45. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
2 · अल-बक़रा
وَمَثَلُ الَّذ۪ينَ يُنْفِقُونَ اَمْوَالَهُمُ ابْتِغَٓاءَ مَرْضَاتِ اللّٰهِ وَتَثْب۪يتًا مِنْ اَنْفُسِهِمْ كَمَثَلِ جَنَّةٍ بِرَبْوَةٍ اَصَابَهَا وَابِلٌ فَاٰتَتْ اُكُلَهَا ضِعْفَيْنِۚ فَاِنْ لَمْ يُصِبْهَا وَابِلٌ فَطَلٌّۜ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَص۪يرٌ265
और जो लोग अपने माल अल्लाह की प्रसन्नता के संसाधनों की तलब में और अपने दिलों को जमाव प्रदान करने के कारण ख़र्च करते है उनकी हालत उस बाग़़ की तरह है जो किसी अच्छी और उर्वर भूमि पर हो। उस पर घोर वर्षा हुई तो उसमें दुगुने फल आए। फिर यदि घोर वर्षा उस पर नहीं हुई, तो फुहार ही पर्याप्त होगी। तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसे देख रहा है
اَيَوَدُّ اَحَدُكُمْ اَنْ تَكُونَ لَهُ جَنَّةٌ مِنْ نَخ۪يلٍ وَاَعْنَابٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُۙ لَهُ ف۪يهَا مِنْ كُلِّ الثَّمَرَاتِۙ وَاَصَابَهُ الْكِبَرُ وَلَهُ ذُرِّيَّةٌ ضُعَفَٓاءُۖ فَاَصَابَهَٓا اِعْصَارٌ ف۪يهِ نَارٌ فَاحْتَرَقَتْۜ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللّٰهُ لَكُمُ الْاٰيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَتَفَكَّرُونَ۟266
क्या तुममें से कोई यह चाहेगा कि उसके पास ख़जूरों और अंगूरों का एक बाग़ हो, जिसके नीचे नहरें बह रही हो, वहाँ उसे हर प्रकार के फल प्राप्त हो और उसका बुढ़ापा आ गया हो और उसके बच्चे अभी कमज़ोर ही हों कि उस बाग़ पर एक आग भरा बगूला आ गया, और वह जलकर रह गया? इस प्रकार अल्लाह तुम्हारे सामने आयतें खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि सोच-विचार करो
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اَنْفِقُوا مِنْ طَيِّبَاتِ مَا كَسَبْتُمْ وَمِمَّٓا اَخْرَجْنَا لَكُمْ مِنَ الْاَرْضِۖ وَلَا تَيَمَّمُوا الْخَب۪يثَ مِنْهُ تُنْفِقُونَ وَلَسْتُمْ بِاٰخِذ۪يهِ اِلَّٓا اَنْ تُغْمِضُوا ف۪يهِۜ وَاعْلَمُٓوا اَنَّ اللّٰهَ غَنِيٌّ حَم۪يدٌ267
ऐ ईमान लानेवालो! अपनी कमाई को पाक और अच्छी चीज़ों में से ख़र्च करो और उन चीज़ों में से भी जो हमने धरती से तुम्हारे लिए निकाली है। और देने के लिए उसके ख़राब हिस्से (के देने) का इरादा न करो, जबकि तुम स्वयं उसे कभी न लोगे। यह और बात है कि उसको लेने में देखी-अनदेखी कर जाओ। और जान लो कि अल्लाह निस्पृह, प्रशंसनीय है
اَلشَّيْطَانُ يَعِدُكُمُ الْفَقْرَ وَيَاْمُرُكُمْ بِالْفَحْشَٓاءِۚ وَاللّٰهُ يَعِدُكُمْ مَغْفِرَةً مِنْهُ وَفَضْلًاۜ وَاللّٰهُ وَاسِعٌ عَل۪يمٌۚ268
शैतान तुम्हें निर्धनता से डराता है और निर्लज्जता के कामों पर उभारता है, जबकि अल्लाह अपनी क्षमा और उदार कृपा का तुम्हें वचन देता है। अल्लाह बड़ी समाईवाला, सर्वज्ञ है
يُؤْتِي الْحِكْمَةَ مَنْ يَشَٓاءُۚ وَمَنْ يُؤْتَ الْحِكْمَةَ فَقَدْ اُو۫تِيَ خَيْرًا كَث۪يرًاۜ وَمَا يَذَّكَّرُ اِلَّٓا اُو۬لُوا الْاَلْبَابِ269
वह जिसे चाहता है तत्वदर्शिता प्रदान करता है और जिसे तत्वदर्शिता प्राप्त हुई उसे बड़ी दौलत मिल गई। किन्तु चेतते वही है जो बुद्धि और समझवाले है