427. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

427. पृष्ठ
33 · अल-अहज़ाब
يَسْـَٔلُكَ النَّاسُ عَنِ السَّاعَةِۜ قُلْ اِنَّمَا عِلْمُهَا عِنْدَ اللّٰهِۜ وَمَا يُدْر۪يكَ لَعَلَّ السَّاعَةَ تَكُونُ قَر۪يبًا63
लोग तुमसे क़ियामत की घड़ी के बारे में पूछते है। कह दो, "उसका ज्ञान तो बस अल्लाह ही के पास है। तुम्हें क्या मालूम? कदाचित वह घड़ी निकट ही हो।"
اِنَّ اللّٰهَ لَعَنَ الْكَافِر۪ينَ وَاَعَدَّ لَهُمْ سَع۪يرًاۙ64
निश्चय ही अल्लाह ने इनकार करनेवालों पर लानत की है और उनके लिए भड़कती आग तैयार कर रखी है,
خَالِد۪ينَ ف۪يهَٓا اَبَدًاۚ لَا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَص۪يرًاۚ65
जिसमें वे सदैव रहेंगे। न वे कोई निकटवर्ती समर्थक पाएँगे और न (दूर का) सहायक
يَوْمَ تُقَلَّبُ وُجُوهُهُمْ فِي النَّارِ يَقُولُونَ يَا لَيْتَنَٓا اَطَعْنَا اللّٰهَ وَاَطَعْنَا الرَّسُولَا66
जिस दिन उनके चहेरे आग में उलटे-पलटे जाएँगे, वे कहेंगे, "क्या ही अच्छा होता कि हमने अल्लाह का आज्ञापालन किया होता और रसूल का आज्ञापालन किया होता!"
وَقَالُوا رَبَّنَٓا اِنَّٓا اَطَعْنَا سَادَتَنَا وَكُبَرَٓاءَنَا فَاَضَلُّونَا السَّب۪يلَا67
वे कहेंगे, "ऐ हमारे रब! वास्तव में हमने अपने सरदारों और अपने बड़ो का आज्ञा का पालन किया और उन्होंने हमें मार्ग से भटका दिया।
رَبَّنَٓا اٰتِهِمْ ضِعْفَيْنِ مِنَ الْعَذَابِ وَالْعَنْهُمْ لَعْنًا كَب۪يرًا۟68
"ऐ हमारे रब! उन्हें दोहरी यातना दे और उनपर बड़ी लानत कर!"
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تَكُونُوا كَالَّذ۪ينَ اٰذَوْا مُوسٰى فَبَرَّاَهُ اللّٰهُ مِمَّا قَالُواۜ وَكَانَ عِنْدَ اللّٰهِ وَج۪يهًا69
ऐ ईमान लानेवालो! उन लोगों की तरह न हो जाना जिन्होंने मूसा को दुख पहुँचाया, तो अल्लाह ने उससे जो कुछ उन्होंने कहा था उसे बरी कर दिया। वह अल्लाह के यहाँ बड़ा गरिमावान था
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا اتَّقُوا اللّٰهَ وَقُولُوا قَوْلًا سَد۪يدًاۙ70
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह का डर रखो और बात कहो ठीक सधी हुई
يُصْلِحْ لَكُمْ اَعْمَالَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْۜ وَمَنْ يُطِعِ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ فَقَدْ فَازَ فَوْزًا عَظ۪يمًا71
वह तुम्हारे कर्मों को सँवार देगा और तुम्हारे गुनाहों को क्षमा कर देगा। और जो अल्लाह और उसके रसूल का आज्ञापालन करे, उसने बड़ी सफलता प्राप्त॥ कर ली है
اِنَّا عَرَضْنَا الْاَمَانَةَ عَلَى السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَالْجِبَالِ فَاَبَيْنَ اَنْ يَحْمِلْنَهَا وَاَشْفَقْنَ مِنْهَا وَحَمَلَهَا الْاِنْسَانُۜ اِنَّهُ كَانَ ظَلُومًا جَهُولًاۙ72
हमने अमानत को आकाशों और धरती और पर्वतों के समक्ष प्रस्तुत किया, किन्तु उन्होंने उसके उठाने से इनकार कर दिया और उससे डर गए। लेकिन मनुष्य ने उसे उठा लिया। निश्चय ही वह बड़ी ज़ालिम, आवेश के वशीभूत हो जानेवाला है
لِيُعَذِّبَ اللّٰهُ الْمُنَافِق۪ينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْمُشْرِك۪ينَ وَالْمُشْرِكَاتِ وَيَتُوبَ اللّٰهُ عَلَى الْمُؤْمِن۪ينَ وَالْمُؤْمِنَاتِۜ وَكَانَ اللّٰهُ غَفُورًا رَح۪يمًا73
ताकि अल्लाह कपटाचारी पुरुषों और कपटाचारी स्त्रियों और बहुदेववादी पुरुषों और बहुदेववादी स्त्रियों को यातना दे, और ईमानवाले पुरुषों और ईमानवाली स्त्रियों पर अल्लाह कृपा-स्पष्ट करे। वास्तव में अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है