44. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

44. पृष्ठ
2 · अल-बक़रा
وَاِذْ قَالَ اِبْرٰه۪يمُ رَبِّ اَرِن۪ي كَيْفَ تُحْيِ الْمَوْتٰىۜ قَالَ اَوَلَمْ تُؤْمِنْۜ قَالَ بَلٰى وَلٰكِنْ لِيَطْمَئِنَّ قَلْب۪يۜ قَالَ فَخُذْ اَرْبَعَةً مِنَ الطَّيْرِ فَصُرْهُنَّ اِلَيْكَ ثُمَّ اجْعَلْ عَلٰى كُلِّ جَبَلٍ مِنْهُنَّ جُزْءًا ثُمَّ ادْعُهُنَّ يَاْت۪ينَكَ سَعْيًاۜ وَاعْلَمْ اَنَّ اللّٰهَ عَز۪يزٌ حَك۪يمٌ۟260
और याद करो जब इबराहीम ने कहा, "ऐ मेरे रब! मुझे दिखा दे, तू मुर्दों को कैसे जीवित करेगा?" कहा," क्या तुझे विश्वास नहीं?" उसने कहा,"क्यों नहीं, किन्तु निवेदन इसलिए है कि मेरा दिल संतुष्ट हो जाए।" कहा, "अच्छा, तो चार पक्षी ले, फिर उन्हें अपने साथ भली-भाँति हिला-मिला से, फिर उनमें से प्रत्येक को एक-एक पर्वत पर रख दे, फिर उनको पुकार, वे तेरे पास लपककर आएँगे। और जान ले कि अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।"
مَثَلُ الَّذ۪ينَ يُنْفِقُونَ اَمْوَالَهُمْ ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ كَمَثَلِ حَبَّةٍ اَنْبَتَتْ سَبْعَ سَنَابِلَ ف۪ي كُلِّ سُنْبُلَةٍ مِائَةُ حَبَّةٍۜ وَاللّٰهُ يُضَاعِفُ لِمَنْ يَشَٓاءُۜ وَاللّٰهُ وَاسِعٌ عَل۪يمٌ261
जो लोग अपने माल अल्लाह के मार्ग में ख़र्च करते है, उनकी उपमा ऐसी है, जैसे एक दाना हो, जिससे सात बालें निकलें और प्रत्येक बाल में सौ दाने हो। अल्लाह जिसे चाहता है बढ़ोतरी प्रदान करता है। अल्लाह बड़ी समाईवाला, जाननेवाला है
اَلَّذ۪ينَ يُنْفِقُونَ اَمْوَالَهُمْ ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ ثُمَّ لَا يُتْبِعُونَ مَٓا اَنْفَقُوا مَنًّا وَلَٓا اَذًۙى لَهُمْ اَجْرُهُمْ عِنْدَ رَبِّهِمْۚ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ262
जो लोग अपने माल अल्लाह के मार्ग में ख़र्च करते है, फिर ख़र्च करके उसका न एहसान जताते है और न दिल दुखाते है, उनका बदला उनके अपने रब के पास है। और न तो उनके लिए कोई भय होगा और न वे दुखी होंगे
قَوْلٌ مَعْرُوفٌ وَمَغْفِرَةٌ خَيْرٌ مِنْ صَدَقَةٍ يَتْبَعُهَٓا اَذًىۜ وَاللّٰهُ غَنِيٌّ حَل۪يمٌ263
एक भली बात कहनी और क्षमा से काम लेना उस सदक़े से अच्छा है, जिसके पीछे दुख हो। और अल्लाह अत्यन्कृत निस्पृह (बेनियाज़), सहनशील है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تُبْطِلُوا صَدَقَاتِكُمْ بِالْمَنِّ وَالْاَذٰىۙ كَالَّذ۪ي يُنْفِقُ مَالَهُ رِئَٓاءَ النَّاسِ وَلَا يُؤْمِنُ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِۜ فَمَثَلُهُ كَمَثَلِ صَفْوَانٍ عَلَيْهِ تُرَابٌ فَاَصَابَهُ وَابِلٌ فَتَرَكَهُ صَلْدًاۜ لَا يَقْدِرُونَ عَلٰى شَيْءٍ مِمَّا كَسَبُواۜ وَاللّٰهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِر۪ينَ264
ऐ ईमानवालो! अपने सदक़ो को एहसान जताकर और दुख देकर उस व्यक्ति की तरह नष्ट न करो जो लोगों को दिखाने के लिए अपना माल ख़र्च करता है और अल्लाह और अंतिम दिन पर ईमान नहीं रखता। तो उसकी हालत उस चट्टान जैसी है जिसपर कुछ मिट्टी पड़ी हुई थी, फिर उस पर ज़ोर की वर्षा हुई और उसे साफ़ चट्टान की दशा में छोड़ गई। ऐसे लोग अपनी कमाई कुछ भी प्राप्त नहीं करते। और अल्लाह इनकार की नीति अपनानेवालों को मार्ग नहीं दिखाता