439. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
35 · फ़ातिर
هُوَ الَّذ۪ي جَعَلَكُمْ خَلَٓائِفَ فِي الْاَرْضِۜ فَمَنْ كَفَرَ فَعَلَيْهِ كُفْرُهُۜ وَلَا يَز۪يدُ الْكَافِر۪ينَ كُفْرُهُمْ عِنْدَ رَبِّهِمْ اِلَّا مَقْتًاۚ وَلَا يَز۪يدُ الْكَافِر۪ينَ كُفْرُهُمْ اِلَّا خَسَارًا39
वही तो है जिसने तुम्हे धरती में ख़लीफ़ा बनाया। अब तो कोई इनकार करेगा, उसके इनकार का वबाल उसी पर है। इनकार करनेवालों का इनकार उनके रब के यहाँ केवल प्रकोप ही को बढ़ाता है, और इनकार करनेवालों का इनकार केवल घाटे में ही अभिवृद्धि करता है
قُلْ اَرَاَيْتُمْ شُرَكَٓاءَكُمُ الَّذ۪ينَ تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِۜ اَرُون۪ي مَاذَا خَلَقُوا مِنَ الْاَرْضِ اَمْ لَهُمْ شِرْكٌ فِي السَّمٰوَاتِۚ اَمْ اٰتَيْنَاهُمْ كِتَابًا فَهُمْ عَلٰى بَيِّنَتٍ مِنْهُۚ بَلْ اِنْ يَعِدُ الظَّالِمُونَ بَعْضُهُمْ بَعْضًا اِلَّا غُرُورًا40
कहो, "क्या तुमने अपने ठहराए हुए साझीदारो का अवलोकन भी किया, जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पुकारते हो? मुझे दिखाओ उन्होंने धरती का कौन-सा भाग पैदा किया है या आकाशों में उनकी कोई भागीदारी है?" या हमने उन्हें कोई किताब ही है कि उसका कोई स्पष्ट प्रमाण उनके पक्ष में हो? नहीं, बल्कि वे ज़ालिम आपस में एक-दूसरे से केवल धोखे का वादा कर रहे है
اِنَّ اللّٰهَ يُمْسِكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ اَنْ تَزُولَاۚ وَلَئِنْ زَالَتَٓا اِنْ اَمْسَكَهُمَا مِنْ اَحَدٍ مِنْ بَعْدِه۪ۜ اِنَّهُ كَانَ حَل۪يمًا غَفُورًا41
अल्लाह ही आकाशों और धरती को थामे हुए है कि वे टल न जाएँ और यदि वे टल जाएँ तो उसके पश्चात कोई भी नहीं जो उन्हें थाम सके। निस्संदेह, वह बहुत सहनशील, क्षमा करनेवाला है
وَاَقْسَمُوا بِاللّٰهِ جَهْدَ اَيْمَانِهِمْ لَئِنْ جَٓاءَهُمْ نَذ۪يرٌ لَيَكُونُنَّ اَهْدٰى مِنْ اِحْدَى الْاُمَمِۚ فَلَمَّا جَٓاءَهُمْ نَذ۪يرٌ مَا زَادَهُمْ اِلَّا نُفُورًاۙ42
उन्होंने अल्लाह की कड़ी-कड़ी क़समें खाई थी कि यदि उनके पास कोई सचेतकर्ता आए तो वे समुदायों में से प्रत्येक से बढ़कर सीधे मार्ग पर होंगे। किन्तु जब उनके पास एक सचेतकर्ता आ गया तो इस चीज़ ने धरती में उनके घमंड और बुरी चालों के कारण उनकी नफ़रत ही में अभिवृद्धि की,
اِسْتِكْبَارًا فِي الْاَرْضِ وَمَكْرَ السَّيِّئِۜ وَلَا يَح۪يقُ الْمَكْرُ السَّيِّئُ اِلَّا بِاَهْلِه۪ۜ فَهَلْ يَنْظُرُونَ اِلَّا سُنَّتَ الْاَوَّل۪ينَۚ فَلَنْ تَجِدَ لِسُنَّتِ اللّٰهِ تَبْد۪يلًاۚ وَلَنْ تَجِدَ لِسُنَّتِ اللّٰهِ تَحْو۪يلًا43
हालाँकि बुरी चाल अपने ही लोगों को घेर लेती है। तो अब क्या जो रीति अगलों के सिलसिले में रही है वे बस उसी रीति की प्रतिक्षा कर रहे है? तो तुम अल्लाह की रीति में कदापि कोई परिवर्तन न पाओगे और न तुम अल्लाह की रीति को कभी टलते ही पाओगे
اَوَلَمْ يَس۪يرُوا فِي الْاَرْضِ فَيَنْظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْ وَكَانُٓوا اَشَدَّ مِنْهُمْ قُوَّةًۜ وَمَا كَانَ اللّٰهُ لِيُعْجِزَهُ مِنْ شَيْءٍ فِي السَّمٰوَاتِ وَلَا فِي الْاَرْضِۜ اِنَّهُ كَانَ عَل۪يمًا قَد۪يرًا44
क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते कि उन लोगों का कैसा परिणाम हुआ है जो उनसे पहले गुज़रे हैं? हालाँकि वे शक्ति में उनसे कही बढ़-चढ़कर थे। अल्लाह ऐसा नहीं कि आकाशों में कोई चीज़ उसे मात कर सके और न धरती ही में। निस्संदेह वह सर्वज्ञ, सामर्थ्यमान है