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453. पृष्ठ
38 · साद
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
صٓ وَالْقُرْاٰنِ ذِي الذِّكْرِۜ1
साद। क़सम है, याददिहानी-वाले क़ुरआन की (जिसमें कोई कमी नहीं कि धर्मविरोधी सत्य को न समझ सकें)
بَلِ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا ف۪ي عِزَّةٍ وَشِقَاقٍ2
बल्कि जिन्होंने इनकार किया वे गर्व और विरोध में पड़े हुए है
كَمْ اَهْلَكْنَا مِنْ قَبْلِهِمْ مِنْ قَرْنٍ فَنَادَوْا وَلَاتَ ح۪ينَ مَنَاصٍ3
उनसे पहले हमने कितनी ही पीढ़ियों को विनष्ट किया, तो वे लगे पुकारने। किन्तु वह समय हटने-बचने का न था
وَعَجِبُٓوا اَنْ جَٓاءَهُمْ مُنْذِرٌ مِنْهُمْۘ وَقَالَ الْكَافِرُونَ هٰذَا سَاحِرٌ كَذَّابٌۚ4
उन्होंने आश्चर्य किया इसपर कि उनके पास उन्हीं में से एक सचेतकर्ता आया और इनकार करनेवाले कहने लगे, "यह जादूगर है बड़ा झूठा
اَجَعَلَ الْاٰلِهَةَ اِلٰهًا وَاحِدًاۚ اِنَّ هٰذَا لَشَيْءٌ عُجَابٌ5
क्या उसने सारे उपास्यों को अकेला एक उपास्य ठहरा दिया? निस्संदेह यह तो बहुत अचम्भेवाली चीज़ है!"
وَانْطَلَقَ الْمَلَاُ مِنْهُمْ اَنِ امْشُوا وَاصْبِرُوا عَلٰٓى اٰلِهَتِكُمْۚ اِنَّ هٰذَا لَشَيْءٌ يُرَادُۚ6
और उनके सरदार (यह कहते हुए) चल खड़े हुए कि "चलते रहो और अपने उपास्यों पर जमें रहो। निस्संदेह यह वांछिच चीज़ है
مَا سَمِعْنَا بِهٰذَا فِي الْمِلَّةِ الْاٰخِرَةِۚ اِنْ هٰذَٓا اِلَّا اخْتِلَاقٌۚ7
यह बात तो हमने पिछले धर्म में सुनी ही नहीं। यह तो बस मनघड़त है
ءَاُنْزِلَ عَلَيْهِ الذِّكْرُ مِنْ بَيْنِنَاۜ بَلْ هُمْ ف۪ي شَكٍّ مِنْ ذِكْر۪يۚ بَلْ لَمَّا يَذُوقُوا عَذَابِۜ8
क्या हम सबमें से (चुनकर) इसी पर अनुस्मृति अवतरित हुई है?" नहीं, बल्कि वे मेरी अनुस्मृति के विषय में संदेह में है, बल्कि उन्होंने अभी तक मेरी यातना का मज़ा चखा ही नहीं है
اَمْ عِنْدَهُمْ خَزَٓائِنُ رَحْمَةِ رَبِّكَ الْعَز۪يزِ الْوَهَّابِۚ9
या, तेरे प्रभुत्वशाली, बड़े दाता रब की दयालुता के ख़ज़ाने उनके पास है?
اَمْ لَهُمْ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا۠ فَلْيَرْتَقُوا فِي الْاَسْبَابِ10
या, आकाशों और धरती और जो कुछ उनके बीच है, उन सबकी बादशाही उन्हीं की है? फिर तो चाहिए कि वे रस्सियों द्वारा ऊपर चढ़ जाए
جُنْدٌ مَا هُنَالِكَ مَهْزُومٌ مِنَ الْاَحْزَابِ11
वह एक साधारण सेना है (विनष्ट होनेवाले) दलों में से, वहाँ मात खाना जिसकी नियति है
كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَفِرْعَوْنُ ذُو الْاَوْتَادِۙ12
उनसे पहले नूह की क़ौम और आद और मेखोंवाले फ़िरऔन ने झुठलाया
وَثَمُودُ وَقَوْمُ لُوطٍ وَاَصْحَابُ لْـَٔيْكَةِۜ اُو۬لٰٓئِكَ الْاَحْزَابُ13
और समूद और लूत की क़ौम और 'ऐकावाले' भी, ये है वे दल
اِنْ كُلٌّ اِلَّا كَذَّبَ الرُّسُلَ فَحَقَّ عِقَابِ۟14
उनमें से प्रत्येक ने रसूलों को झुठलाया, तो मेरी ओर से दंड अवश्यम्भावी होकर रहा
وَمَا يَنْظُرُ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ اِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً مَا لَهَا مِنْ فَوَاقٍ15
इन्हें बस एक चीख की प्रतीक्षा है जिसमें तनिक भी अवकाश न होगा
وَقَالُوا رَبَّنَا عَجِّلْ لَنَا قِطَّنَا قَبْلَ يَوْمِ الْحِسَابِ16
वे कहते है, "ऐ हमारे रब! हिसाब के दिन से पहले ही शीघ्र हमारा हिस्सा दे दे।"