459. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
39 · अज़-ज़ुमर
خَلَقَكُمْ مِنْ نَفْسٍ وَاحِدَةٍ ثُمَّ جَعَلَ مِنْهَا زَوْجَهَا وَاَنْزَلَ لَكُمْ مِنَ الْاَنْعَامِ ثَمَانِيَةَ اَزْوَاجٍۜ يَخْلُقُكُمْ ف۪ي بُطُونِ اُمَّهَاتِكُمْ خَلْقًا مِنْ بَعْدِ خَلْقٍ ف۪ي ظُلُمَاتٍ ثَلٰثٍۜ ذٰلِكُمُ اللّٰهُ رَبُّكُمْ لَهُ الْمُلْكُۜ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۚ فَاَنّٰى تُصْرَفُونَ6
उसने तुम्हें अकेली जान पैदा किया; फिर उसी से उसका जोड़ा बनाया औऱ तुम्हारे लिए चौपायों में से आठ नर-मादा उतारे। वह तुम्हारी माँओं के पेटों में तीन अँधेरों के भीतर तुम्हें एक सृजनरूप के पश्चात अन्य एक सृजनरूप देता चला जाता है। वही अल्लाह तुम्हारा रब है। बादशाही उसी की है, उसके अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं। फिर तुम कहाँ फिरे जाते हो?
اِنْ تَكْفُرُوا فَاِنَّ اللّٰهَ غَنِيٌّ عَنْكُمْ وَلَا يَرْضٰى لِعِبَادِهِ الْكُفْرَۚ وَاِنْ تَشْكُرُوا يَرْضَهُ۬ لَكُمْۜ وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ اُخْرٰىۜ ثُمَّ اِلٰى رَبِّكُمْ مَرْجِعُكُمْ فَيُنَبِّئُكُمْ بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَۜ اِنَّهُ عَل۪يمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ7
यदि तुम इनकार करोगे तो अल्लाह तुमसे निस्पृह है। यद्यपि वह अपने बन्दों के लिए इनकार को पसन्द नहीं करता, किन्तु यदि तुम कृतज्ञता दिखाओगे, तो उसे वह तुम्हारे लिए पसन्द करता है। कोई बोझ न उठाएगा। फिर तुम्हारी वापसी अपने रब ही की ओर है। और वह तुम्हे बता देगा, जो कुछ तुम करते रहे होगे। निश्चय ही वह सीनों तक की बातें जानता है
وَاِذَا مَسَّ الْاِنْسَانَ ضُرٌّ دَعَا رَبَّهُ مُن۪يبًا اِلَيْهِ ثُمَّ اِذَا خَوَّلَهُ نِعْمَةً مِنْهُ نَسِيَ مَا كَانَ يَدْعُٓوا اِلَيْهِ مِنْ قَبْلُ وَجَعَلَ لِلّٰهِ اَنْدَادًا لِيُضِلَّ عَنْ سَب۪يلِه۪ۜ قُلْ تَمَتَّعْ بِكُفْرِكَ قَل۪يلًاۗ اِنَّكَ مِنْ اَصْحَابِ النَّارِ8
जब मनुष्य को कोई तकलीफ़ पहुँचती है तो वह अपने रब को उसी की ओर रुजू होकर पुकारने लगता है, फिर जब वह उसपर अपनी अनुकम्पा करता है, तो वह उस चीज़ को भूल जाता है जिसके लिए पहले पुकार रहा था और (दूसरो को) अल्लाह के समकक्ष ठहराने लगता है, ताकि इसके परिणामस्वरूप वह उसकी राह से भटका दे। कह दो, "अपने इनकार का थोड़ा मज़ा ले लो। निस्संदेह तुम आगवालों में से हो।"
اَمَّنْ هُوَ قَانِتٌ اٰنَٓاءَ الَّيْلِ سَاجِدًا وَقَٓائِمًا يَحْذَرُ الْاٰخِرَةَ وَيَرْجُوا رَحْمَةَ رَبِّه۪ۜ قُلْ هَلْ يَسْتَوِي الَّذ۪ينَ يَعْلَمُونَ وَالَّذ۪ينَ لَا يَعْلَمُونَۜ اِنَّمَا يَتَذَكَّرُ اُو۬لُوا الْاَلْبَابِ۟9
(क्या उक्त व्यक्ति अच्छा है) या वह व्यक्ति जो रात की घड़ियों में सजदा करता और खड़ा रहता है, आख़िरत से डरता है और अपने रब की दयालुता की आशा रखता हुआ विनयशीलता के साथ बन्दगी में लगा रहता है? कहो, "क्या वे लोग जो जानते है और वे लोग जो नहीं जानते दोनों समान होंगे? शिक्षा तो बुद्धि और समझवाले ही ग्रहण करते है।"
قُلْ يَا عِبَادِ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا اتَّقُوا رَبَّكُمْۜ لِلَّذ۪ينَ اَحْسَنُوا ف۪ي هٰذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةٌۜ وَاَرْضُ اللّٰهِ وَاسِعَةٌۜ اِنَّمَا يُوَفَّى الصَّابِرُونَ اَجْرَهُمْ بِغَيْرِ حِسَابٍ10
कह दो कि "ऐ मेरे बन्दो, जो ईमान लाए हो! अपने रब का डर रखो। जिन लोगों ने अच्छा कर दिखाया उनके लिए इस संसार में अच्छाई है, और अल्लाह की धरती विस्तृत है। जमे रहनेवालों को तो उनका बदला बेहिसाब मिलकर रहेगा।"