425. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
33 · अल-अहज़ाब
تُرْج۪ي مَنْ تَشَٓاءُ مِنْهُنَّ وَتُـْٔو۪ٓي اِلَيْكَ مَنْ تَشَٓاءُۜ وَمَنِ ابْتَغَيْتَ مِمَّنْ عَزَلْتَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكَۜ ذٰلِكَ اَدْنٰٓى اَنْ تَقَرَّ اَعْيُنُهُنَّ وَلَا يَحْزَنَّ وَيَرْضَيْنَ بِمَٓا اٰتَيْتَهُنَّ كُلُّهُنَّۜ وَاللّٰهُ يَعْلَمُ مَا ف۪ي قُلُوبِكُمْۜ وَكَانَ اللّٰهُ عَل۪يمًا حَل۪يمًا51
तुम उनमें से जिसे चाहो अपने से अलग रखो और जिसे चाहो अपने पास रखो, और जिनको तुमने अलग रखा हो, उनमें से किसी के इच्छुक हो तो इसमें तुमपर कोई दोष नहीं, इससे इस बात की अधिक सम्भावना है कि उनकी आँखें ठंड़ी रहें और वे शोकाकुल न हों और जो कुछ तुम उन्हें दो उसपर वे राज़ी रहें। अल्लाह जानता है जो कुछ तुम्हारे दिलों में है। अल्लाह सर्वज्ञ, बहुत सहनशील है
لَا يَحِلُّ لَكَ النِّسَٓاءُ مِنْ بَعْدُ وَلَٓا اَنْ تَبَدَّلَ بِهِنَّ مِنْ اَزْوَاجٍ وَلَوْ اَعْجَبَكَ حُسْنُهُنَّ اِلَّا مَا مَلَكَتْ يَم۪ينُكَۜ وَكَانَ اللّٰهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ رَق۪يبًا۟52
इसके पश्चात तुम्हारे लिए दूसरी स्त्रियाँ वैध नहीं और न यह कि तुम उनकी जगह दूसरी पत्नियों ले आओ, यद्यपि उनका सौन्दर्य तुम्हें कितना ही भाए। उनकी बात औऱ है जो तुम्हारी लौंडियाँ हो। वास्तव में अल्लाह की स्पष्ट हर चीज़ पर है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تَدْخُلُوا بُيُوتَ النَّبِيِّ اِلَّٓا اَنْ يُؤْذَنَ لَكُمْ اِلٰى طَعَامٍ غَيْرَ نَاظِر۪ينَ اِنٰيهُۙ وَلٰكِنْ اِذَا دُع۪يتُمْ فَادْخُلُوا فَاِذَا طَعِمْتُمْ فَانْتَشِرُوا وَلَا مُسْتَاْنِس۪ينَ لِحَد۪يثٍۜ اِنَّ ذٰلِكُمْ كَانَ يُؤْذِي النَّبِيَّ فَيَسْتَحْي۪ مِنْكُمْۘ وَاللّٰهُ لَا يَسْتَحْي۪ مِنَ الْحَقِّۜ وَاِذَا سَاَلْتُمُوهُنَّ مَتَاعًا فَسْـَٔلُوهُنَّ مِنْ وَرَٓاءِ حِجَابٍۜ ذٰلِكُمْ اَطْهَرُ لِقُلُوبِكُمْ وَقُلُوبِهِنَّۜ وَمَا كَانَ لَكُمْ اَنْ تُؤْذُوا رَسُولَ اللّٰهِ وَلَٓا اَنْ تَنْكِحُٓوا اَزْوَاجَهُ مِنْ بَعْدِه۪ٓ اَبَدًاۜ اِنَّ ذٰلِكُمْ كَانَ عِنْدَ اللّٰهِ عَظ۪يمًا53
ऐ ईमान लानेवालो! नबी के घरों में प्रवेश न करो, सिवाय इसके कि कभी तुम्हें खाने पर आने की अनुमति दी जाए। वह भी इस तरह कि उसकी (खाना पकने की) तैयारी की प्रतिक्षा में न रहो। अलबत्ता जब तुम्हें बुलाया जाए तो अन्दर जाओ, और जब तुम खा चुको तो उठकर चले जाओ, बातों में लगे न रहो। निश्चय ही यह हरकत नबी को तकलीफ़ देती है। किन्तु उन्हें तुमसे लज्जा आती है। किन्तु अल्लाह सच्ची बात कहने से लज्जा नहीं करता। और जब तुम उनसे कुछ माँगों तो उनसे परदे के पीछे से माँगो। यह अधिक शुद्धता की बात है तुम्हारे दिलों के लिए और उनके दिलों के लिए भी। तुम्हारे लिए वैध नहीं कि तुम अल्लाह के रसूल को तकलीफ़ पहुँचाओ और न यह कि उसके बाद कभी उसकी पत्नियों से विवाह करो। निश्चय ही अल्लाह की दृष्टि में यह बड़ी गम्भीर बात है
اِنْ تُبْدُوا شَيْـًٔا اَوْ تُخْفُوهُ فَاِنَّ اللّٰهَ كَانَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَل۪يمًا54
तुम चाहे किसी चीज़ को व्यक्त करो या उसे छिपाओ, अल्लाह को तो हर चीज़ का ज्ञान है