426. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

426. पृष्ठ
33 · अल-अहज़ाब
لَا جُنَاحَ عَلَيْهِنَّ ف۪ٓي اٰبَٓائِهِنَّ وَلَٓا اَبْنَٓائِهِنَّ وَلَٓا اِخْوَانِهِنَّ وَلَٓا اَبْنَٓاءِ اِخْوَانِهِنَّ وَلَٓا اَبْنَٓاءِ اَخَوَاتِهِنَّ وَلَا نِسَٓائِهِنَّ وَلَا مَا مَلَكَتْ اَيْمَانُهُنَّۚ وَاتَّق۪ينَ اللّٰهَۜ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ شَه۪يدًا55
न उनके लिए अपने बापों के सामने होने में कोई दोष है और न अपने बेटों, न अपने भाइयों, न अपने भतीजों, न अपने भांजो, न अपने मेल की स्त्रियों और न जिनपर उन्हें स्वामित्व का अधिकार प्राप्त हो उनके सामने होने में। अल्लाह का डर रखो, निश्चय ही अल्लाह हर चीज़ का साक्षी है
اِنَّ اللّٰهَ وَمَلٰٓئِكَتَهُ يُصَلُّونَ عَلَى النَّبِيِّۜ يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا صَلُّوا عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا تَسْل۪يمًا56
निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो
اِنَّ الَّذ۪ينَ يُؤْذُونَ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ لَعَنَهُمُ اللّٰهُ فِي الدُّنْيَا وَالْاٰخِرَةِ وَاَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا مُه۪ينًا57
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल को दुख पहुँचाते है, अल्लाह ने उनपर दुनिया और आख़िरत में लानत की है और उनके लिए अपमानजनक यातना तैयार कर रखी है
وَالَّذ۪ينَ يُؤْذُونَ الْمُؤْمِن۪ينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ بِغَيْرِ مَا اكْتَسَبُوا فَقَدِ احْتَمَلُوا بُهْتَانًا وَاِثْمًا مُب۪ينًا۟58
और जो लोग ईमानवाले पुरुषों और ईमानवाली स्त्रियों को, बिना इसके कि उन्होंने कुछ किया हो (आरोप लगाकर), दुख पहुँचाते है, उन्होंने तो बड़े मिथ्यारोपण और प्रत्यक्ष गुनाह का बोझ अपने ऊपर उठा लिया
يَٓا اَيُّهَا النَّبِيُّ قُلْ لِاَزْوَاجِكَ وَبَنَاتِكَ وَنِسَٓاءِ الْمُؤْمِن۪ينَ يُدْن۪ينَ عَلَيْهِنَّ مِنْ جَلَاب۪يبِهِنَّۜ ذٰلِكَ اَدْنٰٓى اَنْ يُعْرَفْنَ فَلَا يُؤْذَيْنَۜ وَكَانَ اللّٰهُ غَفُورًا رَح۪يمًا59
ऐ नबी! अपनी पत्नि यों और अपनी बेटियों और ईमानवाली स्त्रियों से कह दो कि वे अपने ऊपर अपनी चादरों का कुछ हिस्सा लटका लिया करें। इससे इस बात की अधिक सम्भावना है कि वे पहचान ली जाएँ और सताई न जाएँ। अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है
لَئِنْ لَمْ يَنْتَهِ الْمُنَافِقُونَ وَالَّذ۪ينَ ف۪ي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌ وَالْمُرْجِفُونَ فِي الْمَد۪ينَةِ لَنُغْرِيَنَّكَ بِهِمْ ثُمَّ لَا يُجَاوِرُونَكَ ف۪يهَٓا اِلَّا قَل۪يلًاۚۛ60
यदि कपटाचारी और वे लोग जिनके दिलों में रोग है और मदीना में खलबली पैदा करनेवाली अफ़वाहें फैलाने से बाज़ न आएँ तो हम तुम्हें उनके विरुद्ध उभार खड़ा करेंगे। फिर वे उसमें तुम्हारे साथ थोड़ा ही रहने पाएँगे,
مَلْعُون۪ينَۚۛ اَيْنَ مَا ثُقِفُٓوا اُخِذُوا وَقُتِّلُوا تَقْت۪يلًا61
फिटकारे हुए होंगे। जहाँ कही पाए गए पकड़े जाएँगे और बुरी तरह जान से मारे जाएँगे
سُنَّةَ اللّٰهِ فِي الَّذ۪ينَ خَلَوْا مِنْ قَبْلُۚ وَلَنْ تَجِدَ لِسُنَّةِ اللّٰهِ تَبْد۪يلًا62
यही अल्लाह की रीति रही है उन लोगों के विषय में भी जो पहले गुज़र चुके हैं। और तुम अल्लाह की रीति में कदापि परिवर्तन न पाओगे