْتِ مِنْكُنَّ بِفَاحِشَةٍ مُبَيِّنَةٍ يُضَاعَفْ لَهَا الْعَذَابُ ضِعْفَيْنِۜ وَكَانَ ذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ يَس۪يرًا30
ऐ नबी की स्त्रियों! तुममें से जो कोई प्रत्यक्ष अनुचित कर्म करे तो उसके लिए दोहरी यातना होगी। और यह अल्लाह के लिए बहुत सरल है