460. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
39 · अज़-ज़ुमर
قُلْ اِنّ۪ٓي اُمِرْتُ اَنْ اَعْبُدَ اللّٰهَ مُخْلِصًا لَهُ الدّ۪ينَۙ11
कह दो, "मुझे तो आदेश दिया गया है कि मैं अल्लाह की बन्दगी करूँ, धर्म (भक्तिभाव एवं निष्ठान) को उसी के लिए विशुद्ध करते हुए
وَاُمِرْتُ لِاَنْ اَكُونَ اَوَّلَ الْمُسْلِم۪ينَ12
और मुझे आदेश दिया गया है कि सबसे बढ़कर मैं स्वयं आज्ञाकारी बनूँ।"
قُلْ اِنّ۪ٓي اَخَافُ اِنْ عَصَيْتُ رَبّ۪ي عَذَابَ يَوْمٍ عَظ۪يمٍ13
कहो, "यदि मैं अपने रब की अवज्ञा करूँ तो मुझे एक बड़े दिन की यातना का भय है।"
قُلِ اللّٰهَ اَعْبُدُ مُخْلِصًا لَهُ د۪ين۪يۙ14
कहो, "मैं तो अल्लाह ही की बन्दगी करता हूँ, अपने धर्म को उसी के लिए विशुद्ध करते हुए
فَاعْبُدُوا مَا شِئْتُمْ مِنْ دُونِه۪ۜ قُلْ اِنَّ الْخَاسِر۪ينَ الَّذ۪ينَ خَسِرُٓوا اَنْفُسَهُمْ وَاَهْل۪يهِمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ اَلَا ذٰلِكَ هُوَ الْخُسْرَانُ الْمُب۪ينُ15
अब तुम उससे हटकर जिसकी चाहो बन्दगी करो।" कह दो, "वास्तव में घाटे में पड़नेवाले तो वही है, जिन्होंने अपने आपको और अपने लोगों को क़ियामत के दिन घाटे में डाल दिया। जान रखो, यही खुला घाटा है
لَهُمْ مِنْ فَوْقِهِمْ ظُلَلٌ مِنَ النَّارِ وَمِنْ تَحْتِهِمْ ظُلَلٌۜ ذٰلِكَ يُخَوِّفُ اللّٰهُ بِه۪ عِبَادَهُۜ يَا عِبَادِ فَاتَّقُونِ16
उनके लिए उनके ऊपर से भी आग की छतरियाँ होंगी और उनके नीचे से भी छतरियाँ होंगी। यही वह चीज़ है, जिससे अल्लाह अपने बन्दों को डराता है, "ऐ मेरे बन्दो! अतः तुम मेरा डर रखो।"
وَالَّذ۪ينَ اجْتَنَبُوا الطَّاغُوتَ اَنْ يَعْبُدُوهَا وَاَنَابُٓوا اِلَى اللّٰهِ لَهُمُ الْبُشْرٰىۚ فَبَشِّرْ عِبَادِۙ17
रहे वे लोग जो इससे बचे कि वे ताग़ूत (बढ़े हुए फ़सादी) की बन्दगी करते है और अल्लाह की ओर रुजू हुए, उनके लिए शुभ सूचना है।
اَلَّذ۪ينَ يَسْتَمِعُونَ الْقَوْلَ فَيَتَّبِعُونَ اَحْسَنَهُۜ اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ هَدٰيهُمُ اللّٰهُ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمْ اُو۬لُوا الْاَلْبَابِ18
अतः मेरे उन बन्दों को शुभ सूचना दे दो जो बात को ध्यान से सुनते है; फिर उस अच्छी से अच्छी बात का अनुपालन करते है। वही हैं, जिन्हें अल्लाह ने मार्ग दिखाया है और वही बुद्धि और समझवाले है
اَفَمَنْ حَقَّ عَلَيْهِ كَلِمَةُ الْعَذَابِۜ اَفَاَنْتَ تُنْقِذُ مَنْ فِي النَّارِۚ19
तो क्या वह व्यक्ति जिसपर यातना की बात सत्यापित हो चुकी है (यातना से बच सकता है)? तो क्या तुम छुड़ा लोगे उसको जो आग में है
لٰكِنِ الَّذ۪ينَ اتَّقَوْا رَبَّهُمْ لَهُمْ غُرَفٌ مِنْ فَوْقِهَا غُرَفٌ مَبْنِيَّةٌۙ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُۜ وَعْدَ اللّٰهِۜ لَا يُخْلِفُ اللّٰهُ الْم۪يعَادَ20
अलबत्ता जो लोग अपने रब से डरकर रहे उनके लिए ऊपरी मंज़िल पर कक्ष होंगे, जिनके ऊपर भी निर्मित कक्ष होंगे। उनके नीचे नहरें बह रही होगी। यह अल्लाह का वादा है। अल्लाह अपने वादे का उल्लंघन नहीं करता
اَلَمْ تَرَ اَنَّ اللّٰهَ اَنْزَلَ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً فَسَلَكَهُ يَنَاب۪يعَ فِي الْاَرْضِ ثُمَّ يُخْرِجُ بِه۪ زَرْعًا مُخْتَلِفًا اَلْوَانُهُ ثُمَّ يَه۪يجُ فَتَرٰيهُ مُصْفَرًّا ثُمَّ يَجْعَلُهُ حُطَامًاۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَذِكْرٰى لِاُو۬لِي الْاَلْبَابِ۟21
क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाश से पानी उतारा, फिर धरती में उसके स्रोत प्रवाहित कर दिए; फिर उसने द्वारा खेती निकालता है, जिसके विभिन्न रंग होते है; फिर वह सूखने लगती है; फिर तुम देखते हो कि वह पीली पड़ गई; फिर वह उसे चूर्ण-विचूर्ण कर देता है? निस्संदेह इसमें बुद्धि और समझवालों के लिए बड़ी याददिहानी है