43. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

43. पृष्ठ
2 · अल-बक़रा
اَللّٰهُ وَلِيُّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُواۙ يُخْرِجُهُمْ مِنَ الظُّلُمَاتِ اِلَى النُّورِۜ وَالَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اَوْلِيَٓاؤُ۬هُمُ الطَّاغُوتُۙ يُخْرِجُونَهُمْ مِنَ النُّورِ اِلَى الظُّلُمَاتِۜ اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ النَّارِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ۟257
जो लोग ईमान लाते है, अल्लाह उनका रक्षक और सहायक है। वह उन्हें अँधेरों से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाता है। रहे वे लोग जिन्होंने इनकार किया तो उनके संरक्षक बढ़े हुए सरकश है। वे उन्हें प्रकाश से निकालकर अँधेरों की ओर ले जाते है। वही आग (जहन्नम) में पड़नेवाले है। वे उसी में सदैव रहेंगे
اَلَمْ تَرَ اِلَى الَّذ۪ي حَٓاجَّ اِبْرٰه۪يمَ ف۪ي رَبِّه۪ٓ اَنْ اٰتٰيهُ اللّٰهُ الْمُلْكَۢ اِذْ قَالَ اِبْرٰه۪يمُ رَبِّيَ الَّذ۪ي يُحْي۪ وَيُم۪يتُۙ قَالَ اَنَا۬ اُحْي۪ وَاُمِيتُۜ قَالَ اِبْرٰه۪يمُ فَاِنَّ اللّٰهَ يَاْت۪ي بِالشَّمْسِ مِنَ الْمَشْرِقِ فَاْتِ بِهَا مِنَ الْمَغْرِبِ فَبُهِتَ الَّذ۪ي كَفَرَۜ وَاللّٰهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِم۪ينَۚ258
क्या तुमने उनको नहीं देखा, जिसने इबराहीम से उसके 'रब' के सिलसिले में झगड़ा किया था, इस कारण कि अल्लाह ने उसको राज्य दे रखा था? जब इबराहीम ने कहा, "मेरा 'रब' वह है जो जिलाता और मारता है।" उसने कहा, "मैं भी तो जिलाता और मारता हूँ।" इबराहीम ने कहा, "अच्छा तो अल्लाह सूर्य को पूरब से लाता है, तो तू उसे पश्चिम से ले आ।" इसपर वह अधर्मी चकित रह गया। अल्लाह ज़ालिम लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता
اَوْ كَالَّذ۪ي مَرَّ عَلٰى قَرْيَةٍ وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلٰى عُرُوشِهَاۚ قَالَ اَنّٰى يُحْي۪ هٰذِهِ اللّٰهُ بَعْدَ مَوْتِهَاۚ فَاَمَاتَهُ اللّٰهُ مِائَةَ عَامٍ ثُمَّ بَعَثَهُۜ قَالَ كَمْ لَبِثْتَۜ قَالَ لَبِثْتُ يَوْمًا اَوْ بَعْضَ يَوْمٍۜ قَالَ بَلْ لَبِثْتَ مِائَةَ عَامٍ فَانْظُرْ اِلٰى طَعَامِكَ وَشَرَابِكَ لَمْ يَتَسَنَّهْۚ وَانْظُرْ اِلٰى حِمَارِكَ وَلِنَجْعَلَكَ اٰيَةً لِلنَّاسِ وَانْظُرْ اِلَى الْعِظَامِ كَيْفَ نُنْشِزُهَا ثُمَّ نَكْسُوهَا لَحْمًاۜ فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهُۙ قَالَ اَعْلَمُ اَنَّ اللّٰهَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ259
या उस जैसे (व्यक्ति) को नहीं देखा, जिसका एक ऐसी बस्ती पर से गुज़र हुआ, जो अपनी छतों के बल गिरी हुई थी। उसने कहा, "अल्लाह इसके विनष्ट हो जाने के पश्चात इसे किस प्रकार जीवन प्रदान करेगा?" तो अल्लाह ने उसे सौ वर्ष की मृत्यु दे दी, फिर उसे उठा खड़ा किया। कहा, "तू कितनी अवधि तक इस अवस्था नें रहा।" उसने कहा, "मैं एक या दिन का कुछ हिस्सा रहा।" कहा, "नहीं, बल्कि तू सौ वर्ष रहा है। अब अपने खाने और पीने की चीज़ों को देख ले, उन पर समय का कोई प्रभाव नहीं, और अपने गधे को भी देख, और यह इसलिए कह रहे है ताकि हम तुझे लोगों के लिए एक निशानी बना दें और हड्डियों को देख कि किस प्रकार हम उन्हें उभारते है, फिर, उनपर माँस चढ़ाते है।" तो जब वास्तविकता उस पर प्रकट हो गई तो वह पुकार उठा, " मैं जानता हूँ कि अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है।"