431. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

431. पृष्ठ
34 · सबा
وَلَا تَنْفَعُ الشَّفَاعَةُ عِنْدَهُٓ اِلَّا لِمَنْ اَذِنَ لَهُۜ حَتّٰٓى اِذَا فُزِّعَ عَنْ قُلُوبِهِمْ قَالُوا مَاذَاۙ قَالَ رَبُّكُمْۜ قَالُوا الْحَقَّۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْكَب۪يرُ23
और उसके यहाँ कोई सिफ़ारिश काम नहीं आएगी, किन्तु उसी की जिसे उसने (सिफ़ारिश करने की) अनुमति दी हो। यहाँ तक कि जब उनके दिलों से घबराहट दूर हो जाएगी, तो वे कहेंगे, "तुम्हारे रब ने क्या कहा?" वे कहेंगे, "सर्वथा सत्य। और वह अत्यन्त उच्च, महान है।"
قُلْ مَنْ يَرْزُقُكُمْ مِنَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ قُلِ اللّٰهُۙ وَاِنَّٓا اَوْ اِيَّاكُمْ لَعَلٰى هُدًى اَوْ ف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ24
कहो, "कौन तुम्हें आकाशों और धरती में रोज़ी देता है?" कहो, "अल्लाह!" अब अवश्य ही हम है या तुम ही हो मार्ग पर, या खुली गुमराही में
قُلْ لَا تُسْـَٔلُونَ عَمَّٓا اَجْرَمْنَا وَلَا نُسْـَٔلُ عَمَّا تَعْمَلُونَ25
कहो, "जो अपराध हमने किए, उसकी पूछ तुमसे न होगी और न उसकी पूछ हमसे होगी जो तुम कर रहे हो।"
قُلْ يَجْمَعُ بَيْنَنَا رَبُّنَا ثُمَّ يَفْتَحُ بَيْنَنَا بِالْحَقِّۜ وَهُوَ الْفَتَّاحُ الْعَل۪يمُ26
कह दो, "हमारा रब हम सबको इकट्ठा करेगा। फिर हमारे बीच ठीक-ठीक फ़ैसला कर देगा। वही ख़ूब फ़ैसला करनेवाला, अत्यन्त ज्ञानवान है।"
قُلْ اَرُونِيَ الَّذ۪ينَ اَلْحَقْتُمْ بِه۪ شُرَكَٓاءَ كَلَّاۜ بَلْ هُوَ اللّٰهُ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ27
कहो, "मुझे उनको दिखाओ तो, जिनको तुमने साझीदार बनाकर उसके साथ जोड रखा है। कुछ नहीं, बल्कि बही अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।"
وَمَٓا اَرْسَلْنَاكَ اِلَّا كَٓافَّةً لِلنَّاسِ بَش۪يرًا وَنَذ۪يرًا وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ28
हमने तो तुम्हें सारे ही मनुष्यों को शुभ-सूचना देनेवाला और सावधान करनेवाला बनाकर भेजा, किन्तु अधिकतर लोग जानते नहीं
وَيَقُولُونَ مَتٰى هٰذَا الْوَعْدُ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ29
वे कहते है, "यह वादा कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे हो?"
قُلْ لَكُمْ م۪يعَادُ يَوْمٍ لَا تَسْتَاْخِرُونَ عَنْهُ سَاعَةً وَلَا تَسْتَقْدِمُونَ۟30
कह दो, "तुम्हारे लिए एक विशेष दिन की अवधि नियत है, जिससे न एक घड़ी भर पीछे हटोगे और न आगे बढ़ोगे।"
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَنْ نُؤْمِنَ بِهٰذَا الْقُرْاٰنِ وَلَا بِالَّذ۪ي بَيْنَ يَدَيْهِۜ وَلَوْ تَرٰٓى اِذِ الظَّالِمُونَ مَوْقُوفُونَ عِنْدَ رَبِّهِمْۚ يَرْجِعُ بَعْضُهُمْ اِلٰى بَعْضٍۨ الْقَوْلَۚ يَقُولُ الَّذ۪ينَ اسْتُضْعِفُوا لِلَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُوا لَوْلَٓا اَنْتُمْ لَكُنَّا مُؤْمِن۪ينَ31
जिन लोगों ने इनकार किया वे कहते है, "हम इस क़ुरआन को कदापि न मानेंगे और न उसको जो इसके आगे है।" और यदि तुम देख पाते जब ज़ालिम अपने रब के सामने खड़े कर दिए जाएँगे। वे आपस में एक-दूसरे पर इल्ज़ाम डाल रहे होंगे। जो लोग कमज़ोर समझे गए वे उन लोगों से जो बड़े बनते थे कहेंगे, "यदि तुम न होते तो हम अवश्य ही ईमानवाले होते।"