438. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
35 · फ़ातिर
وَالَّذ۪ٓي اَوْحَيْنَٓا اِلَيْكَ مِنَ الْكِتَابِ هُوَ الْحَقُّ مُصَدِّقًا لِمَا بَيْنَ يَدَيْهِۜ اِنَّ اللّٰهَ بِعِبَادِه۪ لَخَب۪يرٌ بَص۪يرٌ31
जो किताब हमने तुम्हारी ओर प्रकाशना द्वारा भेजी है, वही सत्य है। अपने से पहले (की किताबों) की पुष्टि में है। निश्चय ही अल्लाह अपने बन्दों की ख़बर पूरी रखनेवाला, देखनेवाला है
ثُمَّ اَوْرَثْنَا الْكِتَابَ الَّذ۪ينَ اصْطَفَيْنَا مِنْ عِبَادِنَاۚ فَمِنْهُمْ ظَالِمٌ لِنَفْسِه۪ۚ وَمِنْهُمْ مُقْتَصِدٌۚ وَمِنْهُمْ سَابِقٌ بِالْخَيْرَاتِ بِاِذْنِ اللّٰهِۜ ذٰلِكَ هُوَ الْفَضْلُ الْكَب۪يرُۜ32
फिर हमने इस किताब का उत्तराधिकारी उन लोगों को बनाया, जिन्हें हमने अपने बन्दो में से चुन लिया है। अब कोई तो उनमें से अपने आप पर ज़ुल्म करता है और कोई उनमें से मध्य श्रेणी का है और कोई उनमें से अल्लाह के कृपायोग से भलाइयों में अग्रसर है। यही है बड़ी श्रेष्ठता। -
جَنَّاتُ عَدْنٍ يَدْخُلُونَهَا يُحَلَّوْنَ ف۪يهَا مِنْ اَسَاوِرَ مِنْ ذَهَبٍ وَلُؤْلُؤً۬اۚ وَلِبَاسُهُمْ ف۪يهَا حَر۪يرٌ33
सदैव रहने के बाग है, जिनमें वे प्रवेश करेंगे। वहाँ उन्हें सोने के कंगनों और मोती से आभूषित किया जाएगा। और वहाँ उनका वस्त्र रेशम होगा
وَقَالُوا الْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذ۪ٓي اَذْهَبَ عَنَّا الْحَزَنَۜ اِنَّ رَبَّنَا لَغَفُورٌ شَكُورٌۙ34
और वे कहेंगे, "सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमसे ग़म दूर कर दिया। निश्चय ही हमारा रब अत्यन्त क्षमाशील, बड़ा गुणग्राहक है
اَلَّذ۪ٓي اَحَلَّنَا دَارَ الْمُقَامَةِ مِنْ فَضْلِه۪ۚ لَا يَمَسُّنَا ف۪يهَا نَصَبٌ وَلَا يَمَسُّنَا ف۪يهَا لُغُوبٌ35
जिसने हमें अपने उदार अनुग्रह से रहने के ऐसे घर में उतारा जहाँ न हमें कोई मशक़्क़त उठानी पड़ती है और न हमें कोई थकान ही आती है।"
وَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَهُمْ نَارُ جَهَنَّمَۚ لَا يُقْضٰى عَلَيْهِمْ فَيَمُوتُوا وَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُمْ مِنْ عَذَابِهَاۜ كَذٰلِكَ نَجْز۪ي كُلَّ كَفُورٍۚ36
रहे वे लोग जिन्होंने इनकार किया, उनके लिए जहन्नम की आग है, न उनका काम तमाम किया जाएगा कि मर जाएँ और न उनसे उसकी यातना ही कुछ हल्की की जाएगी। हम ऐसा ही बदला प्रत्येक अकृतज्ञ को देते है
وَهُمْ يَصْطَرِخُونَ ف۪يهَاۚ رَبَّنَٓا اَخْرِجْنَا نَعْمَلْ صَالِحًا غَيْرَ الَّذ۪ي كُنَّا نَعْمَلُۜ اَوَلَمْ نُعَمِّرْكُمْ مَا يَتَذَكَّرُ ف۪يهِ مَنْ تَذَكَّرَ وَجَٓاءَكُمُ النَّذ۪يرُۜ فَذُوقُوا فَمَا لِلظَّالِم۪ينَ مِنْ نَص۪يرٍ۟37
वे वहाँ चिल्लाएँगे कि "ऐ हमारे रब! हमें निकाल ले। हम अच्छा कर्म करेंगे, उससे भिन्न जो हम करते रहे।" "क्या हमने तुम्हें इतनी आयु नहीं दी कि जिसमें कोई होश में आना चाहता तो होश में आ जाता? और तुम्हारे पास सचेतकर्ता भी आया था, तो अब मज़ा चखते रहो! ज़ालिमोंं को कोई सहायक नहीं!"
اِنَّ اللّٰهَ عَالِمُ غَيْبِ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ اِنَّهُ عَل۪يمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ38
निस्संदेह अल्लाह आकाशों और धरती की छिपी बात को जानता है। वह तो सीनो तक की बात जानता है