458. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
38 · साद39 · अज़-ज़ुमर
قَالَ فَالْحَقُّۘ وَالْحَقَّ اَقُولُۚ84
कहा, "तो यह सत्य है और मैं सत्य ही कहता हूँ
لَاَمْلَـَٔنَّ جَهَنَّمَ مِنْكَ وَمِمَّنْ تَبِعَكَ مِنْهُمْ اَجْمَع۪ينَ85
कि मैं जहन्नम को तुझसे और उन सबसे भर दूँगा, जिन्होंने उनमें से तेरा अनुसरण किया होगा।"
قُلْ مَٓا اَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ اَجْرٍ وَمَٓا اَنَا۬ مِنَ الْمُتَكَلِّف۪ينَ86
कह दो, "मैं इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक नहीं माँगता और न मैं बनानट करनेवालों में से हूँ।"
اِنْ هُوَ اِلَّا ذِكْرٌ لِلْعَالَم۪ينَ87
वह तो एक अनुस्मृति है सारे संसारवालों के लिए
وَلَتَعْلَمُنَّ نَبَاَهُ بَعْدَ ح۪ينٍ88
और थोड़ी ही अवधि के पश्चात उसकी दी हुई ख़बर तुम्हे मालूम हो जाएगी
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
تَنْز۪يلُ الْكِتَابِ مِنَ اللّٰهِ الْعَز۪يزِ الْحَك۪يمِ1
इस किताब का अवतरण अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी की ओर से है
اِنَّٓا اَنْزَلْنَٓا اِلَيْكَ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ فَاعْبُدِ اللّٰهَ مُخْلِصًا لَهُ الدّ۪ينَۜ2
निस्संदेह हमने यह किताब तुम्हारी ओर सत्य के साथ अवतरित की है
اَلَا لِلّٰهِ الدّ۪ينُ الْخَالِصُۜ وَالَّذ۪ينَ اتَّخَذُوا مِنْ دُونِه۪ٓ اَوْلِيَٓاءَۢ مَا نَعْبُدُهُمْ اِلَّا لِيُقَرِّبُونَٓا اِلَى اللّٰهِ زُلْفٰىۜ اِنَّ اللّٰهَ يَحْكُمُ بَيْنَهُمْ ف۪ي مَا هُمْ ف۪يهِ يَخْتَلِفُونَۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْد۪ي مَنْ هُوَ كَاذِبٌ كَفَّارٌ3
जान रखो कि विशुद्ध धर्म अल्लाह ही के लिए है। रहे वे लोग जिन्होंने उससे हटकर दूसरे समर्थक औऱ संरक्षक बना रखे है (कहते है,) "हम तो उनकी बन्दगी इसी लिए करते है कि वे हमें अल्लाह का सामीप्य प्राप्त करा दें।" निश्चय ही अल्लाह उनके बीच उस बात का फ़ैसला कर देगा जिसमें वे विभेद कर रहे है। अल्लाह उसे मार्ग नहीं दिखाता जो झूठा और बड़ा अकृतज्ञ हो
لَوْ اَرَادَ اللّٰهُ اَنْ يَتَّخِذَ وَلَدًا لَاصْطَفٰى مِمَّا يَخْلُقُ مَا يَشَٓاءُۙ سُبْحَانَهُۜ هُوَ اللّٰهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ4
यदि अल्लाह अपनी कोई सन्तान बनाना चाहता तो वह उसमें से, जिन्हें पैदा कर रहा है, चुन लेता। महान और उच्च है वह! वह अल्लाह है अकेला, सब पर क़ाबू रखनेवाला
خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ بِالْحَقِّۚ يُكَوِّرُ الَّيْلَ عَلَى النَّهَارِ وَيُكَوِّرُ النَّهَارَ عَلَى الَّيْلِ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَۜ كُلٌّ يَجْر۪ي لِاَجَلٍ مُسَمًّىۜ اَلَا هُوَ الْعَز۪يزُ الْغَفَّارُ5
उसने आकाशों और धरती को सत्य के साथ पैदा किया। रात को दिन पर लपेटता है और दिन को रात पर लपेटता है। और उसने सूर्य और चन्द्रमा को वशीभुत कर रखा है। प्रत्येक एक नियत समय को पूरा करने के लिए चल रहा है। जान रखो, वही प्रभुत्वशाली, बड़ा क्षमाशील है