456. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
38 · साद
وَوَهَبْنَا لَهُٓ اَهْلَهُ وَمِثْلَهُمْ مَعَهُمْ رَحْمَةً مِنَّا وَذِكْرٰى لِاُو۬لِي الْاَلْبَابِ43
और हमने उसे उसके परिजन दिए और उनके साथ वैसे ही और भी; अपनी ओर से दयालुता के रूप में और बुद्धि और समझ रखनेवालों के लिए शिक्षा के रूप में।
وَخُذْ بِيَدِكَ ضِغْثًا فَاضْرِبْ بِه۪ وَلَا تَحْنَثْۜ اِنَّا وَجَدْنَاهُ صَابِرًاۜ نِعْمَ الْعَبْدُۜ اِنَّهُٓ اَوَّابٌ44
"और अपने हाथ में तिनकों का एक मुट्ठा ले और उससे मार और अपनी क़सम न तोड़।" निश्चय ही हमने उसे धैर्यवान पाया, क्या ही अच्छा बन्दा! निस्संदेह वह बड़ा ही रुजू रहनेवाला था
وَاذْكُرْ عِبَادَنَٓا اِبْرٰه۪يمَ وَاِسْحٰقَ وَيَعْقُوبَ اُو۬لِي الْاَيْد۪ي وَالْاَبْصَارِ45
हमारे बन्दों, इबराहीम और इसहाक़ और याक़ूब को भी याद करो, जो हाथों (शक्ति) और निगाहोंवाले (ज्ञान-चक्षुवाले) थे
اِنَّٓا اَخْلَصْنَاهُمْ بِخَالِصَةٍ ذِكْرَى الدَّارِۚ46
निस्संदेह हमने उन्हें एक विशिष्ट बात के लिए चुन लिया था और वह वास्तविक घर (आख़िरत) की याद थी
وَاِنَّهُمْ عِنْدَنَا لَمِنَ الْمُصْطَفَيْنَ الْاَخْيَارِ47
और निश्चय ही वे हमारे यहाँ चुने हुए नेक लोगों में से है
وَاذْكُرْ اِسْمٰع۪يلَ وَالْيَسَعَ وَذَا الْكِفْلِۜ وَكُلٌّ مِنَ الْاَخْيَارِۜ48
इसमाईल और अल-यसअ और ज़ुलकिफ़्ल को भी याद करो। इनमें से प्रत्येक ही अच्छा रहा है
هٰذَا ذِكْرٌۜ وَاِنَّ لِلْمُتَّق۪ينَ لَحُسْنَ مَاٰبٍۙ49
यह एक अनुस्मृति है। और निश्चय ही डर रखनेवालों के लिए अच्छा ठिकाना है
جَنَّاتِ عَدْنٍ مُفَتَّحَةً لَهُمُ الْاَبْوَابُۚ50
सदैव रहने के बाग़ है, जिनके द्वार उनके लिए खुले होंगे
مُتَّكِـ۪ٔينَ ف۪يهَا يَدْعُونَ ف۪يهَا بِفَاكِهَةٍ كَث۪يرَةٍ وَشَرَابٍ51
उनमें वे तकिया लगाए हुए होंगे। वहाँ वे बहुत-से मेवे और पेय मँगवाते होंगे
وَعِنْدَهُمْ قَاصِرَاتُ الطَّرْفِ اَتْرَابٌ52
और उनके पास निगाहें बचाए रखनेवाली स्त्रियाँ होंगी, जो समान अवस्था की होंगी
هٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِيَوْمِ الْحِسَابِ53
यह है वह चीज़, जिसका हिसाब के दिन के लिए तुमसे वादा किया जाता है
اِنَّ هٰذَا لَرِزْقُنَا مَا لَهُ مِنْ نَفَادٍۚ54
यह हमारा दिया है, जो कभी समाप्त न होगा
هٰذَاۜ وَاِنَّ لِلطَّاغ۪ينَ لَشَرَّ مَاٰبٍۙ55
एक और यह है, किन्तु सरकशों के लिए बहुत बुरा ठिकाना है;
جَهَنَّمَۚ يَصْلَوْنَهَاۚ فَبِئْسَ الْمِهَادُ56
जहन्नम, जिसमें वे प्रवेश करेंगे। तो वह बहुत ही बुरा विश्राम-स्थल है!
هٰذَاۙ فَلْيَذُوقُوهُ حَم۪يمٌ وَغَسَّاقٌۙ57
यह है, अब उन्हें इसे चखना है - खौलता हुआ पानी और रक्तयुक्त पीप
وَاٰخَرُ مِنْ شَكْلِه۪ٓ اَزْوَاجٌۜ58
और इसी प्रकार की दूसरी और भी चीज़ें
هٰذَا فَوْجٌ مُقْتَحِمٌ مَعَكُمْۚ لَا مَرْحَبًا بِهِمْۜ اِنَّهُمْ صَالُوا النَّارِ59
"यह एक भीड़ है जो तुम्हारे साथ घुसी चली आ रही है। कोई आवभगत उनके लिए नहीं। वे तो आग में पड़नेवाले है।"
قَالُوا بَلْ اَنْتُمْ۠ لَا مَرْحَبًا بِكُمْۜ اَنْتُمْ قَدَّمْتُمُوهُ لَنَاۚ فَبِئْسَ الْقَرَارُ60
वे कहेंगे, "नहीं, तुम नहीं। तुम्हारे लिए कोई आवभगत नहीं। तुम्ही यह हमारे आगे लाए हो। तो बहुत ही बुरी है यह ठहरने की जगह!"
قَالُوا رَبَّنَا مَنْ قَدَّمَ لَنَا هٰذَا فَزِدْهُ عَذَابًا ضِعْفًا فِي النَّارِ61
वे कहेंगे, "ऐ हमारे रब! जो हमारे आगे यह (मुसीबत) लाया उसे आग में दोहरी यातना दे!"