429. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

429. पृष्ठ
34 · सबा
اَفْتَرٰى عَلَى اللّٰهِ كَذِبًا اَمْ بِه۪ جِنَّةٌۜ بَلِ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ فِي الْعَذَابِ وَالضَّلَالِ الْبَع۪يدِ8
क्या उसने अल्लाह पर झूठ घड़कर थोपा है, या उसे कुछ उन्माद है? नहीं, बल्कि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते वे यातना और परले दरजे की गुमराही में हैं
اَفَلَمْ يَرَوْا اِلٰى مَا بَيْنَ اَيْد۪يهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ مِنَ السَّمَٓاءِ وَالْاَرْضِۜ اِنْ نَشَاْ نَخْسِفْ بِهِمُ الْاَرْضَ اَوْ نُسْقِطْ عَلَيْهِمْ كِسَفًا مِنَ السَّمَٓاءِۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِكُلِّ عَبْدٍ مُن۪يبٍ۟9
क्या उन्होंने आकाश और धरती को नहीं देखा, जो उनके आगे भी है और उनके पीछे भी? यदि हम चाहें तो उन्हें धरती में धँसा दें या उनपर आकाश से कुछ टुकड़े गिरा दें। निश्चय ही इसमें एक निशानी है हर उस बन्दे के लिए जो रुजू करनेवाला हो
وَلَقَدْ اٰتَيْنَا دَاوُ۫دَ مِنَّا فَضْلًاۜ يَا جِبَالُ اَوِّب۪ي مَعَهُ وَالطَّيْرَۚ وَاَلَنَّا لَهُ الْحَد۪يدَۙ10
हमने दाऊद को अपनी ओर से श्रेष्ठ ता प्रदान की, "ऐ पर्वतों! उसके साथ तसबीह को प्रतिध्वनित करो, और पक्षियों तुम भी!" और हमने उसके लिए लोहे को नर्म कर दिया
اَنِ اعْمَلْ سَابِغَاتٍ وَقَدِّرْ فِي السَّرْدِ وَاعْمَلُوا صَالِحًاۜ اِنّ۪ي بِمَا تَعْمَلُونَ بَص۪يرٌ11
कि "पूरी कवचें बना और कड़ियों को ठीक अंदाज़ें से जोड।" - और तुम अच्छा कर्म करो। निस्संदेह जो कुछ तुम करते हो उसे मैं देखता हूँ
وَلِسُلَيْمٰنَ الرّ۪يحَ غُدُوُّهَا شَهْرٌ وَرَوَاحُهَا شَهْرٌۚ وَاَسَلْنَا لَهُ عَيْنَ الْقِطْرِۜ وَمِنَ الْجِنِّ مَنْ يَعْمَلُ بَيْنَ يَدَيْهِ بِاِذْنِ رَبِّه۪ۜ وَمَنْ يَزِغْ مِنْهُمْ عَنْ اَمْرِنَا نُذِقْهُ مِنْ عَذَابِ السَّع۪يرِ12
और सुलैमान के लिए वायु को वशीभुत कर दिया था। प्रातः समय उसका चलना एक महीने की राह तक और सायंकाल को उसका चलना एक महीने की राह तक - और हमने उसके लिए पिघले हुए ताँबे का स्रोत बहा दिया - और जिन्नों में से भी कुछ को (उसके वशीभूत कर दिया था,) जो अपने रब की अनुज्ञा से उसके आगे काम करते थे। (हमारा आदेशा था,) "उनमें से जो हमारे हुक्म से फिरेगा उसे हम भडकती आग का मज़ा चखाएँगे।"
يَعْمَلُونَ لَهُ مَا يَشَٓاءُ مِنْ مَحَار۪يبَ وَتَمَاث۪يلَ وَجِفَانٍ كَالْجَوَابِ وَقُدُورٍ رَاسِيَاتٍۜ اِعْمَلُٓوا اٰلَ دَاوُ۫دَ شُكْرًاۜ وَقَل۪يلٌ مِنْ عِبَادِيَ الشَّكُورُ13
वे उसके लिए बनाते, जो कुछ वह चाहता - बड़े-बड़े भवन, प्रतिमाएँ, बड़े हौज़ जैसे थाल और जमी रहनेवाली देगें - "ऐ दाऊद के लोगों! कर्म करो, कृतज्ञता दिखाने रूप में। मेरे बन्दों में कृतज्ञ थोड़े ही हैं।"
فَلَمَّا قَضَيْنَا عَلَيْهِ الْمَوْتَ مَا دَلَّهُمْ عَلٰى مَوْتِه۪ٓ اِلَّا دَٓابَّةُ الْاَرْضِ تَاْكُلُ مِنْسَاَتَهُۚ فَلَمَّا خَرَّ تَبَيَّنَتِ الْجِنُّ اَنْ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ الْغَيْبَ مَا لَبِثُوا فِي الْعَذَابِ الْمُه۪ينِ14
फिर जब हमने उसके लिए मौत का फ़ैसला लागू किया तो फिर उन जिन्नों को उसकी मौत का पता बस भूमि के उस कीड़े ने दिया जो उसकी लाठी को खा रहा था। फिर जब वह गिर पड़ा, तब जिन्नों पर प्रकट हुआ कि यदि वे परोक्ष के जाननेवाले होते तो इस अपमानजनक यातना में पड़े न रहते