441. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
36 · यासीन
وَاضْرِبْ لَهُمْ مَثَلًا اَصْحَابَ الْقَرْيَةِۢ اِذْ جَٓاءَهَا الْمُرْسَلُونَۚ13
उनके लिए बस्तीवालों की एक मिसाल पेश करो, जबकि वहाँ भेजे हुए दूत आए
اِذْ اَرْسَلْنَٓا اِلَيْهِمُ اثْنَيْنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزْنَا بِثَالِثٍ فَقَالُٓوا اِنَّٓا اِلَيْكُمْ مُرْسَلُونَ14
जबकि हमने उनकी ओर दो दूत भेजे, तो उन्होंने झुठला दिया। तब हमने तीसरे के द्वारा शक्ति पहुँचाई, तो उन्होंने कहा, "हम तुम्हारी ओर भेजे गए हैं।"
قَالُوا مَٓا اَنْتُمْ اِلَّا بَشَرٌ مِثْلُنَاۙ وَمَٓا اَنْزَلَ الرَّحْمٰنُ مِنْ شَيْءٍۙ اِنْ اَنْتُمْ اِلَّا تَكْذِبُونَ15
वे बोले, "तुम तो बस हमारे ही जैसे मनुष्य हो। रहमान ने तो कोई भी चीज़ अवतरित नहीं की है। तुम केवल झूठ बोलते हो।"
قَالُوا رَبُّنَا يَعْلَمُ اِنَّٓا اِلَيْكُمْ لَمُرْسَلُونَ16
उन्होंने कहा, "हमारा रब जानता है कि हम निश्चय ही तुम्हारी ओर भेजे गए है
وَمَا عَلَيْنَٓا اِلَّا الْبَلَاغُ الْمُب۪ينُ17
औऱ हमारी ज़िम्मेदारी तो केवल स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचा देने की हैं।"
قَالُٓوا اِنَّا تَطَيَّرْنَا بِكُمْۚ لَئِنْ لَمْ تَنْتَهُوا لَنَرْجُمَنَّكُمْ وَلَيَمَسَّنَّكُمْ مِنَّا عَذَابٌ اَل۪يمٌ18
वे बोले, "हम तो तुम्हें अपशकुन समझते है, यदि तुम बाज न आए तो हम तुम्हें पथराव करके मार डालेंगे और तुम्हें अवश्य हमारी ओर से दुखद यातना पहुँचेगी।"
قَالُوا طَٓائِرُكُمْ مَعَكُمْۜ اَئِنْ ذُكِّرْتُمْۜ بَلْ اَنْتُمْ قَوْمٌ مُسْرِفُونَ19
उन्होंने कहा, "तुम्हारा अवशकुन तो तुम्हारे अपने ही साथ है। क्या यदि तुम्हें याददिहानी कराई जाए (तो यह कोई क्रुद्ध होने की बात है)? नहीं, बल्कि तुम मर्यादाहीन लोग हो।"
وَجَٓاءَ مِنْ اَقْصَا الْمَد۪ينَةِ رَجُلٌ يَسْعٰى قَالَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُوا الْمُرْسَل۪ينَۙ20
इतने में नगर के दूरवर्ती सिरे से एक व्यक्ति दौड़ता हुआ आया। उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! उनका अनुवर्तन करो, जो भेजे गए है।
اِتَّبِعُوا مَنْ لَا يَسْـَٔلُكُمْ اَجْرًا وَهُمْ مُهْتَدُونَ21
उसका अनुवर्तन करो जो तुमसे कोई बदला नहीं माँगते और वे सीधे मार्ग पर है
وَمَا لِيَ لَٓا اَعْبُدُ الَّذ۪ي فَطَرَن۪ي وَاِلَيْهِ تُرْجَعُونَ22
"और मुझे क्या हुआ है कि मैं उसकी बन्दगी न करूँ, जिसने मुझे पैदा किया और उसी की ओर तुम्हें लौटकर जाना है?
ءَاَتَّخِذُ مِنْ دُونِه۪ٓ اٰلِهَةً اِنْ يُرِدْنِ الرَّحْمٰنُ بِضُرٍّ لَا تُغْنِ عَنّ۪ي شَفَاعَتُهُمْ شَيْـًٔا وَلَا يُنْقِذُونِۚ23
"क्या मैं उससे इतर दूसरे उपास्य बना लूँ? यदि रहमान मुझे कोई तकलीफ़ पहुँचाना चाहे तो उनकी सिफ़ारिश मेरे कुछ काम नहीं आ सकती और न वे मुझे छुडा ही सकते है
اِنّ۪ٓي اِذًا لَف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ24
"तब तो मैं अवश्य स्पष्ट गुमराही में पड़ जाऊँगा
اِنّ۪ٓي اٰمَنْتُ بِرَبِّكُمْ فَاسْمَعُونِۜ25
"मैं तो तुम्हारे रब पर ईमान ले आया, अतः मेरी सुनो!"
ق۪يلَ ادْخُلِ الْجَنَّةَۜ قَالَ يَا لَيْتَ قَوْم۪ي يَعْلَمُونَۙ26
कहा गया, "प्रवेश करो जन्नत में!" उसने कहा, "ऐ काश! मेरी क़ौम के लोग जानते
بِمَا غَفَرَ ل۪ي رَبّ۪ي وَجَعَلَن۪ي مِنَ الْمُكْرَم۪ينَ27
कि मेरे रब ने मुझे क्षमा कर दिया और मुझे प्रतिष्ठित लोगों में सम्मिलित कर दिया।"