436. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

436. पृष्ठ
35 · फ़ातिर
وَمَا يَسْتَوِي الْبَحْرَانِۗ هٰذَا عَذْبٌ فُرَاتٌ سَٓائِغٌ شَرَابُهُ وَهٰذَا مِلْحٌ اُجَاجٌۜ وَمِنْ كُلٍّ تَاْكُلُونَ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُونَ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَاۚ وَتَرَى الْفُلْكَ ف۪يهِ مَوَاخِرَ لِتَبْتَغُوا مِنْ فَضْلِه۪ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ12
दोनों सागर समान नहीं, यह मीठा सुस्वाद है जिससे प्यास जाती रहे, पीने में रुचिकर। और यह खारा-कडुवा है। और तुम प्रत्येक में से तरोताज़ा माँस खाते हो और आभूषण निकालते हो, जिसे तुम पहनते हो। और तुम नौकाओं को देखते हो कि चीरती हुई उसमें चली जा रही हैं, ताकि तुम उसका उदार अनुग्रह तलाश करो और कदाचित तुम आभारी बनो
يُولِجُ الَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي الَّيْلِۙ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَۘ كُلٌّ يَجْر۪ي لِاَجَلٍ مُسَمًّىۜ ذٰلِكُمُ اللّٰهُ رَبُّكُمْ لَهُ الْمُلْكُۜ وَالَّذ۪ينَ تَدْعُونَ مِنْ دُونِه۪ مَا يَمْلِكُونَ مِنْ قِطْم۪يرٍۜ13
वह रात को दिन में प्रविष्ट करता है और दिन को रात में प्रविष्ट करता हैं। उसने सूर्य और चन्द्रमा को काम में लगा रखा है। प्रत्येक एक नियत समय पूरी करने के लिए चल रहा है। वही अल्लाह तुम्हारा रब है। उसी की बादशाही है। उससे हटकर जिनको तुम पुकारते हो वे एक तिनके के भी मालिक नहीं
اِنْ تَدْعُوهُمْ لَا يَسْمَعُوا دُعَٓاءَكُمْۚ وَلَوْ سَمِعُوا مَا اسْتَجَابُوا لَكُمْۜ وَيَوْمَ الْقِيٰمَةِ يَكْفُرُونَ بِشِرْكِكُمْۜ وَلَا يُنَبِّئُكَ مِثْلُ خَب۪يرٍ۟14
यदि तुम उन्हें पुकारो तो वे तुम्हारी पुकार सुनेगे नहीं। और यदि वे सुनते तो भी तुम्हारी याचना स्वीकार न कर सकते और क़ियामत के दिन वे तुम्हारे साझी ठहराने का इनकार कर देंगे। पूरी ख़बर रखनेवाला (अल्लाह) की तरह तुम्हें कोई न बताएगा
يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ اَنْتُمُ الْفُقَرَٓاءُ اِلَى اللّٰهِۚ وَاللّٰهُ هُوَ الْغَنِيُّ الْحَم۪يدُ15
ऐ लोगों! तुम्ही अल्लाह के मुहताज हो और अल्लाह तो निस्पृह, स्वप्रशंसित है
اِنْ يَشَاْ يُذْهِبْكُمْ وَيَاْتِ بِخَلْقٍ جَد۪يدٍۚ16
यदि वह चाहे तो तुम्हें हटा दे और एक नई संसृति ले आए
وَمَا ذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ بِعَز۪يزٍ17
और यह अल्लाह के लिए कुछ भी कठिन नहीं
وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ اُخْرٰىۜ وَاِنْ تَدْعُ مُثْقَلَةٌ اِلٰى حِمْلِهَا لَا يُحْمَلْ مِنْهُ شَيْءٌ وَلَوْ كَانَ ذَا قُرْبٰىۜ اِنَّمَا تُنْذِرُ الَّذ۪ينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ بِالْغَيْبِ وَاَقَامُوا الصَّلٰوةَۜ وَمَنْ تَزَكّٰى فَاِنَّمَا يَتَزَكّٰى لِنَفْسِه۪ۜ وَاِلَى اللّٰهِ الْمَص۪يرُ18
कोई बोझ उठानेवाला किसी दूसरे का बोझ न उठाएगा। और यदि कोई कोई से दबा हुआ व्यक्ति अपना बोझ उठाने के लिए पुकारे तो उसमें से कुछ भी न उठाया, यद्यपि वह निकट का सम्बन्धी ही क्यों न हो। तुम तो केवल सावधान कर रहे हो। जो परोक्ष में रहते हुए अपने रब से डरते हैं और नमाज़ के पाबन्द हो चुके है (उनकी आत्मा का विकास हो गया) । और जिसने स्वयं को विकसित किया वह अपने ही भले के लिए अपने आपको विकसित करेगा। और पलटकर जाना तो अल्लाह ही की ओर है