424. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

424. पृष्ठ
33 · अल-अहज़ाब
تَحِيَّتُهُمْ يَوْمَ يَلْقَوْنَهُ سَلَامٌۚ وَاَعَدَّ لَهُمْ اَجْرًا كَر۪يمًا44
जिस दिन वे उससे मिलेंगे उनका अभिवादन होगा, सलाम और उनके लिए प्रतिष्ठामय प्रदान तैयार कर रखा है
يَٓا اَيُّهَا النَّبِيُّ اِنَّٓا اَرْسَلْنَاكَ شَاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذ۪يرًاۙ45
ऐ नबी! हमने तुमको साक्षी और शुभ सूचना देनेवाला और सचेल करनेवाला बनाकर भेजा है;
وَدَاعِيًا اِلَى اللّٰهِ بِاِذْنِه۪ وَسِرَاجًا مُن۪يرًا46
और अल्लाह की अनुज्ञा से उसकी ओर बुलानेवाला और प्रकाशमान प्रदीप बनाकर
وَبَشِّرِ الْمُؤْمِن۪ينَ بِاَنَّ لَهُمْ مِنَ اللّٰهِ فَضْلًا كَب۪يرًا47
ईमानवालों को शुभ सूचना दे दो कि उनके लिए अल्लाह को ओर से बहुत बड़ा उदार अनुग्रह है
وَلَا تُطِعِ الْكَافِر۪ينَ وَالْمُنَافِق۪ينَ وَدَعْ اَذٰيهُمْ وَتَوَكَّلْ عَلَى اللّٰهِۜ وَكَفٰى بِاللّٰهِ وَك۪يلًا48
और इनकार करनेवालों और कपटाचारियों के कहने में न आना। उनकी पहुँचाई हुई तकलीफ़ का ख़याल न करो। और अल्लाह पर भरोसा रखो। अल्लाह इसके लिए काफ़ी है कि अपने मामले में उसपर भरोसा किया जाए
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اِذَا نَكَحْتُمُ الْمُؤْمِنَاتِ ثُمَّ طَلَّقْتُمُوهُنَّ مِنْ قَبْلِ اَنْ تَمَسُّوهُنَّ فَمَا لَكُمْ عَلَيْهِنَّ مِنْ عِدَّةٍ تَعْتَدُّونَهَاۚ فَمَتِّعُوهُنَّ وَسَرِّحُوهُنَّ سَرَاحًا جَم۪يلًا49
ऐ ईमान लानेवालो! जब तुम ईमान लानेवाली स्त्रियों से विवाह करो और फिर उन्हें हाथ लगाने से पहले तलाक़ दे दो तो तुम्हारे लिए उनपर कोई इद्दत नहीं, जिसकी तुम गिनती करो। अतः उन्हें कुछ सामान दे दो और भली रीति से विदा कर दो
يَٓا اَيُّهَا النَّبِيُّ اِنَّٓا اَحْلَلْنَا لَكَ اَزْوَاجَكَ الّٰت۪ٓي اٰتَيْتَ اُجُورَهُنَّ وَمَا مَلَكَتْ يَم۪ينُكَ مِمَّٓا اَفَٓاءَ اللّٰهُ عَلَيْكَ وَبَنَاتِ عَمِّكَ وَبَنَاتِ عَمَّاتِكَ وَبَنَاتِ خَالِكَ وَبَنَاتِ خَالَاتِكَ الّٰت۪ي هَاجَرْنَ مَعَكَۘ وَامْرَاَةً مُؤْمِنَةً اِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ اِنْ اَرَادَ النَّبِيُّ اَنْ يَسْتَنْكِحَهَاۗ خَالِصَةً لَكَ مِنْ دُونِ الْمُؤْمِن۪ينَۜ قَدْ عَلِمْنَا مَا فَرَضْنَا عَلَيْهِمْ ف۪ٓي اَزْوَاجِهِمْ وَمَا مَلَكَتْ اَيْمَانُهُمْ لِكَيْلَا يَكُونَ عَلَيْكَ حَرَجٌۜ وَكَانَ اللّٰهُ غَفُورًا رَح۪يمًا50
ऐ नबी! हमने तुम्हारे लिए तुम्हारी वे पत्नियों वैध कर दी है जिनके मह्रक तुम दे चुके हो, और उन स्त्रियों को भी जो तुम्हारी मिल्कियत में आई, जिन्हें अल्लाह ने ग़नीमत के रूप में तुम्हें दी और तुम्हारी चचा की बेटियाँ और तुम्हारी फूफियों की बेटियाँ और तुम्हारे मामुओं की बेटियाँ और तुम्हारी ख़ालाओं की बेटियाँ जिन्होंने तुम्हारे साथ हिजरत की है और वह ईमानवाली स्त्री जो अपने आपको नबी के लिए दे दे, यदि नबी उससे विवाह करना चाहे। ईमानवालों से हटकर यह केवल तुम्हारे ही लिए है, हमें मालूम है जो कुछ हमने उनकी पत्ऩियों और उनकी लौड़ियों के बारे में उनपर अनिवार्य किया है - ताकि तुमपर कोई तंगी न रहे। अल्लाह बहुत क्षमाशील, दयावान है