422. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
33 · अल-अहज़ाब
وَمَنْ يَقْنُتْ مِنْكُنَّ لِلّٰهِ وَرَسُولِه۪ وَتَعْمَلْ صَالِحًا نُؤْتِهَٓا اَجْرَهَا مَرَّتَيْنِۙ وَاَعْتَدْنَا لَهَا رِزْقًا كَر۪يمًا31
किन्तु तुममें से जो अल्लाह और उसके रसूल के प्रति निष्ठापूर्वक आज्ञाकारिता की नीति अपनाए और अच्छा कर्म करे, उसे हम दोहरा प्रतिदान प्रदान करेंगे और उसके लिए हमने सम्मानपूर्ण आजीविका तैयार कर रखी है
يَا نِسَٓاءَ النَّبِيِّ لَسْتُنَّ كَاَحَدٍ مِنَ النِّسَٓاءِ اِنِ اتَّقَيْتُنَّ فَلَا تَخْضَعْنَ بِالْقَوْلِ فَيَطْمَعَ الَّذ۪ي ف۪ي قَلْبِه۪ مَرَضٌ وَقُلْنَ قَوْلًا مَعْرُوفًاۚ32
ऐ नबी की स्त्रियों! तुम सामान्य स्त्रियों में से किसी की तरह नहीं हो, यदि तुम अल्लाह का डर रखो। अतः तुम्हारी बातों में लोच न हो कि वह व्यक्ति जिसके दिल में रोग है, वह लालच में पड़ जाए। तुम सामान्य रूप से बात करो
وَقَرْنَ ف۪ي بُيُوتِكُنَّ وَلَا تَبَرَّجْنَ تَبَرُّجَ الْجَاهِلِيَّةِ الْاُو۫لٰى وَاَقِمْنَ الصَّلٰوةَ وَاٰت۪ينَ الزَّكٰوةَ وَاَطِعْنَ اللّٰهَ وَرَسُولَهُۜ اِنَّمَا يُر۪يدُ اللّٰهُ لِيُذْهِبَ عَنْكُمُ الرِّجْسَ اَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْه۪يرًاۚ33
अपने घरों में टिककर रहो और विगत अज्ञानकाल की-सी सज-धज न दिखाती फिरना। नमाज़ का आयोजन करो और ज़कात दो। और अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो। अल्लाह तो बस यही चाहता है कि ऐ नबी के घरवालो, तुमसे गन्दगी को दूर रखे और तुम्हें तरह पाक-साफ़ रखे
وَاذْكُرْنَ مَا يُتْلٰى ف۪ي بُيُوتِكُنَّ مِنْ اٰيَاتِ اللّٰهِ وَالْحِكْمَةِۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ لَط۪يفًا خَب۪يرًا۟34
तुम्हारे घरों में अल्लाह की जो आयतें और तत्वदर्शिता की बातें सुनाई जाती है उनकी चर्चा करती रहो। निश्चय ही अल्लाह अत्यन्त सूक्ष्मदर्शी, खबर रखनेवाला है
اِنَّ الْمُسْلِم۪ينَ وَالْمُسْلِمَاتِ وَالْمُؤْمِن۪ينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ وَالْقَانِت۪ينَ وَالْقَانِتَاتِ وَالصَّادِق۪ينَ وَالصَّادِقَاتِ وَالصَّابِر۪ينَ وَالصَّابِرَاتِ وَالْخَاشِع۪ينَ وَالْخَاشِعَاتِ وَالْمُتَصَدِّق۪ينَ وَالْمُتَصَدِّقَاتِ وَالصَّٓائِم۪ينَ وَالصَّٓائِمَاتِ وَالْحَافِظ۪ينَ فُرُوجَهُمْ وَالْحَافِظَاتِ وَالذَّاكِر۪ينَ اللّٰهَ كَث۪يرًا وَالذَّاكِرَاتِ اَعَدَّ اللّٰهُ لَهُمْ مَغْفِرَةً وَاَجْرًا عَظ۪يمًا35
मुस्लिम पुरुष और मुस्लिम स्त्रियाँ, ईमानवाले पुरुष और ईमानवाली स्त्रियाँ, निष्ठा्पूर्वक आज्ञापालन करनेवाले पुरुष और निष्ठापूर्वक आज्ञापालन करनेवाली स्त्रियाँ, सत्यवादी पुरुष और सत्यवादी स्त्रियाँ, धैर्यवान पुरुष और धैर्य रखनेवाली स्त्रियाँ, विनम्रता दिखानेवाले पुरुष और विनम्रता दिखानेवाली स्त्रियाँ, सदक़ा (दान) देनेवाले पुरुष और सदक़ा देनेवाली स्त्रियाँ, रोज़ा रखनेवाले पुरुष और रोज़ा रखनेवाली स्त्रियाँ, अपने गुप्तांगों की रक्षा करनेवाले पुरुष और रक्षा करनेवाली स्त्रियाँ और अल्लाह को अधिक याद करनेवाले पुरुष और याद करनेवाली स्त्रियाँ - इनके लिए अल्लाह ने क्षमा और बड़ा प्रतिदान तैयार कर रखा है