461. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

461. पृष्ठ
39 · अज़-ज़ुमर
اَفَمَنْ شَرَحَ اللّٰهُ صَدْرَهُ لِلْاِسْلَامِ فَهُوَ عَلٰى نُورٍ مِنْ رَبِّه۪ۜ فَوَيْلٌ لِلْقَاسِيَةِ قُلُوبُهُمْ مِنْ ذِكْرِ اللّٰهِۜ اُو۬لٰٓئِكَ ف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ22
अब क्या वह व्यक्ति जिसका सीना (हृदय) अल्लाह ने इस्लाम के लिए खोल दिया, अतः वह अपने रब की ओर से प्रकाश पर है, (उस व्यक्ति के समान होगा जो कठोर हृदय और अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल है)? अतः तबाही है उन लोगों के लिए जिनके दि कठोर हो चुके है, अल्लाह की याद से ख़ाली होकर! वही खुली गुमराही में पड़े हुए है
اَللّٰهُ نَزَّلَ اَحْسَنَ الْحَد۪يثِ كِتَابًا مُتَشَابِهًا مَثَانِيَۗ تَقْشَعِرُّ مِنْهُ جُلُودُ الَّذ۪ينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُمْۚ ثُمَّ تَل۪ينُ جُلُودُهُمْ وَقُلُوبُهُمْ اِلٰى ذِكْرِ اللّٰهِۜ ذٰلِكَ هُدَى اللّٰهِ يَهْد۪ي بِه۪ مَنْ يَشَٓاءُۜ وَمَنْ يُضْلِلِ اللّٰهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍ23
अल्लाह ने सर्वोत्तम वाणी अवतरित की, एक ऐसी किताब जिसके सभी भाग परस्पर मिलते-जुलते है, जो रुख़ फेर देनेवाली (क्रांतिकारी) है। उससे उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते है जो अपने रब से डरते है। फिर उनकी खालें (शरीर) और उनके दिल नर्म होकर अल्लाह की याद की ओर झुक जाते है। वह अल्लाह का मार्गदर्शन है, उसके द्वारा वह सीधे मार्ग पर ले आता है, जिसे चाहता है। और जिसको अल्लाह पथभ्रष्ट रहने दे, फिर उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं
اَفَمَنْ يَتَّق۪ي بِوَجْهِه۪ سُٓوءَ الْعَذَابِ يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ وَق۪يلَ لِلظَّالِم۪ينَ ذُوقُوا مَا كُنْتُمْ تَكْسِبُونَ24
अब क्या जो क़ियामत के दिन अपने चहरें को बुरी यातना (से बचने) की ढाल बनाएगा वह (यातना से सुरक्षित लोगों जैसा होगा)? और ज़ालिमों से कहा जाएगा, "चखों मज़ा उस कमाई का, जो तुम करते रहे थे!"
كَذَّبَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَاَتٰيهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ25
जो लोग उनसे पहले थे उन्होंने भी झूठलाया। अन्ततः उनपर वहाँ से यातना आ पहुँची, जिसका उन्हें कोई पता न था
فَاَذَاقَهُمُ اللّٰهُ الْخِزْيَ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۚ وَلَعَذَابُ الْاٰخِرَةِ اَكْبَرُۢ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ26
फिर अल्लाह ने उन्हें सांसारिक जीवन में भी रुसवाई का मज़ा चखाया और आख़िरत की यातना तो इससे भी बड़ी है। काश! वे जानते
وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ ف۪ي هٰذَا الْقُرْاٰنِ مِنْ كُلِّ مَثَلٍ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَۚ27
हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए हर प्रकार की मिसालें पेश कर दी हैं, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें
قُرْاٰنًا عَرَبِيًّا غَيْرَ ذ۪ي عِوَجٍ لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ28
एक अरबी क़ुरआन के रूप में, जिसमें कोई टेढ़ नहीं, ताकि वे धर्मपरायणता अपनाएँ
ضَرَبَ اللّٰهُ مَثَلًا رَجُلًا ف۪يهِ شُرَكَٓاءُ مُتَشَاكِسُونَ وَرَجُلًا سَلَمًا لِرَجُلٍۜ هَلْ يَسْتَوِيَانِ مَثَلًاۜ اَلْحَمْدُ لِلّٰهِۚ بَلْ اَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ29
अल्लाह एक मिसाल पेश करता है कि एक व्यक्ति है, जिसके मालिक होने में कई क्यक्ति साक्षी है, आपस में खींचातानी करनेवाले, और एक क्यक्ति वह है जो पूरा का पूरा एक ही व्यक्ति का है। क्या दोनों का हाल एक जैसा होगा? सारी प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, किन्तु उनमें से अधिकांश लोग नहीं जानते
اِنَّكَ مَيِّتٌ وَاِنَّهُمْ مَيِّتُونَۘ30
तुम्हें भी मरना है और उन्हें भी मरना है
ثُمَّ اِنَّكُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ عِنْدَ رَبِّكُمْ تَخْتَصِمُونَ۟31
फिर निश्चय ही तुम सब क़ियामत के दिन अपने रब के समक्ष झगड़ोगे