432. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
34 · सबा
قَالَ الَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُوا لِلَّذ۪ينَ اسْتُضْعِفُٓوا اَنَحْنُ صَدَدْنَاكُمْ عَنِ الْهُدٰى بَعْدَ اِذْ جَٓاءَكُمْ بَلْ كُنْتُمْ مُجْرِم۪ينَ32
वे लोग जो बड़े बनते थे उन लोगों से जो कमज़ोर समझे गए थे, कहेंगे, "क्या हमने तुम्हे उस मार्गदर्शन से रोका था, वह तुम्हारे पास आया था? नहीं, बल्कि तुम स्वयं ही अपराधी हो।"
وَقَالَ الَّذ۪ينَ اسْتُضْعِفُوا لِلَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُوا بَلْ مَكْرُ الَّيْلِ وَالنَّهَارِ اِذْ تَاْمُرُونَنَٓا اَنْ نَكْفُرَ بِاللّٰهِ وَنَجْعَلَ لَهُٓ اَنْدَادًاۜ وَاَسَرُّوا النَّدَامَةَ لَمَّا رَاَوُا الْعَذَابَۜ وَجَعَلْنَا الْاَغْلَالَ ف۪ٓي اَعْنَاقِ الَّذ۪ينَ كَفَرُواۜ هَلْ يُجْزَوْنَ اِلَّا مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ33
वे लोग कमज़ोर समझे गए थे बड़े बननेवालों से कहेंगे, "नहीं, बल्कि रात-दिन की मक्कारी थी जब तुम हमसे कहते थे कि हम अल्लाह के साथ कुफ़्र करें और दूसरों को उसका समकक्ष ठहराएँ।" जब वे यातना देखेंगे तो मन ही मन पछताएँगे और हम उन लोगों की गरदनों में जिन्होंने कुफ़्र की नीति अपनाई, तौक़ डाल देंगे। वे वही तो बदले में पाएँगे, जो वे करते रहे थे?
وَمَٓا اَرْسَلْنَا ف۪ي قَرْيَةٍ مِنْ نَذ۪يرٍ اِلَّا قَالَ مُتْرَفُوهَٓاۙ اِنَّا بِمَٓا اُرْسِلْتُمْ بِه۪ كَافِرُونَ34
हमने जिस बस्ती में भी कोई सचेतकर्ता भेजा तो वहाँ के सम्पन्न लोगों ने यही कहा कि "जो कुछ देकर तुम्हें भेजा गया है, हम तो उसको नहीं मानते।"
وَقَالُوا نَحْنُ اَكْثَرُ اَمْوَالًا وَاَوْلَادًاۙ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّب۪ينَ35
उन्होंने यह भी कहा कि "हम तो धन और संतान में तुमसे बढ़कर है और हम यातनाग्रस्त होनेवाले नहीं।"
قُلْ اِنَّ رَبّ۪ي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَنْ يَشَٓاءُ وَيَقْدِرُ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ۟36
कहो, "निस्संदेह मेरा रब जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और जिसे चाहता है नपी-तुली देता है। किन्तु अधिकांश लोग जानते नहीं।"
وَمَٓا اَمْوَالُكُمْ وَلَٓا اَوْلَادُكُمْ بِالَّت۪ي تُقَرِّبُكُمْ عِنْدَنَا زُلْفٰٓى اِلَّا مَنْ اٰمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًاۘ فَاُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ جَزَٓاءُ الضِّعْفِ بِمَا عَمِلُوا وَهُمْ فِي الْغُرُفَاتِ اٰمِنُونَ37
वह चीज़ न तुम्हारे धन है और न तुम्हारी सन्तान, जो तुम्हें हमसे निकट कर दे। अलबता, जो कोई ईमान लाया और उसने अच्छा कर्म किया, तो ऐसे ही लोग है जिनके लिए उसका कई गुना बदला है, जो उन्होंने किया। और वे ऊपरी मंजिल के कक्षों में निश्चिन्तता-पूर्वक रहेंगे
وَالَّذ۪ينَ يَسْعَوْنَ ف۪ٓي اٰيَاتِنَا مُعَاجِز۪ينَ اُو۬لٰٓئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ38
रहे वे लोग जो हमारी आयतों को मात करने के लिए प्रयासरत है, वे लाकर यातनाग्रस्त किए जाएँगे
قُلْ اِنَّ رَبّ۪ي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَنْ يَشَٓاءُ مِنْ عِبَادِه۪ وَيَقْدِرُ لَهُۜ وَمَٓا اَنْفَقْتُمْ مِنْ شَيْءٍ فَهُوَ يُخْلِفُهُۚ وَهُوَ خَيْرُ الرَّازِق۪ينَ39
कह दो, "मेरा रब ही है जो अपने बन्दों में से जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और जिसके लिए चाहता है नपी-तुली कर देता है। और जो कुछ भी तुमने ख़र्च किया, उसकी जगह वह तुम्हें और देगा। वह सबसे अच्छा रोज़ी देनेवाला है।"